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वह खिलाड़ी जिसने अपने डेब्यू में बतौर 'नाइट वॉचमैन' की 2 घंटे बल्लेबाजी, जिसे दिया गया 'मसल्स' का निकनेम

Venkatapathy Raju: वेंकटपति राजू साल 1990-91 में एशिया कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे. इसके साथ ही 1992 और 1996 में वह भारत की ओर वर्ल्ड कप भी खेले. हालांकि, इंजरी की वजह से वेंकटपति का करियर ज्यादा लंबा नहीं हो सका.

वह खिलाड़ी जिसने अपने डेब्यू में बतौर 'नाइट वॉचमैन' की 2 घंटे बल्लेबाजी, जिसे दिया गया  'मसल्स' का निकनेम
Interesting Facts, Trivia About Venkatapathy Raju

Venkatapathy Raju: कुछ खिलाड़ी ऐसे होते हैं, जिनका करियर बेशक लंबा नहीं होता, लेकिन वह अपने प्रदर्शन से विश्व क्रिकेट में छाप छोड़ने में सफल रहते हैं. कुछ ऐसा ही करियर भारत के पूर्व स्पिनर वेंकटपति राजू का रहा. अपनी घूमती गेंदों से बल्लेबाजों को परेशान करने के लिए मशहूर रहे वेंकटपति ने डेब्यू मुकाबले में अपनी बल्लेबाजी से हर किसी का दिल जीत लिया था. वेंकटपति राजू का जन्म 9 जुलाई, 1969 को आंध्र प्रदेश के आलमुरु में हुआ, वेंकटपति की बचपन से ही क्रिकेट में खास दिलचस्पी थी। जल्द ही उन्होंने क्रिकेट की दुनिया में अपना करियर बनाने का फैसला कर लिया. अपनी स्पिन गेंदबाजी से वह बड़े से बड़े बल्लेबाजों को चकमा देने में माहिर थे।1989-90 के घरेलू सीजन में उनका प्रदर्शन लाजवाब रहा. फर्स्ट क्लास मुकाबलों में 32 विकेट लेने के बाद वह सिलेक्टर्स का ध्यान अपनी ओर खींचने में सफल रहे और उन्हें भारतीय टीम से बुलावा आया.

साउथ अफ़्रीकी ऑलराउंडर ब्रायन मैकमिलन ने राजू को उनका निकनेम "मसल्स" दिया था.

क्रीज पर खूंटा गाड़कर दो घंटे खड़ा रहा

1990 में वेंकटपति ने अपने इंटरनेशनल करियर का आगाज न्यूजीलैंड के खिलाफ किया. हालांकि, डेब्यू मुकाबले में वह गेंद से नहीं, बल्कि अपनी बल्लेबाजी की वजह से सुर्खियां बटोरने में सफल रहे। बतौर नाइट वॉचमैन बैटिंग करने उतरे वेंकटपति क्रीज पर खूंटा गाड़कर खड़े रहे और उन्होंने मुश्किल हालातों में 2 घंटे तक बल्लेबाजी करते हुए 32 रन बनाए. यह उनके करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी भी रही.

वेंकटपति ने भारत की जर्सी में कुल 28 टेस्ट मैच खेले और इस दौरान उन्होंने 30 की औसत से 93 विकेट निकाले। एक पारी में 5 विकेट लेने का कारनामा वेंकटपति ने 5 बार किया. उन्होंने टीम इंडिया के लिए 53 वनडे मैच खेले और इस दौरान 4.36 की इकोनॉमी से 63 विकेट चटकाए. 46 रन देकर 4 विकेट वेंकटपति का वनडे क्रिकेट में बेस्ट प्रदर्शन रहा.

वेंकटपति राजू साल 1990-91 में एशिया कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे. इसके साथ ही 1992 और 1996 में वह भारत की ओर वर्ल्ड कप भी खेले. हालांकि, इंजरी की वजह से वेंकटपति का करियर ज्यादा लंबा नहीं हो सका.1996 में उन्होंने अपना आखिरी वनडे मैच खेला, जबकि साल 2001 में वह भारत की जर्सी में अपना अंतिम टेस्ट खेलने ईडन गार्डन्स के मैदान पर उतरे थे.

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