- इंडिया ने विशाखापत्तनम टी-20 मैच में पांच स्पेशलिस्ट गेंदबाजों के साथ एक बल्लेबाज कम उतारने का प्रयोग किया
- पावर प्ले में इंडिया को शुरुआती विकेट गंवाने की समस्या बनी हुई है और हरभजन सिंह ने संभलकर खेलने की सलाह दी है
- संजू सैमसन की बल्लेबाजी फॉर्म खराब है, पिछले चार मैचों में उन्होंने कुल चालीस रन बनाए और दबाव में हैं
विशाखापत्तनम में टीम इंडिया की 50 रनों से हार ने वर्ल्ड कप से पहले कई सबक़ दे दिए हैं. हालांकि भारत किवी टीम के ख़िलाफ़ पहले ही सीरीज़ अपने कब्ज़े में कर चुका है. लेकिन हाई रिस्क, हाई रिवार्ड वाली टीम इंडिया की रणनीति क्या टीम इंडिया के लिए सबसे सटीक है या फिर सावधानी से पावरप्ले में खेलने का तरीका टीम के लिए ज़्यादा कारगर साबित हो सकता है, टीम मैनेजमेंट के लिए ये बड़ा सवाल बन गया है. विशाखापत्तनम टी-20 में में टीम इंडिया ने एक बैटर कम कर मैदान में उतरने का प्रयोग किया. लेकिन पांच स्पेशलिस्ट गेंदबाज़ों के साथ उतरने का उसका ये प्रयोग नाकाम रहा.
पावर प्ले में करें संभल कर शुरुआत!
हरभजन सिंह ने STAR SPORTS से बात करते हुए पहले ही टीम इंडिया को सलाह दी थी कि ओपनिंग बैटर्स को पहली गेंद से ताबड़तोड़ शुरुआत करने के बजाए एक-दो ओवर पावर प्ले में भी संभलकर खेलना चाहिए. लेकिन अबतक किवी टीम के खिलाफ़ चारों टी-20 मैच में टीम इंडिया को पावर प्ले में शुरुआती विकेट गंवाने पड़े हैं. ऐसे में मुमकिन है टीम इंडिया हरभजन सिंह जैसे एक्सपर्ट्स की सलाह पर भी ग़ौर फ़रमाए.
संजू सैमसन का चलना ज़रूरी
संजू सैमसन ने पिछली 4 पारियों में सिर्फ़ 40 रन जोड़े हैं. उनके बल्ले की खामोशी लंबी होती जा रही है. संजू सैमसन के नहीं चलने का अभी तक टीम इंडिया पर कोई ख़ास असर नहीं दिखा है. नागपुर (10 रन), रायपुर (6 रन), गुवाहाटी (0 रन) और विशाखापत्तन (24 रन) में संजू का बल्ला 25 का आंकड़ा भी पार नहीं कर सका. टीम इंडिया अबतक पावर प्ले का अपने प्लान के मुताबिक बेस्ट इस्तेमाल शायद ही कर पाई है.
पिछली पांच पारियों में संजू के नाम कोई अर्द्धशतक नहीं है. पिछली 15 पारियों में उनके नाम 1 अर्द्धशतक है. लेकिन पिछली 20 पारियों में उनके नाम 3 शतक और एक अर्द्धशतक है.
संजू सैमसन के टी-20 करियर का आकर्षक फॉर्म और पिछले डेढ़ साल में हैदराबाद, डरबन और जोहानिसबर्ग में उनकी शतकीय पारियों ने उनका कद ज़रूर ऊंचा किया और इन्हीं शतकीय पारियों ने उनकी टॉप ऑर्डर में उपकप्तान शुभमन गिल की जगह टी-20 में उनकी वापसी करवाई. लेकिन संजू पर खुद का दबाव ज़रूर बढ़ रहा होगा.
रिंकू का रोल फ़िनिशर ही रहे
रिंकू की टीम में वापसी तय हुई तो उन्हें अपना रोल बतौर फ़िनिशर समझा जा रहा था. इसे टीम इंडिया का प्लान-ए माना जा सकता है. विशाखापत्तनम में रिंकू का इस्तेमाल चौथे नंबर पर टीम इंडिया को रास नहीं आया. हो सकता है त्रिवेंद्रम में एक बार फिर टीम इंडिया रिंकू को फिर से फ़िनिशिंग की ही ज़िम्मेदारी मिले.
स्पिनर की जोड़ी का विकल्प
इसमें कोई शक नहीं कि टीम इंडिया के लिए मैचविनर कुलदीप यादव और मिस्ट्री स्पिनर वरुण चक्रवर्ती की जोड़ी नंबर-1 और नंबर-2 की जोड़ी है. हालांकि रवि बिश्नोई ने गुवाहाटी में 18 रन देकर 2 विकेट लिए लेकिन विशाखापत्तनम में 49 रन देकर 1 विकेट अपने नाम किया. ऐसे में टीम इंडिया को अपने स्पिनर्स के इस्तेमाल को ऑप्टिमाइज़ करना होगा यानी चालाकी से करना होगा.
फ़ील्डिंग पर फोकस
ओस भरे मैदानों पर टीम इंडिया की गेंदबाज़ी और फ़ील्डिंग वर्ल्ड कप में बड़ा फ़ैक्टर साबित होगी. ख़ासकर दबाव भरे मैचों में फ़ील्डिंग मैच में हार-जीत का अंतर साबित हो सकती है. किवी टीम ने शानदार फ़ील्डिंग कर साबित कर दिया कि मैच में बल्ले और गेंदबाज़ी के अलावा उपमहाद्वीप की पिचों पर फ़ील्ड में चुस्ती टीम की जीत का ‘X' फ़ैक्टर बन सकता है.
पूर्व कप्तान और कॉमेन्टेटर ने विशाखापत्तन में रिंकू सिंह की फ़ील्डिंग की तारीफ़ करते हुए कहा, “रिंकू बेहद पॉज़िटिव हैं. उनके चेहरे पर स्माइल होती है. वो दूसरे फ़ील्डरों की हौसलाअफ़ज़ाई करते हैं. और मुश्किल कैचों को आसान बना देते हैं. रिंकू जैसे खिलाड़ी टीम के लिए बेहद सकारात्मक हैं.”
यह भी पढ़ें- 'भारत के खिलाफ कोई भी लक्ष्य...', जीतकर भी दहशत में हैं सैंटनर, वर्ल्ड कप को लेकर जानें सीफर्ट ने क्या कहा
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं