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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फरवरी में इजरायल का कर सकते हैं दौरा, हो सकते हैं बड़े समझौते

भारत और इजरायल ने पिछले एक दशक में अपने संबंधों को लगातार मजबूत किया है, जिसमें रक्षा और सुरक्षा सहयोग साझेदारी के प्रमुख स्तंभों में से एक बनकर उभरा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फरवरी में इजरायल का कर सकते हैं दौरा, हो सकते हैं बड़े समझौते
प्रधानमंत्री मोदी ने आखिरी बार 2017 में इजरायल का दौरा किया था.
  • इजरायल के राजदूत ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी फरवरी में इजरायल का दौरा कर सकते हैं, जिससे सहयोग बढ़ेगा
  • इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मोदी को औपचारिक निमंत्रण दिया है और यात्रा की तैयारियां चल रही हैं
  • दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष, नवाचार और मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत को प्राथमिकता दी है

इजरायल के भारत में राजदूत रूवेन अजार ने एनडीटीवी को बताया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फरवरी में इजरायल का दौरा कर सकते हैं, जिससे दोनों देशों के बीच तेजी से बढ़ते रणनीतिक सहयोग को नई गति मिलेगी. अगर यह दौरा उम्मीद के मुताबिक होता है, तो यह पश्चिम एशिया में चल रही भू-राजनीतिक उथल-पुथल के समय और डिफें, टेक, सिक्योरिटी, ट्रेड और इनोवेशन के क्षेत्र में भारत और इजरायल के बीच तालमेल को और बढ़ाने वाला होगा.

दौरे की चल रही तैयारी

राजदूत अजार ने पुष्टि की कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी को इजरायल आने का औपचारिक निमंत्रण दिया है और कहा है कि यात्रा को जल्द से जल्द सुगम बनाने के लिए तैयारियां चल रही हैं. अजार ने कहा, "हम उनसे जल्द ही मिलने की उम्मीद करते हैं. हम पुष्टि करते हैं कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने उन्हें आमंत्रित किया है, और हम उनसे जल्द से जल्द मिलने की उम्मीद करते हैं." हालांकि उन्होंने कोई निश्चित तारीख नहीं बताई.

राजनयिक सूत्रों ने संकेत दिया कि फरवरी को संभावित समय के रूप में माना जा रहा है, बशर्ते कार्यक्रम और सुरक्षा व्यवस्था को अंतिम रूप दे दिया जाए.

यह संभावित यात्रा हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच लगातार उच्च स्तरीय आदान-प्रदान की गति को और मजबूत करेगी. हाल ही में कई वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों ने नई दिल्ली और तेल अवीव के बीच यात्रा की है, जो दोनों पक्षों द्वारा संबंधों को दिए जाने वाले महत्व को रेखांकित करता है, विशेष रूप से रक्षा सहयोग, आतंकवाद विरोधी अभियान, कृषि, जल प्रबंधन, सेमीकंडक्टर और उच्च प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में. भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में आधिकारिक यात्रा पर इजरायल का दौरा किया था.

ये दोस्ती क्यों जरूरी

भारत और इजरायल ने पिछले एक दशक में अपने संबंधों को लगातार मजबूत किया है, जिसमें रक्षा और सुरक्षा सहयोग साझेदारी के प्रमुख स्तंभों में से एक बनकर उभरा है. इजरायल भारत के प्रमुख रक्षा प्रौद्योगिकी साझेदारों में से एक है, जो मिसाइलों और ड्रोन से लेकर निगरानी और वायु रक्षा प्लेटफार्मों तक महत्वपूर्ण प्रणालियों की आपूर्ति करता है. दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में भी सहयोग का विस्तार किया है.

इन मुद्दों पर भी रहेगा जोर

रक्षा के अलावा, दोनों पक्ष आर्थिक और जन-संबंधों को मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं. मुक्त व्यापार समझौते पर भी बातचीत जारी है, और स्टार्टअप, फिनटेक, एआई, खाद्य सुरक्षा और स्वच्छ जल प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ रहा है. नई दिल्ली के अधिकारी इजरायल को भारत की व्यापक पश्चिम एशिया रणनीति में एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में देखते हैं, जिसका उद्देश्य कई क्षेत्रीय देशों के साथ मजबूत संबंधों को संतुलित करना है, साथ ही कनेक्टिविटी, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और भारतीय प्रवासी समुदाय के कल्याण पर ध्यान केंद्रित करना है. इज़राइल के लिए, भारत एशिया में एक प्रमुख रणनीतिक और आर्थिक भागीदार है, जो आतंकवाद और क्षेत्रीय स्थिरता के बारे में समान चिंताओं का सामना करता है.

लेखक के बारे में
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आदित्य राज कौल
Senior Executive Editor, National Security & Strategic Affairs
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