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This Article is From Dec 08, 2025

'हर ओवर नया मौका है', जस्टिस विक्रम नाथ ने बताया क्यों एक जैसे हैं क्रिकेटर और जज

वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ ने क्रिकेट में आए ऐतिहासिक परिवर्तन के बारे में बात कही. उन्होंने कहा महिला क्रिकेट का विश्व कप जीतना किसी क्रांति से कम नहीं है.

'हर ओवर नया मौका है', जस्टिस विक्रम नाथ ने बताया क्यों एक जैसे हैं क्रिकेटर और जज

'फेयर प्ले, धैर्य, सम्मान, टीमवर्क और दबाव में भी सिद्धांत न छोड़ना, एक अच्छे क्रिकेटर और एक अच्छे जज में बड़ी समानता जरूर होती है', ये बात सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ ने दिल्ली हाईकोर्ट में मोहिंदर कोहली मेमोरियल T-10 टेनिस बॉल क्रिकेट टूर्नामेंट का उद्घाटन करते हुए कही. उन्होंने क्रिकेट और कानून के बीच गहरा संबंध बताते हुए कहा कि दोनों ही भारतीय जीवन का अभिन्न अंग बन चुके हैं और दोनों का मूल संदेश निष्पक्षता, नियमों का सम्मान और टीम वर्क है. 

यह टूर्नामेंट सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस हिमा कोहली और उनकी बहन नीलू कोहली की दिवंगत मां की स्मृति में आयोजित किया गया.

'स्पिरिट ऑफ द गेम' और 'न्याय'

जस्टिस नाथ ने कहा कि ब्रिटिश शासन ने भारत को क्रिकेट की रूलबुक और कॉमन लॉ की परंपरा दोनों दिए, लेकिन भारतीयों ने इन्हें पारिवारिक धरोहर बना दिया. उन्होंने दोनों क्षेत्रों की समानता पर जोर देते हुए कहा, "कानून में हम संविधान की स्पिरिट की बात करते हैं और क्रिकेट में गेम की स्पिरिट की. दोनों का मूल आधार न्याय, निष्पक्षता और सम्मान है."  उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि जहां जज को पता होता है कि किस दिन रिटायर होना है, वहीं बल्लेबाज को कभी पता नहीं होता कि कौन-सी गेंद उसकी आखिरी होगी.

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पुरानी रेखाएं अब टूट चुकी हैं

जस्टिस नाथ ने क्रिकेट में आए ऐतिहासिक परिवर्तन का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि 2025 में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की वर्ल्ड कप जीत ने महिला बनाम पुरुष की पुरानी रेखाओं को मिटा दिया है. उन्होंने कहा, "एक समय था जब क्रिकेट सिर्फ पुरुषों का खेल माना जाता था, लेकिन 2025 में महिलाओं ने दुनिया को दिखा दिया कि खेल प्रतिभा का होता है,जेंडर का नहीं. 1983 की पुरुष टीम की जीत की तरह ही, 2025 का वर्ल्ड कप महिला क्रिकेट के लिए क्रांति लेकर आया है.

दबाव में सही फैसला

जस्टिस नाथ ने कहा कि दोनों क्षेत्रों की बुनियादी शिक्षाएं समान हैं, जैसे फेयर प्ले, धैर्य, सम्मान, टीमवर्क और दबाव में भी सिद्धांत न छोड़ना. एक अच्छे क्रिकेटर और एक अच्छे जज में एक बड़ी समानता जरूर होती है, दबाव में भी सही फैसला करना.

हर ओवर नया मौका

आखिर में उन्होंने कहा कि यह टूर्नामेंट सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि एक मां की विरासत, बहनों की एकजुटता है. क्रिकेट हमें सिखाता है कि हर ओवर नया मौका है.जीवन भी ऐसा ही है.

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