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Team India's Budget: कुछ ऐसा है टीम इंडिया का 2026-27 का सालाना बजट, जाने कहां-कहां कितना खर्च करता है BCCI

BCCI's Annual Budget: अब जब आप देश का बजट भारत सरकार ने जारी किया है, तो टीम इंडिया के लिए बीसीसीआई का भी सालाना बजट जान लीजिए

Team India's Budget: कुछ ऐसा है टीम इंडिया का 2026-27 का सालाना बजट, जाने कहां-कहां कितना खर्च करता है BCCI
BCC Annual Budget: बीसीसीआई का लोगो
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Team India's annual budget: रविवार को वित्तमंत्री निर्मला सीतरमन ने अगले वित्तीय वर्ष (2026-27) के लिए ससंद में बजट पेश किया. खास से लेकर आम तक बजट में अपने-अपने हित ढूंढ रहा है. बहरहाल, जब फिजां में बजट है, तो हम आपके लिए खास जानकारी लेकर आए हैं. और यह है टीम इंडिया का बजट. मतलब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) अपने सालाना  बजट में कहां-कहां खर्च करता है. इस साल 2026-27 सीजन की शुरुआत में बोर्ड के खजाने में 6,700 करोड़ का सरप्लस (बचत) की बात कही है. यह बचत बोर्ड को दुनिया का सबसे अमीर बोर्ड बनाती है. 


बोर्ड के 2026-27 बजट की खास बातें

बोर्ड ने अनुमानित सकल आमदनी बजट में 10,500 से 11,000 करोड़ रुपये दिखाई, जबकि अनुमानित खर्चे इस वित्तीय वर्ष में 3800-4200 करोड़ रुपये दिखाए हैं, जबकि उसकी अनुमानित बचत 6500 से 7000 करोड़ रुपये के बीच है. 

यहां से होगी बोर्ड को इतनी कमाई

कुछ महीने पहले दी गई जानकारी के अनुसार बोर्ड को 5800-6200 करोड़ (56 प्रतिशत) राशि आईपीएल मीडिया राइड्स और प्रायोजकों से आएगी, तो वहीं आईसीसी से शेयर के तौर पर 1800-2000 करोड़ (18 प्रतिशत) रुपये मिलेंगे. वहीं, द्विपक्षीय सीरीज से 900-100 करोड़ (10 प्रतिशत, रिजर्व रकम से ब्याज (1000-1100 करोड़), तो वीमेंस प्रीमियर लीग से 400-450 करोड़ (4 प्रतिशत) की रकम बोर्ड को मिलेगी.

पिछले साल ही बोर्ड की इतनी कमाई

पिछले सीजन (2025-26) में बीसीसीआई को कुल 8,963 करोड़ रुपये की कमाई हुई. यहां रोचक बात यह है कि सिर्फ और सिर्फ ब्याज भर से बोर्ड के खाते में करीब 1500 करोड़  रुपये आए. 

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BCCI के सालाना प्रस्तावित खर्च

मद                                                       खर्च (करोड़ में)

आईपीएल, डब्ल्यूपीएल संचालन                 1200-1300 

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट (महिला और पुरुष)         700-800 

घरेलू  क्रिकेट (रणजी, अंडर-19)                700-750


खिलाड़ियों का अनुबंध और मैच फीस            655-700

ढांचागत और स्टेडियम पर खर्च                   350-400

प्रशासन, स्टॉफ, यात्रा, अन्य                         200-250

जमीनी और राज्यों को सहयोग                    150-200
 

कुल खर्च   (करीब)                                    4000

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ऐसे करता बोर्ड खर्चों का बंटवारा:

1. सालाना अनुबंध

सबसे प्रमुख खर्च सालाना अनुबंध का होता है. अब जबकि बोर्ड ने 2026-27 के लिए A+ कैटेगिरी खत्म करने का फैसला किया है. इसके तहत 7 करोड़ रुपये चुनिंदा खिलाड़ियों को मिलते थे. वहीं, ग्रेड A (सालाना 5 करोड़), ग्रेड बी (3 करोड़) और ग्रेड सी को सालाना 1 करोड़ रुपये मैच फीस से अलग दिए जाते हैं.  इसके तहत 650-700 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं. रकम में मैच फीस भी शामिल है:
 

2. मैच फीस

प्रति टेस्ट मैच के लिए 15,00000 लाख, प्रति वडने 6,00000 लाख और प्रति टी20 मैच के लिए 3,00000 लाख रुपये का भुगतान खिलाड़ियों को किया जाता है. 

3. टेस्ट क्रिकेट इंसेंटिव

बोर्ड ने पिछले साल 2025-26 में टेस्ट मैच इंसेंटिव के लिए टीम को 45 करोड़ रुपये का भुगतान किया था. वो खिलाड़ी जो साल में शेड्यूल के अनुसार सभी मैच खेलते हैं, उन्हें अलग से इंसेंटिव मिलता है. 

4. अंतरराष्ट्रीय टूर और मेजबानी

एशिया कप के आयोजन से भारत के सरप्लस (बचत) में करीब 109.04 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ था. वहीं, पिछले सीजन में मैचों की संख्या ज्यादा होने से मीडिया राइट्स में 138.64 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई. 

5. पुरुष घरेलू क्रिकेट के खर्चे

बीसीसीआई ने पिछले साल रणजी ट्रॉफी सहित जूनियर स्तर के टूर्नामेंटों के आोयजन पर 344 करोड़ रुपये खर्च किए. खास तौर पर रणजी ट्रॉफी के आयोजन पर 111 करोड़ रुपये खर्च हुए. इसके अलावा भारत ए टीम और जूनियर क्रिकेट विकास कार्यक्रम पर मिलाकर करीब 42 करोड़ रुपये खर्च हुए. इससे पिछले वित्तीय वर्ष में यह खर्च 12.9 करोड़ रुपये था. 

6. महिला घरेलू क्रिकेट का खर्च

वहीं, महिला घरेलू क्रिकेट टूर्नामेंट के आयोजन पर BCCI ने 96 करोड़ रुपये खर्च किए. साल 2025-26 में वीमेंस प्रीमियर लीग पर खर्च हुए करीब

7. सकल राजस्व का बंटवारा

पिछले साल यह रकम 412 करोड़ थी, लेकिन इस साल यह घटकर 171 करोड़ आ गई. बता दें कि सकल राजस्व का 26 प्रतिशत  क्रिकेटरों पर खर्च किया जाता है. इसके तहत 13 प्रतिशत अंतरराष्टरीय, तो 13 प्रतिशत घरेलू क्रिकेटरों पर खर्च किया जाता है. 

8. आकस्मिक खर्च रिजर्व

इसके तहत 1000 करोड़ रुपये का फंड आकस्मिक खर्च के लिए रिजर्व रखा गया है. वहीं, बजट में आयकर के लिए 3320  करोड़ रुपये रखे गए हैं, तो 160 करोड़ रुपये कानूनी/मुकदमेबाजी खर्च के लिए रखे गए हैं. 

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