विधानसभा चुनाव 2021

ममता बनर्जी की चुनौती, अगर झूठे साबित हों, तो 'कान पकड़कर उठक-बैठक लगाएं' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

ममता बनर्जी की चुनौती, अगर झूठे साबित हों, तो 'कान पकड़कर उठक-बैठक लगाएं' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

कोलकाता से लगभग 20 किलोमीटर दूर बारासत में जनता के बीच मुख्यमंत्री ने कहा, "मोदी झूठे हैं... प्रधानमंत्री झूठे हैं..." लेकिन तुरंत ही उन्होंने अपनी भाषा में सुधार करते हुए कहा, "झूठा असंसदीय शब्द है... प्रधानमंत्री लोगों को गुमराह कर रहे हैं..."

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केंद्रीय निर्वाचन आयोग द्वारा विधानसभा चुनाव 2021 के लिए घोषित किए गए कार्यक्रम के अनुसार चार राज्यों पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल व असम तथा केंद्रशासित प्रदेश पुदुच्चेरी के कुल 824 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव 27 मार्च से शुरू हो जाएंगे, और चुनाव परिणामों की घोषणा रविवार, 2 मई, 2021 को की जाएगी.

विधानसभा चुनाव 2021 के दौरान पश्चिम बंगाल की कुल 294 सीटों पर कुल आठ चरणों में मतदान होगा. पहले चरण में 30 सीटों पर 27 मार्च को, दूसरे चरण में 30 सीटों पर 1 अप्रैल को, तीसरे चरण में 31 सीटों पर 6 अप्रैल को, चौथे चरण में 44 सीटों पर 10 अप्रैल को, पांचवें चरण में 45 सीटों पर 17 अप्रैल को, छठे चरण में 43 सीटों पर 22 अप्रैल को, सातवें चरण में 36 सीटों पर 26 अप्रैल को तथा आठवें चरण में 35 सीटों पर 29 अप्रैल को मतदान करवाया जाएगा. तमिलनाडु में सभी 234 विधानसभा सीटों और केरल की सभी 140 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में 6 अप्रैल को मतदान करवाया जाएगा. पुदुच्चेरी की 30 विधानसभा सीटों पर इसी दिन मतदान करवाया जाएगा. असम की कुल 126 सीटों पर कुल तीन चरणों में मतदान होगा. पहले चरण में 47 सीटों पर 27 मार्च को, दूसरे चरण में 39 सीटों पर 1 अप्रैल को तथा तीसरे चरण में 40 सीटों पर 6 अप्रैल को मतदान करवाया जाएगा.

विधानसभा चुनाव 2021 के लिए पांचों राज्यों में आदर्श चुनाव आचार संहिता प्रभावी हो चुकी है. चुनाव में कुल 18.68 करोड़ मतदाता भाग ले सकते हैं. कोरोना महामारी के प्रकोप के बीच बिहार विधानसभा चुनाव के बाद यह पहला बड़ा चुनाव है. विधानसभा चुनाव के लिए 2.7 लाख मतदान केंद्रों की स्थापना की गई है, और सभी चुनाव अधिकारियों को फ्रंटलाइन कर्मी मानकर उन्हें कोरोनावायरस वैक्सीन लगाई जाएगी.

पश्चिम बंगाल की लड़ाई सबसे अहम नज़र आ रही है, जहां दो बार से मुख्यमंत्री के पद पर बैठीं ममता बनर्जी को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से कड़ी चुनौती मिल रही है. ममता के करीबी और सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले कई नेता और रणनीतिकार हाल ही में उनकी तृणमूल कांग्रेस (TMC) पार्टी छोड़कर BJP में चले गए हैं, और यह सिलसिला अभी तक थमा नहीं है. वह खुद भी अपनी पार्टी के नेताओं को डराने के लिए केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप BJP पर लगा रही हैं. बहरहाल, TMC का नारा 'खेला होबे' (खेल जारी है) है, जबकि BJP 'पॉरिबर्तन' (परिवर्तन) का आह्वान कर रही है.

तमिलनाडु में सत्तासीन AIADMK अपनी करिश्माई नेता तथा मुख्यमंत्री जयललिता के निधन के बाद पहली बार चुनाव का सामना करने जा रही है. विपक्षी DMK-कांग्रेस गठबंधन ने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल की थी, औऱ उन्हें उम्मीद है कि विधानसभा चुनाव में भी जनता उन्हीं का साथ देगी.

तमिलनाडु में BJP का बड़ा जनाधार कभी नहीं रहा है, सो, उन्हें इस बार पुदुच्चेरी में ज़्यादा आशाएं हैं, जहां हाल ही में कांग्रेस सरकार के पतन के बाद राष्ट्रपति शासन लागू हुआ है. वर्ष 2016 में हुए पिछले चुनाव में कांग्रेस ही पुदुच्चेरी में जीती थी, लेकिन एक के बाद एक इस्तीफों से सत्ता गंवा बैठी - बिल्कुल उसी तरह, जैसा मध्य प्रदेश और कर्नाटक में भी हो चुका है.

BJP असम में भी सत्ता बरकरार रखने के लिए जमकर प्रचार कर रही है, जहां वह 2016 में कांग्रेस को हराकर पहली बार गद्दी हासिल कर पाई थी. विधानसभा चुनाव 2021 में ऐसा पहली बार होगा, जब कांग्रेस असम में अकेले चुनाव नहीं लड़ रही है, और चिर-प्रतिद्वंद्वी रहे बदरुद्दीन अजमल के नेतृत्व वाली AIUDF, छोटे क्षेत्रीय संगठन आंचलिक गण मोर्चा (AGM) तथा तीन वामपंथी पार्टियों के साथ गठबंधन किया है. उधर, AJP तथा रायजॉर दल ने भी क्षेत्रीय गठबंधन बनाया है, जिसके चलते चुनाव त्रिकोणीय हो गया है.

केरल में सत्तारूढ़ वामपंथी-नीत गठबंधन तथा विपक्षी कांग्रेस-नीत गठबंधन के बीच कांटे की टक्कर है. पिछले चुनावों में मतदाता आमतौर पर एक-एक बार दोनों को सत्ता सौंपते रहे हैं, लेकिन हालिया स्थानीय निकाय चुनाव में जीत हासिल करने वाले वामपंथी गठबंधन को बढ़त बरकरार रखने की उम्मीद है.