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This Article is From Feb 03, 2026

रूस को ट्रंप की बात पर यकीन नहीं,बोला- भारत ने तेल की खरीद रोकने की बात नहीं कही

जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन के कम से कम पांच क्षेत्रों पर की गई बमबारी में विशेष रूप से बिजली ग्रिड को निशाना बनाया गया था. यह हमला मॉस्को के उस अभियान का हिस्सा था.

रूस को ट्रंप की बात पर यकीन नहीं,बोला- भारत ने तेल की खरीद रोकने की बात नहीं कही
रूस से तेल की खरीद को लेकर भारत पर अमेरिका ने 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाया था.
  • क्रेमलिन ने कहा कि भारत ने ट्रंप के साथ ट्रेड डील के बाद रूसी तेल खरीदना बंद करने का कोई संकेत नहीं दिया है
  • रूस ने न्यू स्टार्ट परमाणु संधि की समाप्ति से पहले दुनिया को एक खतरनाक दौर की ओर बढ़ने की चेतावनी दी है
  • रूस ने परमाणु हथियारों को सीमित करने वाले मूलभूत दस्तावेज के समाप्त होने की संभावना जताई है

क्रेमलिन ने मंगलवार को कहा कि उसे भारत से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ व्यापार समझौते की घोषणा के बाद वह रूसी तेल खरीदना बंद कर देगा.

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा, "इस मामले पर नई दिल्ली की ओर से अभी तक हमें कोई बयान नहीं मिला है." यह बयान ट्रंप के उस बयान के एक दिन बाद जिसमें उन्होंने कहा था कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टैरिफ में ढील देने के समझौते के तहत रूसी तेल खरीदना बंद करने का वादा किया है.

पेस्कोव ने पत्रकारों से कहा, "हम अमेरिका-भारत के द्विपक्षीय संबंधों का सम्मान करते हैं, लेकिन हम रूस और भारत के बीच उन्नत रणनीतिक साझेदारी के विकास को भी उतना ही महत्व देते हैं. यह हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण है, और हम दिल्ली के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को और बढ़ाने का इरादा रखते हैं."

भारत-रूस तेल रिश्ता समझिए

  1. भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता है. फरवरी 2022 में यूक्रेन में युद्ध छिड़ने के बाद रूस के समुद्री मार्ग से आने वाले तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया.
  2. मॉस्को चाहता है कि भारत अपनी खरीदारी का स्तर ऊंचा बनाए रखे, क्योंकि नवंबर में प्रतिबंधों के दबाव में कुछ भारतीय रिफाइनरियों ने आयात बंद कर दिया था.
  3. व्यापारिक सूत्रों के आंकड़ों से पता चला है कि दिसंबर में भारत का रूसी तेल आयात दो वर्षों में सबसे कम हो गया, जबकि भारतीय आयात में ओपेक की हिस्सेदारी 11 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई.
  4. अमेरिका और यूरोपीय संघ द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों ने भारत को रूसी तेल की आपूर्ति को धीमा कर दिया है, जिसके चलते दिसंबर में आयात पिछले महीने की तुलना में लगभग 22% घटकर 1.38 मिलियन बैरल प्रति दिन रह गया.
  5. इससे रूस की कुल हिस्सेदारी घटकर 27.4% रह गई, जो जनवरी 2023 के बाद सबसे कम है, जबकि ओपेक की हिस्सेदारी बढ़कर 53.2% हो गई, आंकड़ों से यह पता चला.
  6. गिरावट के बावजूद, रूस दिसंबर में और इस वित्तीय वर्ष के पहले नौ महीनों (31 मार्च, 2026 तक) के दौरान भारत को तेल का शीर्ष आपूर्तिकर्ता बना रहा, जिसके बाद इराक और सऊदी अरब का स्थान रहा.
  7. रूस समर्थित भारतीय रिफाइनर नायरा एनर्जी, जिसमें रोसनेफ्ट की आंशिक हिस्सेदारी है, अन्य आपूर्तिकर्ताओं के पीछे हटने के बाद पूरी तरह से रूसी तेल पर निर्भर है. रूस नायरा की स्थानीय ईंधन बिक्री और क्षमता उपयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत का समर्थन चाहता है.
  8. भारत की ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन सुदूर पूर्व में रूस की सखालिन-1 तेल और गैस परियोजना में अपनी 20% हिस्सेदारी बरकरार रखना चाहती है.
  9. भारतीय कंपनियां ऑयल इंडिया लिमिटेड, इंडियन ऑयल कॉर्प और भारत पेट्रो रिसोर्सेज, रोसनेफ्ट की तेल उत्पादक सहायक कंपनियों जेएससी वैंकॉर्नफ्ट में 23.9% और तास युरियाख नेफ्तेगाज़ोडोबिचा में 29.9% हिस्सेदारी रखती हैं,
  10. ओएनजीसी की विदेशी निवेश शाखा, ओएनजीसी विदेश, भी जेएससी वैंकॉर्नफ्ट में 26% हिस्सेदारी रखती है. इन संपत्तियों से भारतीय कंपनियों को देय लाखों डॉलर का लाभांश रूसी बैंकों में फंसा हुआ है. ऑयल इंडिया रूसी तेल ब्लॉक लाइसेंस 61 में 50% हिस्सेदारी भी रखती है.

अमेरिका को चेताया

इसके साथ ही मंगलवार को क्रेमलिन ने चेतावनी दी कि दुनिया एक "खतरनाक" दौर की ओर बढ़ रही है क्योंकि अमेरिका-रूस की आखिरी परमाणु संधि इसी सप्ताह समाप्त होने वाली है. दिमित्री पेस्कोव ने न्यू स्टार्ट संधि की समाप्ति से कुछ दिन पहले कहा, "कुछ ही दिनों में दुनिया पहले से कहीं अधिक खतरनाक स्थिति में होगी." रूस ने संधि की कुछ शर्तों को बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है. क्रेमलिन ने आगे कहा कि दुनिया की दो सबसे बड़ी परमाणु शक्तियों के पास इन हथियारों को सीमित और नियंत्रित करने वाला कोई मूलभूत दस्तावेज नहीं बचेगा.

450 ड्रोन और 70 मिसाइलें दागीं

वहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने मंगलवार को बताया कि रूस ने रात भर चले एक बड़े हमले में यूक्रेन पर लगभग 450 लंबी दूरी के ड्रोन और विभिन्न प्रकार की 70 मिसाइलें दागीं. यह हमला दोनों देशों के बीच संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी में अमेरिका की मध्यस्थता से होने वाली वार्ता से एक दिन पहले हुआ, जिसका उद्देश्य रूस द्वारा लगभग चार साल पहले शुरू किए गए पूर्ण युद्ध को समाप्त करना था.

जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन के कम से कम पांच क्षेत्रों पर की गई बमबारी में विशेष रूप से बिजली ग्रिड को निशाना बनाया गया था. यह हमला मॉस्को के उस अभियान का हिस्सा था जिसके तहत वह पिछले कई वर्षों की सबसे भीषण सर्दी के दौरान नागरिकों को बिजली, हीटिंग और पीने के पानी से वंचित करना चाहता है. अधिकारियों ने बताया कि कम से कम 10 लोग घायल हुए हैं.

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