- दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने लश्कर-ए-तैयबा के बांग्लादेशी आतंकियों का एक खतरनाक मॉड्यूल पकड़ा
- जनपथ मेट्रो स्टेशन पर पाक समर्थक पोस्टर मिलने के बाद जांच शुरू हुई, जो दिल्ली के कई इलाकों में भी लगाए गए थे
- आरोपियों में सात बांग्लादेशी अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए थे और फर्जी पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर सक्रिय थे
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक हाई‑प्रोफाइल काउंटर‑टेरर ऑपरेशन को अंजाम देते हुए लश्कर‑ए‑तैयबा के एक खतरनाक बांग्लादेशी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है. इस कार्रवाई में देश के अलग‑अलग हिस्सों से कुल आठ आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड शब्बीर अहमद लोन को भी पुलिस ने दबोच लिया है. पुलिस का दावा है कि समय रहते की गई इस कार्रवाई से देश में किसी बड़े आतंकी हमले की साजिश को नाकाम कर दिया गया.
जनपथ मेट्रो स्टेशन से शुरू हुई जांच
इस पूरे मामले की शुरुआत 8 फरवरी 2026 को हुई, जब दिल्ली के जनपथ मेट्रो स्टेशन पर कुछ संदिग्ध पोस्टर लगाए जाने की सूचना मिली. इन पोस्टरों में पाकिस्तान समर्थक नारे, कश्मीर से जुड़े भड़काऊ संदेश और मारे गए आतंकी बुरहान वानी की तस्वीरें थीं. पोस्टरों में उर्दू में ऐसे मैसेज भी लिखे थे, जिनका मतलब था “हम पाकिस्तानी हैं, पाकिस्तान हमारा है” और “कश्मीरी एकजुटता दिवस.” मामले की जांच में यह भी सामने आया कि ऐसे पोस्टर दिल्ली के कई अन्य इलाकों में भी लगाए गए थे.
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स्पेशल सेल को सौंपी गई जिम्मेदारी
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को ट्रांसफर कर दी गई. इसके बाद स्पेशल सेल ने टेक्निकल सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज, ह्यूमन इंटेलिजेंस और डिजिटल डेटा के जरिए पूरे नेटवर्क को खंगालना शुरू किया. जांच के दौरान पुलिस को एक अहम सुराग कोलकाता तक मिला.
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कोलकाता और तिरुप्पुर से आतंकियों की गिरफ्तारी
15 फरवरी को स्पेशल सेल ने कोलकाता में छापेमारी कर उमर फारूक और रोबिउल इस्लाम को गिरफ्तार किया. दोनों ही इस आतंकी मॉड्यूल के अहम सदस्य बताए गए. इसके बाद 21 फरवरी को तमिलनाडु के तिरुप्पुर में एक साथ कई जगहों पर छापेमारी कर छह और आतंकियों को पकड़ा गया. इस तरह कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया.
अवैध घुसपैठ और फर्जी पहचान का खुलासा
गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में से सात बांग्लादेशी नागरिक हैं, जो अवैध तरीके से भारत में दाखिल हुए थे. ये सभी फर्जी भारतीय पहचान पत्रों के सहारे देश में रह रहे थे, ताकि अपनी असली पहचान छिपा सकें और लंबे समय तक सक्रिय रह सकें.
पूछताछ में सामने आई बड़ी साजिश
पूछताछ के दौरान मुख्य आरोपी उमर फारूक ने बताया कि वह मार्च 2025 में शब्बीर अहमद लोन के संपर्क में आया था. शब्बीर ने उसे धीरे‑धीरे कट्टरपंथी विचारधारा की ओर मोड़ा और भारत में लश्कर के ऑपरेशन को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी. उमर को देश के महत्वपूर्ण ठिकानों की रेकी करने, उनके वीडियो बनाने और बांग्लादेशी युवाओं को इस नेटवर्क में भर्ती करने का काम दिया गया था.
हथियार जुटाने और हमले की तैयारी
उमर को यह भी निर्देश दिए गए थे कि वह भारत में हथियारों का इंतजाम करे. इसके लिए वह स्थानीय संपर्कों के जरिए प्रयास कर रहा था. पुलिस के मुताबिक, इससे साफ होता है कि यह मॉड्यूल सिर्फ प्रचार गतिविधियों तक सीमित नहीं था, बल्कि आगे चलकर बड़े आतंकी हमले की तैयारी कर रहा था.
दिल्ली में पोस्टर लगाने का पूरा प्लान
जांच में सामने आया कि 6 और 7 फरवरी की रात उमर और उसका एक साथी दिल्ली आए थे. इस दौरान उन्होंने करीब 10 अलग‑अलग जगहों पर पाकिस्तान समर्थक पोस्टर लगाए. इन गतिविधियों के वीडियो बनाकर उन्होंने अपने हैंडलर शब्बीर लोन को भेजे, जिसने इस काम के लिए उनकी सराहना की और आगे भी इसी तरह की गतिविधियां जारी रखने के निर्देश दिए.
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भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामान बरामद
पुलिस ने आरोपियों के ठिकानों से 10 मोबाइल फोन, 25 डेबिट और क्रेडिट कार्ड, 5 पीओएस मशीन, बांग्लादेशी पासपोर्ट और कई आपत्तिजनक पोस्टर बरामद किए हैं. इससे साफ होता है कि यह नेटवर्क आतंकी गतिविधियों के साथ‑साथ आर्थिक लेन‑देन और फर्जी पहचान के जरिए लंबे समय तक भारत में सक्रिय रहने की तैयारी कर चुका था.
मास्टरमाइंड शब्बीर लोन की गिरफ्तारी
इस केस में सबसे बड़ा मोड़ 29 मार्च 2026 को आया, जब स्पेशल सेल ने सेंट्रल एजेंसियों के साथ मिलकर मास्टरमाइंड शब्बीर अहमद लोन को दिल्ली के गाजीपुर नाले के पास से गिरफ्तार कर लिया. बताया गया कि वह नेपाल बॉर्डर के रास्ते अवैध रूप से भारत में दाखिल हुआ था. इससे पहले वह बांग्लादेश में छिपकर बैठा था और वहीं से पूरे नेटवर्क को हैंडल कर रहा था.
पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स से सीधा संपर्क
खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, शब्बीर लोन पाकिस्तान में बैठे लश्कर के बड़े हैंडलर्स अबू हुजैफा, सुमामा बाबर और अब्दुल रहमान के सीधे संपर्क में था. वह उनके निर्देशों पर भारत में आतंकी नेटवर्क को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रहा था. इसके अलावा उसका संपर्क तहरीक‑उल‑मुजाहिदीन के कमांडर अबू तल्हा और यूएपीए के तहत घोषित आतंकी आसिफ डार से भी था.
पुराना आतंकी इतिहास भी आया सामने
शब्बीर लोन को इससे पहले 2007 में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था. उस समय उसके पास से AK‑47 और ग्रेनेड जैसे घातक हथियार बरामद हुए थे और उसके संबंध हाफिज सईद और जकी‑उर‑रहमान लखवी जैसे बड़े आतंकियों से सामने आए थे. वह 2018 तक तिहाड़ जेल में बंद रहा और रिहा होने के बाद फरार होकर बांग्लादेश चला गया था.
स्लीपर सेल खड़ा करने की थी तैयारी
जांच एजेंसियों का मानना है कि शब्बीर लोन का मकसद बांग्लादेशी नागरिकों को भारत में घुसाकर उन्हें आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल करना और देशभर में स्लीपर सेल तैयार करना था, ताकि सही समय आने पर बड़े हमलों को अंजाम दिया जा सके.
जांच जारी, और खुलासों की उम्मीद
फिलहाल सभी आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है. पुलिस इस नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं और देश के अलग‑अलग हिस्सों में फैले नेटवर्क के अन्य सदस्यों को भी जल्द गिरफ्तार किया जा सकता है.
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