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This Article is From Dec 31, 2014

विश्व 2007 से बाहर होना मेरे करियर के सबसे खराब दौर में शामिल : तेंदुलकर

विश्व 2007 से बाहर होना मेरे करियर के सबसे खराब दौर में शामिल : तेंदुलकर
सचिन तेंदुलकर की फाइल फोटो
दुबई:

महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर 2007 विश्व कप से भारतीय टीम के जल्द बाहर होने को अपने शानदार क्रिकेट करियर के सबसे बुरे लम्हों में से एक मानते हैं और उन्होंने कहा कि वेस्टइंडीज की निराशा ने चार साल बाद आलोचकों को गलत साबित करने के लिए प्रेरणा का काम किया।

ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में 2015 में होने वाले विश्व कप से पूर्व तेंदुलकर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के लिए कालम लिखते हुए कहा, ‘‘मेरे लिए भुलाने वाला आईसीसी क्रिकेट विश्व कप वेस्टइंडीज में हुए 2007 टूर्नामेंट है। टूर्नामेंट से जल्द बाहर होना मेरे क्रिकेट करियर के बदतर लम्हों में शामिल है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारी टीम शानदार थी, लेकिन यह ऐसी साबित नहीं हुई। विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा बनने का मेरा इंतजार जारी रहा। इस निराशा ने हालांकि आलोचकों को गलत साबित करने में प्रेरणा का काम भी किया।’’
विश्व कप 2015 के लिए आईसीसी एंबेसडर तेंदुलकर ने कहा कि घरेलू सरजमीं 2011 विश्व कप जीता उनके करियर का शीर्ष लम्हा रहा।

रिकॉर्ड छह विश्व कप में हिस्सा लेने वाले तेंदुलकर ने कहा, ‘‘ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान जैसी शीर्ष टीमों को हराया और अंतत: फाइनल में श्रीलंका को शिकस्त देकर भारत घरेलू सरजमीं पर विश्व कप जीतने वाला पहला देश बना। यह और भी विशेष था क्योंकि अंतत: मैं 22 साल के इंतजार के बाद विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा बना। 2011 की जीत मेरे करियर का सबसे बड़ा पल रहा जिसका पूरे देश ने एकजुट होकर जश्न मनाया।’’

विश्व कप के बाल ब्वाय से विश्व कप विजेता का सफर तय करने वाले तेंदुलकर ने पिछले साल ढेरों रन और रिकॉर्ड के साथ क्रिकेट को अलविादा कहा। विश्व कप के 45 मैचों में 2278 रन बनाने वाले तेंदुलकर ने कहा, ‘‘25 जून 1983 को भारतीय क्रिकेट टीम ने विश्व कप 1983 जीता और ट्राफी हाथ में लिए टीम की तस्वीरें पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत बनी। मैं तब सिर्फ 10 साल का था और इस जीत की मेरी अच्छी यादे हैं। मेरे माता पिता ने मुझे देर रात तक जश्न मनाने की इजाजत दी थी। विश्व कप जीत के बाद मुझे भी हार्ड गेंद के साथ खेलने की प्रेरणा मिली।’’

उन्होंने कहा, ‘‘विश्व कप को करीब से देखने का पहला मौका मुझे भारत और पाकिस्तान की सह मेजबानी में हुए 1987 आईसीसी क्रिकेट विश्व कप के दौरान मिला। मैं भाग्यशाली रहा कि मुझे मुंबई में होने वाले मैचों के लिए बाल ब्वाय चुना गया। मैंने वहां भारत के महान खिलाड़ियों को खेलते देखा। मैं स्वयं से कहता रहा कि मुझे मैदान पर खेल का हिस्सा बनने की जरूरत है।’’

विश्व कप की एक और घटना जो तेंदुलकर को सालती है वह 1996 के सेमीफाइनल में श्रीलंका के खिलाफ उनका आउट होना है क्योंकि उनके आउट होने के बाद पूरी पारी ढह गई थी और टीम मैच हार गई।

तेंदुलकर ने कहा कि इंग्लैंड में हुए 1999 का टूर्नामेंट उनके लिए निजी तौर पर काफी मुश्किल था क्योंकि उन्हें टूर्नामेंट के बीच में अपने पिता के निधन की दुखद घटना का सामना करना पड़ा।

उन्होंने कहा, ‘‘यह काफी मुश्किल था क्योंकि मैं अपने शोक के बावजूद खेल पर ध्यान लगाने का प्रयास कर रहा था।’’ तेंदुलकर ने कहा कि वह दक्षिण अफ्रीका में हुए 2003 विश्व कप में जीत के काफी करीब पहुंचे लेकिन फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के हाथों बड़ी हार का सामना करना पड़ा। इस स्टार बल्लेबाज के लिए निजी तौर पर हालांकि यह टूर्नामेंट काफी सफल रहा और उन्होंने 11 मैचों 673 रन बनाए।

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