
रोहित शर्मा और विराट कोहली (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
ऑस्ट्रेलिया में टी-20 सीरीज शुरू होने से पहले टीम इंडिया आईसीसी सीरीज में आठवें नंबर पर थी, लेकिन सीरीज में मेजबान का सफाया करते ही भारतीय टीम दुनिया की नंबर-1 टी-20 टीम बन गई है। इस वक्त टीम इंडिया टेस्ट और टी-20 में नंबर-1 और वनडे में वर्ल्ड नंबर-2 टीम है।
अगले महीने भारत में शुरू हो रहे टी-20 वर्ल्ड कप (8 मार्च से 3 अप्रैल तक) से पहले भारतीय फैन्स इससे बेहतर और क्या मांग सकते हैं। टीम इंडिया को इस मुकाम तक पहुंचाने में टीम के सुपरस्टार्स ने कमाल के रोल अदा किए। विराट कोहली का नाम इसमें सबसे पहले आता है। सुनील गावस्कर कहते हैं कि विराट कोहली इस वक्त जिस फॉर्म में चल रहे हैं, वो अंधेरे में भी बल्लेबाजी कर सकते हैं।

विराट कोहली ने 3 टी-20 मैचों में 3 अर्द्धशतकीय पारियां खेलीं। दरअसल वनडे भी मिला दें, तो उन्होंने आठ में से सात पारियों में शतक या अर्द्धशतक जरूर लगाए। विराट ने सीरीज के तीन टी-20 मैचों में 199 रन जोड़े। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 160 से ऊपर (160.48) रहा। विराट पहले दो मैचों में मैन ऑफ द मैच भी बने। मैन ऑफ द सीरीज के खिताब के लिए विराट से बेहतर कौन दावेदार हो सकता था।
कोहली की विराट पारियों के बावजूद रोहित शर्मा ने भी जलवा बिखेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। रोहित ने 3 में से 2 मैचों में अपनी अर्द्धशतकीय पारियों के सहारे 143 रन बनाए। उन्होंने 136.19 के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की।

जरूरत पड़ने पर भारत के मिडिल ऑर्डर और फिनिशर्स ने टीम पर भरोसा और बढ़ा दिया। सुरेश रैना 3 में से 2 बार नॉट आउट रहे। खासकर सिडनी में उनकी पारी (25 गेंदों पर नाबाद 49 रन) लंबे समय तक याद की जाएगी। कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और युवराज सिंह (सिडनी में 12 गेंदों पर नाबाद 15 रन) का जलवा भी बरकरार रहा, जो अगले वर्ल्ड कप के लिए शानदार संकेत है। टॉप ऑर्डर में शिखर एडिलेड में सस्ते में जरूर निपटे, लेकिन मेलबर्न और सिडनी में उन्होंने उस पारी की भरपाई कर दी।
गेंदबाजों का प्रदर्शन
सुपरस्टार बल्लेबाजों के बीच बैट्समैन के लिए बनी पिच पर गेंदबाजों के प्रदर्शन को नहीं नकारा जा सकता। खासकर गुजरात के मध्यम तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह का यॉर्कर टीम के लिए बड़ा बोनस साबित हुआ। कप्तान धोनी कहते हैं कि अगर बुमराह लगातार ऐसा प्रदर्शन करते रहे, तो टीम इंडिया की बड़ी मुश्किलों का हल निकलता देखा जा सकता है।

आर अश्विन (3 मैच में 4 विकेट, इकॉनमी 7.58), जसप्रीत बुमराह (3 मैच में 6 विकेट, इकॉनमी 8.95), रवींद्र जडेजा (3 मैच में 5 विकेट, इकॉनमी 7.83), आशीष नेहरा (3 मैच में 2 विकेट, इकॉनमी 8.00), हार्दिक पांड्या (3 मैच में 3 विकेट, इकॉनमी 11.14) और ग्लेन मैक्सवेल को अपना शिकार बनाने वाले युवराज सिंह (3 मैच में 2 विकेट, इकॉनमी 7.20) टीम इंडिया की गेंदबाजी के वे सितारे हैं, जिन्हें शायद ज्यादा तवज्जो भले न मिल पाए, लेकिन ये एक संतुलित टीम इंडिया के सितारे हैं, जिनसे फैन्स को अगले महामुकाबले में जबरदस्त उम्मीदें रहेंगी।
अगले महीने भारत में शुरू हो रहे टी-20 वर्ल्ड कप (8 मार्च से 3 अप्रैल तक) से पहले भारतीय फैन्स इससे बेहतर और क्या मांग सकते हैं। टीम इंडिया को इस मुकाम तक पहुंचाने में टीम के सुपरस्टार्स ने कमाल के रोल अदा किए। विराट कोहली का नाम इसमें सबसे पहले आता है। सुनील गावस्कर कहते हैं कि विराट कोहली इस वक्त जिस फॉर्म में चल रहे हैं, वो अंधेरे में भी बल्लेबाजी कर सकते हैं।

विराट कोहली ने 3 टी-20 मैचों में 3 अर्द्धशतकीय पारियां खेलीं। दरअसल वनडे भी मिला दें, तो उन्होंने आठ में से सात पारियों में शतक या अर्द्धशतक जरूर लगाए। विराट ने सीरीज के तीन टी-20 मैचों में 199 रन जोड़े। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 160 से ऊपर (160.48) रहा। विराट पहले दो मैचों में मैन ऑफ द मैच भी बने। मैन ऑफ द सीरीज के खिताब के लिए विराट से बेहतर कौन दावेदार हो सकता था।
कोहली की विराट पारियों के बावजूद रोहित शर्मा ने भी जलवा बिखेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। रोहित ने 3 में से 2 मैचों में अपनी अर्द्धशतकीय पारियों के सहारे 143 रन बनाए। उन्होंने 136.19 के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की।

जरूरत पड़ने पर भारत के मिडिल ऑर्डर और फिनिशर्स ने टीम पर भरोसा और बढ़ा दिया। सुरेश रैना 3 में से 2 बार नॉट आउट रहे। खासकर सिडनी में उनकी पारी (25 गेंदों पर नाबाद 49 रन) लंबे समय तक याद की जाएगी। कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और युवराज सिंह (सिडनी में 12 गेंदों पर नाबाद 15 रन) का जलवा भी बरकरार रहा, जो अगले वर्ल्ड कप के लिए शानदार संकेत है। टॉप ऑर्डर में शिखर एडिलेड में सस्ते में जरूर निपटे, लेकिन मेलबर्न और सिडनी में उन्होंने उस पारी की भरपाई कर दी।
गेंदबाजों का प्रदर्शन
सुपरस्टार बल्लेबाजों के बीच बैट्समैन के लिए बनी पिच पर गेंदबाजों के प्रदर्शन को नहीं नकारा जा सकता। खासकर गुजरात के मध्यम तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह का यॉर्कर टीम के लिए बड़ा बोनस साबित हुआ। कप्तान धोनी कहते हैं कि अगर बुमराह लगातार ऐसा प्रदर्शन करते रहे, तो टीम इंडिया की बड़ी मुश्किलों का हल निकलता देखा जा सकता है।

आर अश्विन (3 मैच में 4 विकेट, इकॉनमी 7.58), जसप्रीत बुमराह (3 मैच में 6 विकेट, इकॉनमी 8.95), रवींद्र जडेजा (3 मैच में 5 विकेट, इकॉनमी 7.83), आशीष नेहरा (3 मैच में 2 विकेट, इकॉनमी 8.00), हार्दिक पांड्या (3 मैच में 3 विकेट, इकॉनमी 11.14) और ग्लेन मैक्सवेल को अपना शिकार बनाने वाले युवराज सिंह (3 मैच में 2 विकेट, इकॉनमी 7.20) टीम इंडिया की गेंदबाजी के वे सितारे हैं, जिन्हें शायद ज्यादा तवज्जो भले न मिल पाए, लेकिन ये एक संतुलित टीम इंडिया के सितारे हैं, जिनसे फैन्स को अगले महामुकाबले में जबरदस्त उम्मीदें रहेंगी।
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