जम्मू कश्मीर केएससीए ग्राउंड पर कर्नाटक को हराकर पहली बार रणजी चैंपियनी बनी. टीम की जीत के हीरो आकिब नबी है. लेकिन पर्दे के पीछे हैं एक गुमनाम चेहरा. जिसे कभी रणजी ट्रॉफी में शतकों का राजा कहा गया, जिस पर मैच फिक्सिंग के आरोप लगे और कोर्ट से लंबी लड़ाई के बाद उसने जीत हासिल की. जो दिल्ली जैसी टीम का कोच बनना चाहता था, लेकिन जब मौका नहीं मिला और 2022 में जम्मू कश्मीर ने उनसे संपर्क किया तो इसके बाद टीम की काया ही पलट गई. बीते कुछ समय से घरेलू सर्किट में लगातार सुर्खियां बटोरने के बाद जम्मू कश्मीर पहली बार रणजी चैंपियन बनने जा रही है. फाइनल में उसका सामना कर्नाटक जैसी मजबूत टीम से था, लेकिन जम्मू ने हार नहीं मानी और उन्होंने कर्नाटक को घुटनों पर ला दिया और इसका श्रेय जाता है जम्मू कश्मीर के कोच अजय शर्मा को.
जब जम्मू-कश्मीर ने बंगाल को छह विकेट से हराकर पहली बार रणजी ट्रॉफी फाइनल के लिए क्वालीफाई किया, तो विजयी खिलाड़ियों ने मुख्य कोच अजय शर्मा को अपने कंधों पर उठा लिया. कल्याणी के मैदान में "भाइयों में भाई कैसा हो, अज्जू भाई जैसा हो" के नारे गूंज उठे.
अजय शर्मा दिल्ली के एक क्रिकेटर रहे, जिन्होंने एक समय रणजी ट्रॉफी में इतना शानदार प्रदर्शन किया और शतक ठोके कि उन्हें रणजी में शतकों का राजा कहा जाने लगा. अजय के नाम 129 फर्स्ट क्लास मैचों की 166 पारियों में 38 शतक हैं और 36 अर्द्धशतक. उनके नाम 67.46 की औसत से 10120 रन हैं. अजय भारत के लिए 1 टेस्ट और 31 वनडे खेलने में सफल रहे.

शर्मा 2022 के मध्य में परिवार के साथ थाईलैंड में छुट्टियां मना रहे थे, तभी उनके फोन की घंटी बजी. दूसरी तरफ मिथुन मन्हास थे, जो तब जम्मू-कश्मीर में क्रिकेट विकास के प्रमुख थे. शर्मा ने दिल्ली की आयु वर्ग की टीमों को सफलतापूर्वक कोचिंग दी थी. यश ढुल के आयु वर्ग से भारत की अंडर-19 कप्तानी तक पहुंचने में उनकी अहम भूमिका थी.
स्वाभाविक रूप से, उनके मन में दिल्ली की सीनियर टीम में शामिल होने की महत्वाकांक्षा थी. जब ऐसा नहीं हो पाया तो उन्होंने जो भी अवसर मिला उसे स्वीकार करने का फैसला किया. शर्मा कहते हैं,"सच कहूं तो, मैं शामिल होने के लिए उत्सुक नहीं था. लेकिन दिल्ली में मेरा कोई भविष्य नहीं था. शायद अदालती मामले एक बाधा थे, भले ही मुझे बरी कर दिया गया था. इसलिए मिथुन के समझाने पर मैंने जम्मू-कश्मीर का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया."

खत्म किया स्टार कल्चर
जम्मू-कश्मीर में शर्मा के शुरुआती दिन उथल-पुथल भरे रहे. अजय शर्मा ने शुरुआती दिनों में ही टीम के अंदर स्टार कल्चर को भांप लिया था. अजय ने यह स्पष्ट कर दिया कि वे "स्टार कल्चर" को पूरी तरह से खत्म करना चाहते हैं. अब्दुल समद को एक महीने के लिए टीम से बाहर कर दिया गया. हालांकि, खिलाड़ियों को यह कदम पसंद नहीं आया। खिलाड़ियों के एक समूह ने ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता की अध्यक्षता वाली अदालत द्वारा नियुक्त समिति को पत्र लिखकर शर्मा के तौर-तरीकों की शिकायत की. स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए समिति ने शर्मा को अपना रवैया नरम करने की सलाह दी.
खिलाड़ियों ने समझा तानाशाह
अजय शर्मा ने सलाह का पालन किया, लेकिन वह भूले नहीं कि क्या हुआ था. इएसपीएन की रिपोर्ट के अनुसार, अजय शर्मा ने कहा,"मेरे पास अभी भी वो पत्र हैं." वो हंसते हुए कहते हैं. "वे मुझे तानाशाह समझते थे. हालांकि मैंने अपने कोचिंग के तरीके नहीं बदले, लेकिन मैंने उनसे वैसे ही बात करना सीख लिया जैसे उन्हें पसंद था."
जिम्मेदारी संभालने के पहले दिन, जब शर्मा ने सभी खिलाड़ियों से उनकी उपलब्धियों और लक्ष्यों के बारे में पूछा, तो उन्हें एक पैटर्न देखकर हैरानी हुई. "वे आईपीएल नेट बॉलर बनकर जश्न मना रहे थे." "अगर उन्हें ट्रायल का मौका मिलता था, तो वे इसे गर्व की बात समझते थे. यह सिर्फ जीवित रहने की मानसिकता काफी नहीं थी. हमें इसे बदलना था."
'शतकों का शहंशाह'
जम्मू कश्मीर क्रिकेट से जुड़ एक अधिकारी दिलचस्प घटना बताते हैं. अजय शर्मा को कोच बने दो साल हो गए थे. एक दिन मुंबई हवाई अड्डे पर पूर्व भारतीय और तमिलनाडु के तेज गेंदबाज एल बालाजी ने उन्हें देखा और गर्मजोशी से उनका अभिवादन करते हुए उन्हें "शतकों का शहंशाह" कहा.
खिलाड़ी अचंभित रह गए. कुछ ही सेकंड में, सभी ने अपने फोन निकाल लिए. और उन्हें खोजने लगे. तब खिलाड़ियों को शर्मा के प्रथम श्रेणी के रिकॉर्ड के बारे में पता चला. अधिकारी ने कहा,"तब उन्हें पता चला कि उनके मुख्य कोच कौन हैं."
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