सुप्रीम कोर्ट उपहार सिनेमा अग्निकांड से जुड़ा एक मामला चल रहा है.
- इससे पहले, आमोद कंठ ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था
- राहत नहीं मिलने पर उन्होंने शीर्ष अदालत में दायर की थी याचिका
- 1997 में हुए इस अग्निकांड में 59 दर्शकों की मृत्यु हो गई थी
नई दिल्ली:
2013 में सुप्रीम कोर्ट ने कंठ के खिलाफ निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर रोक लगा दी थी. कंठ की याचिका पर सीबीआई से भी जवाब तलब किया गया था. अमोद कंठ ने उपहार सिनेमा में अतिरिक्त सीटें लगाने की अनुमति मामले में पटियाला हाउस अदालत द्वारा 2010 में उन्हें समन करने के आदेश को चुनौती दी है. 1997 में हुए इस अग्निकांड में 59 दर्शकों की मृत्यु हो गई थी.
इससे पहले, आमोद कंठ ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. राहत नहीं मिलने पर उन्होंने शीर्ष अदालत में याचिका दायर की. कंठ की ओर से न्यायालय में कहा गया था कि हाई कोर्ट ने इस तथ्य पर गौर नहीं किया कि सीबीआई उनके खिलाफ कार्यवाही के लिए स्वीकृति लेने में विफल रही है. अग्निकांड के पीडि़तों के अनुरोध पर ही निचली अदालत ने 12 अगस्त 2010 को अमोद कंठ को सम्मन जारी किया था.
हाई कोर्ट ने पूर्व आईपीएस अधिकारी के इस तर्क को अस्वीकार कर दिया था कि उपहार सिनेमा में अतिरिक्त सीटें लगाने की अनुमति देने के मामले में उनके खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जा सकता क्योंकि जांच एजेंसी ने इसके लिए मंजूरी हासिल नहीं ली है. हाई कोर्ट ने कहा कि अगर वह निचली अदालत में यह सवाल उठायेंगे तो वहीं पर इस मसले पर विचार किया जा सकता है. हाई कोर्ट ने कंठ की इस दलील को भी ठुकरा दिया था कि उन्हें क्लीन चिट देने वाली सीबीआई की मामला बंद करने की रिपोर्ट अस्वीकार करके निचली अदालत ने गलती की है.
इससे पहले, आमोद कंठ ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. राहत नहीं मिलने पर उन्होंने शीर्ष अदालत में याचिका दायर की. कंठ की ओर से न्यायालय में कहा गया था कि हाई कोर्ट ने इस तथ्य पर गौर नहीं किया कि सीबीआई उनके खिलाफ कार्यवाही के लिए स्वीकृति लेने में विफल रही है. अग्निकांड के पीडि़तों के अनुरोध पर ही निचली अदालत ने 12 अगस्त 2010 को अमोद कंठ को सम्मन जारी किया था.
हाई कोर्ट ने पूर्व आईपीएस अधिकारी के इस तर्क को अस्वीकार कर दिया था कि उपहार सिनेमा में अतिरिक्त सीटें लगाने की अनुमति देने के मामले में उनके खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जा सकता क्योंकि जांच एजेंसी ने इसके लिए मंजूरी हासिल नहीं ली है. हाई कोर्ट ने कहा कि अगर वह निचली अदालत में यह सवाल उठायेंगे तो वहीं पर इस मसले पर विचार किया जा सकता है. हाई कोर्ट ने कंठ की इस दलील को भी ठुकरा दिया था कि उन्हें क्लीन चिट देने वाली सीबीआई की मामला बंद करने की रिपोर्ट अस्वीकार करके निचली अदालत ने गलती की है.
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