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वैभव का गुस्सा फीका पड़ जाएगा, जब क्रिकेट के मैदान पर पाकिस्तान के जावेद मियांदाद की देखेंगे ये हरकतें

हाल ही में वैभव सूर्यवंशी के गुस्से की खूब चर्चा हुई, लेकिन क्रिकेट में कहीं बड़े विवाद हुए हैं और उनसे जुड़ी कई दिलचस्प कहानियों की अक्सर चर्चा होती है. पर विवादों से चर्चा में आने वाले जिस एक क्रिकेटर का नाम जेहन में सबसे पहले आता है, वो हैं पाकिस्तान के जावेद मियांदाद.

वैभव का गुस्सा फीका पड़ जाएगा, जब क्रिकेट के मैदान पर पाकिस्तान के जावेद मियांदाद की देखेंगे ये हरकतें
जावेद मियांदाद
AFP

भारत ‘ए' और श्रीलंका ‘ए' के हालिया मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी गलत वजहों से चर्चा में आ गए. मैच के बाद दिखे उनके गुस्से और आक्रामक रवैये ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी. कुछ ने इसे युवा खिलाड़ी का जोश बताया, तो कुछ ने कहा कि क्रिकेट में प्रतिभा के साथ संयम भी उतना ही जरूरी होता है. क्रिकेट के खेल में मैदान पर और मैदान के बाहर पहले कई विवाद हो चुके हैं. हाल ही में बेन स्टोक्स और गस एटकिंसन इंग्लिश टीम के कर्फ्यू प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुए नाइटक्लब में रग्बी खिलाड़ियों से भिड़ गए थे, तो उन्हें न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच से बाहर कर दिया गया. लेकिन क्रिकेट से जुड़े विवादों की बात हो तो पाकिस्तान के पूर्व कप्तान जावेद मियांदाद बरबस ही याद आ जाते हैं.

डेनिस लिली से भिड़ंत हो, या किरण मोरे के सामने 'मंकी जंप', गेंदबाजों के साथ मेंटल गेम खेलने की बात हो या फिर क्रिकेट के मैदान पर धाकड़ बल्लेबाजी से कई रिकॉर्ड अपने नाम करने की कूबत, क्रिकेट के हुनर के साथ-साथ जब भी विवाद जुड़ते हैं, मियांदाद की चर्चा जरूर होती है.

Javed Miandad

Photo Credit: AFP

बेजोड़ मियांदाद

जावेद मियांदाद का नाम सुनते ही ज्यादातर भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के दिमाग में 1986 का शारजाह वाला वह छक्का घूम जाता है जिसने आखिरी गेंद पर पाकिस्तान को जीत दिलाई थी. लेकिन मियांदाद की कहानी सिर्फ उस छक्के तक सीमित नहीं है. उनकी पूरी क्रिकेट यात्रा ऐसे किस्सों से भरी पड़ी है जिनमें रिकॉर्ड भी हैं, विवाद भी हैं, माइंड गेम भी है और क्रिकेट के मैदान पर दिखा बेजोड़ आत्मविश्वास भी.

कराची में 12 जून 1957 को जन्मे मियांदाद पाकिस्तान क्रिकेट के सबसे बड़े बल्लेबाजों में गिने जाते हैं. उन्होंने 1976 से 1993 के बीच पाकिस्तान के लिए 124 टेस्ट मैच खेले और 8832 रन बनाए. उनके नाम 23 शतक और 6 दोहरे शतक दर्ज हैं. अपने संन्यास तक पाकिस्तान की ओर से सबसे ज्यादा टेस्ट रन और सबसे ज्यादा टेस्ट शतक का रिकॉर्ड भी उन्हीं के नाम था. उन्होंने रिकॉर्ड छह वर्ल्ड कप खेले और पाकिस्तान क्रिकेट को नई पहचान दिलाने वाले खिलाड़ियों में शामिल रहे. लेकिन जितना बड़ा उनका क्रिकेट करियर था, उतनी ही बड़ी उनकी विवादों वाली छवि भी थी.

जब दुनिया के सबसे खतरनाक तेज गेंदबाज से भिड़ गए मियांदाद

क्रिकेट इतिहास के सबसे चर्चित विवादों में जावेद मियांदाद और ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज तेज गेंदबाज डेनिस लिली की भिड़ंत हमेशा याद की जाती है. साल 1981 में पाकिस्तान की टीम ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गई थी. यह मियांदाद का कप्तान के तौर पर पहला विदेशी दौरा था. टीम के भीतर मतभेद भी थे और सामने ऑस्ट्रेलिया की मजबूत टीम भी.

मियांदाद अपनी आत्मकथा  में लिखते हैं कि पर्थ टेस्ट से पहले ही उनके और डेनिस लिली के बीच तनाव पैदा हो चुका था. ब्रिसबेन में खेले गए एक चार दिवसीय मैच में मियांदाद शतक लगा चुके थे और लिली उन्हें आउट नहीं कर पाए थे. इससे ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज की झुंझलाहट साफ दिखाई दे रही थी.

पर्थ टेस्ट के दौरान दोनों का टकराव खुलकर सामने आ गया.

मियांदाद एक रन लेने के लिए दौड़ रहे थे कि डेनिस लिली से टकरा गए. मियांदाद का कहना था कि लिली उनके रास्ते में आ गए थे. अगली गेंद से पहले दोनों खिलाड़ियों के बीच बहस शुरू हो गई. मियांदाद के अनुसार लिली ने उनके पैड पर पैर मारा और अपशब्द कहे. इसके जवाब में पाकिस्तान के कप्तान पलटे और उन्होंने बल्ला उठाकर लिली की तरफ लहराया. मैदान पर मौजूद खिलाड़ी और हजारों दर्शक हैरान रह गए.

यह तस्वीर अगले दिन दुनिया भर के अखबारों की सुर्खियां बनी. क्रिकेट के मैदान पर किसी बल्लेबाज का गेंदबाज को बल्ला दिखाकर धमकाना उस दौर में बेहद असामान्य माना जाता था. यही वजह है कि चार दशक से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी यह घटना क्रिकेट इतिहास के सबसे चर्चित विवादों में शामिल है.

पिता की सीख ने बनाया महान बल्लेबाज

मियांदाद ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि उनके पिता हमेशा उनसे बड़ी पारियों की उम्मीद करते थे. अगर वो 30 या 40 रन बनाकर आउट हो जाते, तो पिता नाराज हो जाते. यहां तक कि शतक लगाने के बाद भी उनसे पूछा जाता कि दोहरा शतक क्यों नहीं बनाया. मियांदाद मानते थे कि इसी सोच ने उन्हें लंबी पारी खेलने की आदत सिखाई.

दुर्भाग्य से टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू करने के कुछ ही दिनों बाद उन्होंने अपने पिता को खो दिया था. यह दर्द उन्हें जीवनभर महसूस हुआ. लेकिन उन्होंने उसी दर्द को अपनी ताकत बनाया और मैदान पर लगातार शानदार प्रदर्शन करते रहे.

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Miandad 1992 world cup AFP

1992 वर्ल्ड कप जीतने के बाद क्रिकेटर अकिब जावेद ने जावेद मिंयादाद को खुशी में उठा लिया
Photo Credit: AFP

1992 वर्ल्ड कप और पाकिस्तान की ऐतिहासिक जीत

मियांदाद के करियर का एक और बड़ा अध्याय 1992 वर्ल्ड कप था. इमरान खान की कप्तानी में पाकिस्तान पहली बार विश्व चैंपियन बना था. इस सफलता में मियांदाद की भूमिका बेहद अहम रही.

पीठ में दर्द से जूझने के बावजूद उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में छह अर्धशतक लगाए. मियांदाद ने 1987 में वनडे क्रिकेट में एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया जो करीब 40 साल बाद आज भी उनके नाम पर ही बना हुआ है. तब मियांदाद ने करीब साढ़े छह महीने के दौरान (24 मार्च 1987 से लेकर 08 अक्टूबर 1987 के बीच) लगातार नौ वनडे पारियों में अर्धशतक जमाया था.

उनकी बल्लेबाजी का स्तर इतना ऊंचा था कि टेस्ट क्रिकेट में उनका रन औसत कभी 51.75 से नीचे नहीं गया. क्रिकेट इतिहास में ऐसा करने वाले खिलाड़ियों की संख्या बेहद कम है. लेकिन अगर कोई सोचता है कि मियांदाद सिर्फ बल्लेबाजी से विपक्षी टीम को परेशान करते थे, तो वह उनके व्यक्तित्व का आधा हिस्सा ही जानता है.

जब किरण मोरे के सामने लगा दी 'मंकी जंप'

1992 वर्ल्ड कप में भारत और पाकिस्तान के बीच सिडनी में मुकाबला खेला जा रहा था. भारतीय विकेटकीपर किरण मोरे लगातार अपने गेंदबाजों का उत्साह बढ़ा रहे थे. उनकी आवाज और लगातार अपीलें मियांदाद को परेशान कर रही थीं.

एक समय मियांदाद ने सचिन तेंदुलकर की गेंद को खेलकर रन लेने की कोशिश की लेकिन उन्हें वापस क्रीज में लौटना पड़ा. इसके बाद उन्होंने ऐसा कुछ किया जिसे क्रिकेट इतिहास कभी नहीं भूल पाया.

मियांदाद अचानक विकेटकीपर किरण मोरे के पास पहुंचे और लगातार तीन बार उछलकर जंप लगाने लगे. यह दृश्य कैमरे में कैद हो गया. किसी ने इसे मेंढक की छलांग कहा, किसी ने मंकी जंप. लेकिन यह घटना हमेशा के लिए क्रिकेट इतिहास का हिस्सा बन गई. आज भी जब क्रिकेट के सबसे मजेदार और विवादित पलों की चर्चा होती है तो मियांदाद का यह जंप जरूर याद किया जाता है.

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Javed Miandad

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'तेला लुम नंबर क्या है' और माइंड गेम के मास्टर

जावेद मियांदाद की सबसे बड़ी ताकत सिर्फ बल्लेबाजी नहीं थी. वह माइंड गेम के भी उस्ताद थे. भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर, मियांदाद से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सुनाते हैं.

क्रिकेट के मैदान पर जावेद मियांदाद की बल्लेबाजी के साथ-साथ उनके मजाक करने के अंदाज की सुनील गावस्कर भी तारीफ करते हैं. यह बेंगलुरु में खेले जा रहे एक टेस्ट मैच के दौरान की बात है. तब टीम इंडिया में एक स्पिनर वापसी कर रहा था और जावेद को पता था कि वो उस विकेट पर खतरनाक साबित हो सकते थे क्योंकि वहां गेंद बहुत तेजी से घूम रही थी. 

सुनील गावस्कर

गावस्कर कहते हैं, "जावेद मियांदाद मनोवैज्ञानिक रूप से बहुत मजबूत थे और गेंदबाज को हमेशा नर्वस करने की फिराक में रहते थे. जब वो गेंदबाज के गेंद को आगे बढ़ कर रोकते और गेंद बैट से लगने के बाद गेंदबाज के पास वापस चली जाती तो मिंयादाद अपनी क्रीज से निकलकर आधी पिच पर आते और उस गेंदबाज से पूछते थे कि तेरा लुम नंबर क्या है, लुम नंबर..." (मियांदाद तोतली आवाज में बोलते हैं). "विकेट के पीछे सैयद किरमानी थे. वो सुन रहे थे कि क्या हो रहा है. मैं स्लिप में खड़ा था. वो अपने ग्लव्स से मुंह ढककर मुझसे पूछे कि 'ये क्या हो रहा है'?" मैंने कहा, "किरी जावेद ने शुरू किया है, जावेद ही खत्म करेगा. हम थोड़ा इंतजार करेंगे."

पहले तो गेंदबाज समझ नहीं पाया कि वह क्या कहना चाहते हैं.

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Javed Miandad

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लेकिन जब यह सिलसिला लगातार चलता रहा तो गेंदबाज परेशान हो गया. आखिर उसने पूछा कि रूम नंबर क्यों चाहिए.

मियांदाद ने जवाब दिया, "क्योंकि तेले लुम में मेले को सिक्स मालने का है."

यह सुनकर मैदान पर मौजूद कई खिलाड़ी हंस पड़े. लेकिन गेंदबाज का ध्यान भटक चुका था. यही मियांदाद चाहते भी थे.

बाद में जब वह गेंदबाज लगातार ऑफ स्टंप के बाहर गेंद डालने लगा तो मियांदाद ने गेंद को पैड करना शुरू किया और साथ में 'भौं-भौं' की आवाज निकालने लगे.

अंपायर ने पूछा कि यह क्या कर रहे हैं.

मियांदाद ने जवाब दिया, "भौं-भौं न करूं तो क्या करूं. कुत्ते की तरह मेरी टांग पकड़े हुए है."

यह सुनकर मैदान पर मौजूद खिलाड़ी भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए.

जावेद मियांदाद 1992  वनडे वर्ल्ड कप ट्रॉफी के साथ
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भारत के खिलाफ बन गए थे पाकिस्तान की सबसे बड़ी ताकत

भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए जावेद मियांदाद हमेशा एक ऐसे बल्लेबाज रहे जिन्होंने मुश्किल मौकों पर पाकिस्तान को संभाला. अपने करियर के करीब एक चौथाई रन मियांदाद ने भारत के खिलाफ बनाए. आज भी भारत के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में सबसे अधिक 2228 रन बनाने वाले पाकिस्तानी क्रिकेटर का रिकॉर्ड उनके नाम ही दर्ज है. यह रन उन्होंने पांच शतक, 14 अर्धशतकों की मदद से 67.52 की शानदार औसत से बनाए थे. 

मियांदाद का टेस्ट करियर भी कमाल का रहा. न्यूजीलैंड के खिलाफ अपने केवल तीसरे टेस्ट मैच में उन्होंने 19 साल 140 दिन की उम्र में दोहरा शतक जड़ दिया था. सबसे कम उम्र में टेस्ट दोहरा शतक लगाने का यह रिकॉर्ड आज भी कायम है.

विवादित भी, महान भी

क्रिकेट इतिहास में बहुत कम खिलाड़ी ऐसे हुए हैं जिनके बारे में राय इतनी बंटी हुई हो. कुछ लोग जावेद मियांदाद को महान बल्लेबाज मानते हैं. कुछ उन्हें क्रिकेट का सबसे बड़ा प्रतिस्पर्धी खिलाड़ी बताते हैं. कुछ लोग उन्हें विवादों का दूसरा नाम कहते हैं.

लेकिन एक बात पर शायद ही कोई बहस हो. जावेद मियांदाद क्रिकेट इतिहास के प्रभावशाली किरदारों में से एक थे. वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज विवियन रिचर्ड्स ने एक बार लिखा था कि उन्होंने दुनिया भर के क्रिकेटर देखे हैं, लेकिन अपने देश के लिए सब कुछ झोंक देने का जज्बा इमरान खान और जावेद मियांदाद जैसा बहुत कम खिलाड़ियों में देखा.

यही कारण है कि जावेद मियांदाद पाकिस्तान के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्हें आईसीसी हॉल ऑफ फेम में जगह मिली.

भारत ‘ए' और श्रीलंका ‘ए' मैच में वैभव सूर्यवंशी के गुस्से ने भले कुछ समय के लिए चर्चा बटोर ली हो. लेकिन क्रिकेट इतिहास के पन्ने पलटिए तो पता चलता है कि मैदान पर आक्रामकता, विवाद और माइंड गेम की असली पाठशाला का नाम जावेद मियांदाद था. जिसने डेनिस लिली को बल्ला दिखाया, किरण मोरे के सामने मंकी जंप लगाई, गेंदबाज से 'तेला लुम नंबर क्या है' पूछकर उनका ध्यान भटकाया और फिर भी अपने बल्ले से ऐसे रिकॉर्ड बनाए जिनकी बदौलत दुनिया आज भी उनके क्रिकेट को सलाम करती है.

लेखक के बारे में
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अभिजीत श्रीवास्तव
Assistant Editor, Digital Content
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