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17 दिन में 543 इमारतें ध्वस्त, 178 सील...सत्य निकेतन हादसे पर MCD ने हाईकोर्ट में दिया जबाब

दिल्ली के सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे में हाईकोर्ट ने 7 सितंबर को दिल्ली पुलिस, MCD और दिल्ली विश्वविद्यालय से जवाब मांगा था. 

17 दिन में 543 इमारतें ध्वस्त, 178 सील...सत्य निकेतन हादसे पर MCD ने हाईकोर्ट में दिया जबाब
सत्य निकेतन हादसे पर MCD ने हाईकोर्ट में अपना जबाव दिया है.

दिल्ली के सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे के बाद नगर निगम (MCD) ने अवैध निर्माणों और असुरक्षित इमारतों के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है. शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान MCD ने बताया कि हादसे के बाद 17 दिनों के भीतर 543 संपत्तियों को ध्वस्त किया गया और 178 संपत्तियों को सील किया गया. इसके अलावा 354 संपत्तियों को अवैध निर्माण के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, 205 संपत्तियों को सील करने के नोटिस दिए गए तथा 98 संपत्तियों के खिलाफ ध्वस्तीकरण के आदेश पारित किए गए.

वरिष्ठ अधिकारियों पर भी गिरी कार्रवाई की गाज

MCD की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ को बताया कि हादसे के तुरंत बाद मामले को उच्चतम कार्यकारी स्तर पर लिया गया. उन्होंने कहा कि कार्रवाई केवल निचले स्तर के अधिकारियों तक सीमित नहीं रही बल्कि सुपरवाइजरी चेन के पांच अधिकारियों को भी निलंबित किया गया है.

12 जोन में 2,453 इमारतों का निरीक्षण

हाईकोर्ट के 7 सितंबर के आदेश के बाद MCD ने दिल्ली के सभी 12 जोन में पीजी इमारतों का विशेष निरीक्षण अभियान चलाया. निगम के अनुसार कुल 2,453 इमारतों की जांच की गई. इनमें से 2,342 इमारतें सुरक्षित पाई गईं. 91 इमारतों में मामूली मरम्मत की जरूरत सामने आई जबकि 30 इमारतों में बड़ी मरम्मत की आवश्यकता पाई गई. चार इमारतें ऐसी मिलीं जो खतरनाक स्थिति में थीं. MCD ने कहा कि जिन इमारतों में मरम्मत की जरूरत है उनके मालिकों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई है ताकि भविष्य में किसी तरह की दुर्घटना न हो.

छात्र आवासों के लिए बनेगा नया नियामक ढांचा

दिल्ली सरकार ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है. सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने 10 सितंबर को छात्रों के आवास, सुरक्षा और नियमन की समीक्षा के लिए 18 सदस्यीय हाई-पावर्ड कमेटी को मंजूरी दी थी. कमेटी की पहली बैठक 15 सितंबर को हुई जिसमें पीजी और निजी छात्रावासों के लिए नियामक ढांचा तैयार करने का फैसला लिया गया.

15 दिन में बनेगा केंद्रीय छात्र आवास पोर्टल

तत्काल कदम के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय को एक केंद्रीय छात्र आवास पोर्टल विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इस पोर्टल पर छात्र आवासों से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध होंगी. इसे 15 दिनों के भीतर तैयार किया जाना है. वहीं MCD नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी की तकनीकी सहायता से पीजी के पंजीकरण और निगरानी के लिए अलग केंद्रीय पोर्टल विकसित करेगा.

जांच की मांग पर चल रही सुनवाई

यह मामला अनिकेत कुमार गुप्ता की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया. याचिका में सत्य निकेतन हादसे की निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग की गई है. याचिकाकर्ता ने मकान मालिक, ठेकेदार, बिल्डर, आर्किटेक्ट, स्ट्रक्चरल इंजीनियर और निर्माण कार्य में शामिल लोगों की भूमिका की जांच की मांग की है.

हाईकोर्ट ने 7 सितंबर को दिल्ली पुलिस, MCD और दिल्ली विश्वविद्यालय से जवाब मांगा था. अदालत ने कहा था कि यदि संबंधित अधिकारी अपने वैधानिक कर्तव्यों के प्रति सजग रहते तो इस हादसे को टाला जा सकता था.

पुलिस ने छह आरोपियों को बताया जिम्मेदार

दिल्ली पुलिस ने 21 सितंबर को दाखिल अपने हलफनामे में कहा था कि मामले में गिरफ्तार छह आरोपियों, जिनमें भवन की मालिक, उनके पति और बेटा शामिल हैं, ने निर्माण कार्य के दौरान पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं अपनाए. पुलिस के अनुसार निर्माण और आसपास किए गए कार्यों के कारण ऐसी स्थिति पैदा हुई जिससे पीजी में रहने वाले छात्रों की जान खतरे में पड़ी और कई लोगों की मौत तथा गंभीर चोटें हुईं. पुलिस ने यह भी कहा कि हादसे के बाद आरोपी राहत कार्यों में मदद करने के बजाय मौके से चले गए थे. मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी.

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