प्रतीकात्मक फोटो.
नई दिल्ली:
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के रोज बदलते फैसलों से पैसा जमा करने वाली आम जनता और बैंक में काम करने वाले कर्मचारी दोनों ही परेशान हैं. पिछले 43 दिनों में आरबीआई रोज नए सर्कुलर ला रही है. बैंक कर्मचारी कहते हैं कि वे कैश संभालें, कतार संभालें या फिर आरबीआई के नए-नए सर्कुलर देखें.
दिल्ली के बदरपुर में रहने वाले विकास ने ट्यूशन पढ़ाकर 20 हजार रुपये इकट्ठे किए. पांच हजार रुपये से अधिक के पुराने नोट सिर्फ एक बार जमा कर सकने के सरकार के ऐलान बाद जब मंगलवार को वे बैंक पहुंचे तो सिर्फ 5000 रुपये ही जमा हो पाए. बाकी पैसे लेने से बैंक ने मना कर दिया. बुधवार को सर्कुलर वापसी की खबर सुनकर फिर बैंक पहुंचे. उनका दो दिन का काम का नुकसान हो गया. वे न कल ट्यूशन पढ़ाने जा पाए न आज जा पाए.
बैंक कर्मचारी भी रोज-रोज आ रहे नए सर्कुलर से खासे परेशान हैं. इंडिया बैंक एम्प्लॉई एसोसिएशन के उपाध्यक्ष जेपी शर्मा कहते हैं कि "बैंक कर्मचारियों के लिए भी रोज बदल रहे नियमों के साथ चलना मुश्किल होता है."
दिल्ली के बदरपुर में रहने वाले विकास ने ट्यूशन पढ़ाकर 20 हजार रुपये इकट्ठे किए. पांच हजार रुपये से अधिक के पुराने नोट सिर्फ एक बार जमा कर सकने के सरकार के ऐलान बाद जब मंगलवार को वे बैंक पहुंचे तो सिर्फ 5000 रुपये ही जमा हो पाए. बाकी पैसे लेने से बैंक ने मना कर दिया. बुधवार को सर्कुलर वापसी की खबर सुनकर फिर बैंक पहुंचे. उनका दो दिन का काम का नुकसान हो गया. वे न कल ट्यूशन पढ़ाने जा पाए न आज जा पाए.
बैंक कर्मचारी भी रोज-रोज आ रहे नए सर्कुलर से खासे परेशान हैं. इंडिया बैंक एम्प्लॉई एसोसिएशन के उपाध्यक्ष जेपी शर्मा कहते हैं कि "बैंक कर्मचारियों के लिए भी रोज बदल रहे नियमों के साथ चलना मुश्किल होता है."
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