भारत के पूर्व क्रिकेटर लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने शुक्रवार को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के कमेंट्री पैनल से संन्यास की घोषणा की. शिवरामकृष्णन ने न सिर्फ अपने फैसले के पीछे अवसरों की कमी को प्रमुख कारण बताया, बल्कि उन्होंने बीसीसीआई पर "रंग भेदभाव" का भी आरोप लगाया. शिवरामकृष्णन ने कहा कि उन्हें टॉस और प्रेजेंटेशन समारोह आयोजित करने का अवसर नहीं मिला, और उनका मानना था कि इसमें भेदभाव की भूमिका हो सकती है. शिवरामकृष्णन की घोषणा से प्रशंसक बटे हुए हैं. भारत के महान स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने भी इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त की. शिवरामकृष्णन ने 1980 के दशक की शुरुआत में 17 साल की उम्र में अपनी दमदार लेग-स्पिन गेंदों, गूगली और टॉप स्पिन से हलचल मचा दी थी. भले ही उनका क्रिकेट करियर लंबा नहीं चला लेकिन इसके बाद उन्होंने कमेंटेटर के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई.
शिवरामकृष्णन ने ट्वीट की एक सीरीज में अपनी निराशा व्यक्त की, जिससे पता चलता है कि वह अपने काम से संतुष्ट नहीं थे. उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया,"मैं बीसीसीआई के लिए कमेंट्री से संन्यास ले रहा हूं."
I am retiring from commentary for BCCI
— Laxman Sivaramakrishnan (@LaxmanSivarama1) March 20, 2026
शिवरामकृष्णन ने कहा,"पिछले 23 सालों से मुझे टॉस और पुरस्कार वितरण समारोह के लिए नहीं भेजा गया. जबकि नए लोग पिच रिपोर्ट, टॉस और पुरस्कार वितरण समारोह के लिए भेजे जाते रहे. मुझे उस समय भी नहीं भेजा गया जब रवि शास्त्री कोचिंग कर रहे थे, तो इसका मतलब क्या हो सकता है." उन्होंने कहा,"बीसीसीआई के अधिकार रखने वाली कंपनी का क्या हाल होता है कोई भी इसका अंदाजा लगा सकता है. मेरा संन्यास लेना कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन टीवी प्रोडक्शन की एक नई कहानी सामने आ रही है. जल्द ही आपके सामने पूरी तस्वीर स्पष्ट हो जाएगी."

जब एक यूजर ने पूछा कि क्या उनकी त्वचा का रंग कोई मुद्दा है, तो शिवरामकृष्णन ने जवाब दिया,"आप सही हैं. रंगभेद."

रविचंद्रन अश्विन ने शिवरामकृष्णन के अचानक लिए गए फैसले पर निराशा जताई. उन्होंने ट्वीट किया,"अरे नहीं. इस आईपीएल में क्यों नहीं?"
Oh no! Why not this IPL? https://t.co/ZufOluzyoG
— Ashwin 🇮🇳 (@ashwinravi99) March 20, 2026
60 वर्षीय शिवरामकृष्णन को दो दशक से अधिक समय तक कमेंट्री बॉक्स के अंदर खुलकर अपने विचार व्यक्त करने के लिए जाना जाता रहा. शिवा नाम से मशहूर शिवरामकृष्णन ने भारत की तरफ से 1983 से 1986 के बीच नौ टेस्ट मैच और 16 वनडे खेले. वह 2000 में कमेंट्री से जुड़े. उन्होंने आईसीसी क्रिकेट समिति में खिलाड़ी प्रतिनिधि के रूप में भी कार्य किया. सुनील गावस्कर की कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया में 1985 में बेन्सन एंड हेजेस विश्व चैम्पियनशिप में भारत की जीत में शिवरामकृष्णन ने अहम भूमिका निभाई थी. वह उस टूर्नामेंट में सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाजों की लिस्ट में शामिल थे, जो उस समय की परिस्थितियों को देखते हुए एक स्पिनर के लिए बहुत बड़ी बात थी.
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