प्रतीकात्मक फोटो.
नई दिल्ली:
दिल्ली विकास प्राधिकरण दिल्ली में तीन उपनगरों का निर्माण करने की योजना बना रहा है.
शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू ने आज राज्यसभा को यह जानकारी दी. उन्होंने बताया ‘‘दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने सूचित किया है कि उसने तीन उपनगरों के तौर पर द्वारका, नरेला और रोहिणी में अपनी खाली पड़ी भूमि का विकास करने की योजना बनाई है.’’ उन्होंने बताया कि द्वारका में यह उपनगर 154 हेक्टेयर में, नरेला में 218 हेक्टेयर में और रोहिणी में 259 हेक्टेयर में डीडीए की खाली भूमि पर बसाए जाएंगे.
नायडू ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया ’’इन उपनगरों का निर्माण करते समय ‘हरित क्षेत्र’ पर ध्यान दिया जाएगा और मास्टर प्लान तथा जोनल विकास योजनाओं के अनुसार, उप नगरों में हरित क्षेत्र मुहैया कराया जाएगा.’’ एक अन्य सवाल के जवाब में नायडू ने इस बात को गलत बताया कि डीडीए की आवास योजना-2014 में जनता को ईडब्ल्यूएस फ्लैट का आवंटन एलआईजी फ्लैटों के रूप में किया गया और उनसे एलआईजी फ्लैटों की कीमत वसूल की गई जबकि ये ईडब्ल्यूएस फ्लैट एलआईजी फ्लैटों के मानक पूरे नहीं करते हैं.
उन्होंने कहा ‘‘डीडीजी जी आवास स्कीम 2014 के अनुसार, आवंटी फ्लैट का कब्जा मिलने की तारीख से पांच साल की अवधि तक आवास बेच नहीं सकता. स्कीम में यह व्यवस्था है कि फ्लैट का प्रयोग केवल रिहायशी प्रयोजन के लिए ही किया जाएगा.’’
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू ने आज राज्यसभा को यह जानकारी दी. उन्होंने बताया ‘‘दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने सूचित किया है कि उसने तीन उपनगरों के तौर पर द्वारका, नरेला और रोहिणी में अपनी खाली पड़ी भूमि का विकास करने की योजना बनाई है.’’ उन्होंने बताया कि द्वारका में यह उपनगर 154 हेक्टेयर में, नरेला में 218 हेक्टेयर में और रोहिणी में 259 हेक्टेयर में डीडीए की खाली भूमि पर बसाए जाएंगे.
नायडू ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया ’’इन उपनगरों का निर्माण करते समय ‘हरित क्षेत्र’ पर ध्यान दिया जाएगा और मास्टर प्लान तथा जोनल विकास योजनाओं के अनुसार, उप नगरों में हरित क्षेत्र मुहैया कराया जाएगा.’’ एक अन्य सवाल के जवाब में नायडू ने इस बात को गलत बताया कि डीडीए की आवास योजना-2014 में जनता को ईडब्ल्यूएस फ्लैट का आवंटन एलआईजी फ्लैटों के रूप में किया गया और उनसे एलआईजी फ्लैटों की कीमत वसूल की गई जबकि ये ईडब्ल्यूएस फ्लैट एलआईजी फ्लैटों के मानक पूरे नहीं करते हैं.
उन्होंने कहा ‘‘डीडीजी जी आवास स्कीम 2014 के अनुसार, आवंटी फ्लैट का कब्जा मिलने की तारीख से पांच साल की अवधि तक आवास बेच नहीं सकता. स्कीम में यह व्यवस्था है कि फ्लैट का प्रयोग केवल रिहायशी प्रयोजन के लिए ही किया जाएगा.’’
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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