वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ चल रही पांच मैचों की टी20 सीरीज में युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी को अभी भी खेलने का मौका नहीं मिल है. इंग्लैंड के खिलाफ पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों की सीरीज के दूसरे मुकाबले में अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू करने के बाद वैभव को सीरीज के आखिरी मैच में प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया गया था. इसके बाद उन्हें अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज में भी बेंच पर बैठना पड़ा. लेकिन फिर एशियन गेम्स में वैभव प्लेइंग इलेवन का हिस्सा थे. मैनेजमेंट ने संजू को ड्रॉप नहीं किया था और वो नंबर-3 पर खेले थे, ऐसा परिस्थितियों की मांग थी. फिलहाल टीम इंडिया वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 सीरीज खेल रही है और फैंस फिर से वैभव को बेंच पर देख रहे हैं. हेड कोच गौतम गंभीर और कप्तान अय्यर साफ कर चुके हैं कि वैभव को मौके मिलेंगे, लेकिन मौजूदा समय में संजू ही अभिषेक के साथ ओपनिंग करते दिखेंगे. ऐसे में सूर्यवंशी के बचपन के कोच मनीष ओझा ने इस युवा खिलाड़ी के साथ किए जा रहे बर्ताव को लेकर गंभीर एंड मैनेजमेंट की कड़ी आलोचना की है.
श्रेयस अय्यर को कप्तानी मिलने के बाद से टीम मैनेजमेंट ने ओपनिंग में संजू सैमसन और वैभव दोनों को मौके दिए. लेकिन इंग्लैंड दौरे पर मिली असफलता के बाद संजू पर फिर से भरोसा जताया गया. एशियन गेम्स के दौरान वीवीएस लक्ष्मण ने जो रास्ता दिखाया, लगा कि गंभीर भी उसी पर चलेंगे, लेकिन गंभीर ने अपने पुराने फॉर्मुले के साथ जाने का फैसला लिया. ऐसे में वैभव के बचपन के कोच ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जो भी वैभव से टकराने की कोशिश करेगा, वो टूट जाएगा.
वैभव सूर्यवंशी के बचपन के कोच मनीष ओझा ने 'स्पोर्ट्स नाउ' से कहा,"मेरे हिसाब से वैभव एक तूफ़ान की तरह है. जो कोई भी उससे टकराने की कोशिश करेगा, वह आखिरकार टूट ही जाएगा - आज नहीं तो कल." उन्होंने आगे कहा,"मौजूदा भारतीय टीम मैनेजमेंट को लगता है कि वे खिलाड़ियों को बेंच पर बिठाकर तैयार करते हैं. क्रिकेट के कई और दिग्गज भी हैं. आप उनसे बात करें, तो हर कोई यही कहेगा कि अगर हमें खिलाड़ियों की अगली पीढ़ी तैयार करनी है, तो उन्हें उन हालात में डालना होगा. उन्हें खिलाना होगा. बेंच पर बैठकर कोई खिलाड़ी कभी नहीं बना है और न ही बनेगा. और खासकर तब, जब इतने टैलेंटेड खिलाड़ी को बेंच पर बिठाकर रखा जाए."
कोच ने टीम मैनेजमेंट के फैसलों की कड़ी आलोचना करते हुए इसे "तानाशाही" करार दिया. मनीष ओझा ने आगे कहा,"तो या तो उन्होंने मन बना लिया है कि इस बच्चे को मौका नहीं देना है... उसे बाहर रखो और इतना निराश कर दो कि वह परेशान हो जाए. वह बाहर बैठा है और पानी पिला रहा है. मुझे लगता है कि अभी जो मैनेजमेंट है, वह एक तरह की तानाशाही चला रहा है- जो मन में आता है, वही करते हैं."
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