- छात्रों को निरीक्षण के बाद शौचालयों की स्थिति पर रिपोर्ट और तस्वीरें प्रस्तुत करनी होंगी.
- न्यायालय ने कहा कि साफ-सुथरे सार्वजनिक शौचालयों तक पहुंच जीवन के अधिकार का एक अनिवार्य हिस्सा है
- अदालत ने एमसीडी के शौचालय रखरखाव प्रयासों को असंतोषजनक बताया और उचित कदम उठाने को कहा है
दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के अंतर्गत आने वाले इलाकों में सार्वजनिक शौचालयों का औचक निरीक्षण करने के लिए तीन समाज विज्ञान संस्थानों के छात्रों की एक टीम बनाने का प्रस्ताव देते हुए कहा है कि साफ-सुथरे सार्वजनिक शौचालयों तक पहुंच ‘जीवन के अधिकार' का हिस्सा है.
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन डब्ल्यू. साम्ब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने 'दिल्ली स्कूल ऑफ सोशल वर्क', 'जामिया मिलिया इस्लामिया कॉलेज ऑफ सोशल वर्क' और 'अदिति महाविद्यालय' के प्रधानाचार्यों से कहा है कि वे निरीक्षण के लिए छात्रों (लड़के और लड़कियों दोनों) की टीमें उपलब्ध कराएं.
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रिपोर्ट के साथ तस्वीरें भी होंगी शामिल
छात्र शौचालयों की स्थिति पर एक रिपोर्ट तैयार करेंगे, जिसमें तस्वीरें भी शामिल होंगी. इसके बदले उन्हें मानदेय (पारिश्रमिक) दिया जाएगा. पीठ ने यह आदेश 16 अक्टूबर को दिया. यह आदेश 'जन सेवा वेलफेयर सोसाइटी' द्वारा 2023 में दायर उस जनहित याचिका (पीआईएल) की सुनवाई के दौरान आया, जो सार्वजनिक शौचालयों में सुधार, उनके रखरखाव और साफ-सफाई से जुड़ी थी.
अदालत ने जताई असंतुष्टि
अदालत ने पाया कि एमसीडी द्वारा अपने सार्वजनिक शौचालयों में साफ-सफाई और रखरखाव के प्रयासों के बावजूद, नतीजे संतोषजनक नहीं रहे हैं. अदालत ने सुझाव दिया कि स्वच्छता के प्रभारी अतिरिक्त आयुक्त, निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर उचित कदम उठाएं.
अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणी
अदालत ने कहा, ‘‘संविधान में दिए गए 'राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों' के तहत जिम्मेदारियों के अलावा, साफ-सुथरे सार्वजनिक शौचालयों तक पहुंच का अधिकार, 'जीवन के अधिकार' का ही एक हिस्सा है.''
तीन संस्थानों का किया उल्लेख
अदालत ने कहा, ‘‘हमें जानकारी मिली है कि सामाजिक कार्यों का अध्ययन कराने वाले तीन कॉलेज हैं- दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा संचालित 'दिल्ली स्कूल ऑफ सोशल वर्क' (जिसे अब 'डिपार्टमेंट ऑफ सोशल वर्क' कहा जाता है), 'जामिया मिलिया इस्लामिया कॉलेज ऑफ सोशल वर्क', और दिल्ली विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाला 'अदिति महाविद्यालय'. हम इन संस्थानों के प्रधानाचार्यों/निदेशकों से अनुरोध करते हैं कि वे इन सार्वजनिक शौचालयों का औचक निरीक्षण करने के लिए छात्र-छात्राओं की टीमें उपलब्ध कराएं.'' एमसीडी के वकील ने बताया कि उन्होंने दो जोन में शौचालयों के रखरखाव के लिए चेन्नई के एक संस्थान की पायलट परियोजना के तौर पर मदद ली थी और इसके नतीजे संतोषजनक रहे हैं.
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