एशियन गेम्स में भारत को गोल्ड मेडल दिलाने के बाद अभिषेक शर्मा अब जश्न से आगे की सोच रहे हैं. उनका कहना है कि वेस्टइंडीज के खिलाफ नए घरेलू सीजन की शुरुआत करते हुए, युवा भारतीय टीम के लिए चुनौती यह है कि वह अपनी हालिया सफलता को लगातार जीत की आदत में बदले. ओपनर ने कहा कि सफलता को दोहराने के लिए टीम को उन्हीं प्रक्रियाओं और भूख को बनाए रखना होगा, जिनकी वजह से उसने वर्ल्ड कप जीता था. इसलिए, अभिषेक का ज़ोर पहले से हासिल की गई कामयाबी पर कम और ऐसे माहौल को बनाने पर ज़्यादा है जिसमें जीत एक आम बात बन सके.
26 साल के अभिषेक का मानना है कि सफल होने की सामूहिक इच्छा भारत को एक टूर्नामेंट से दूसरे टूर्नामेंट तक अपनी तीव्रता बनाए रखने में मदद कर सकती है. अभिषेक ने फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ तूफानी अर्धशतकीय पारी खेली थी और टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई थी.
अभिषेक ने जियोस्टार से कहा,"मुझे लगता है कि खासकर क्रिकेट में, जब मैंने शुरुआत की थी तब मैं 24 साल का था और अब 26 का हूं. एक युवा क्रिकेटर के तौर पर आप खुद से कहते हैं कि अभी बहुत कुछ हासिल करना बाकी है, यह तो बस शुरुआत है."
बाएं हाथ के इस विस्फोटक बल्लेबाज ने कहा,"मुझे लगता है कि किसी चीज़ को एक बार करना तो आसान है, लेकिन उसे आदत बना लेना और बार-बार वही करना, उसी प्रोसेस को बनाए रखना, एक खिलाड़ी के तौर पर आसान नहीं होता. लेकिन अगर टीम का माहौल ऐसा हो कि हर कोई एक-दूसरे के लिए अच्छा खेलना चाहता हो, भारत को जिताना चाहता हो और अपना दबदबा बनाना चाहता हो, तो मुझे लगता है कि यह एक आदत बन जाती है और इससे निश्चित रूप से मदद मिलती है."
इस सोच का असर इस बात पर भी दिखता है कि वह ड्रेसिंग रूम में अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों के साथ कैसे पेश आते हैं. जिसमें 15 साल के वैभव सूर्यवंशी भी शामिल हैं, जो उनके युवा ओपनिंग पार्टनर के तौर पर उभरे हैं. अभिषेक ने कहा कि इस युवा बल्लेबाज़ को प्रोफेशनल क्रिकेट की जरूरतों को समझने का काफी अनुभव मिल चुका है, जबकि टीम के सीनियर खिलाड़ी यह पक्का करने की कोशिश कर रहे हैं कि उसे सहज महसूस हो.
वैभव को लेकर अभिषेक ने कहा,"वह बहुत समझदार लड़का है. वह वैसा नहीं है जैसा हम 15 साल की उम्र में हुआ करते थे या कोई और होता है, क्योंकि वह पहले से ही 2-3 साल से इस क्रिकेट सेटअप का हिस्सा रहा है. इसलिए उसे पता है कि क्या, कहां और कितना अभ्यास करना है. मुझे लगता है कि धीरे-धीरे अनुभव के साथ वह ये चीजे और सीखेगा. और टीम में हम सभी साथी खिलाड़ी आपस में यही चर्चा करते हैं कि उसे और सहज कैसे महसूस कराया जाए."
अभिषेक ने कहा,"क्योंकि हम सभी जानते हैं कि उसने क्या हासिल किया है और वह यहीं का है. इसलिए मुझे भी लगता है कि यह मेरी ज़िम्मेदारी है कि उसे यह एहसास दिलाऊं कि हम सभी, यानी उसके बड़े भाई, उसके साथ हैं. बस खेल का मज़ा लो, अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करो और जब भी मौका मिले, मैच जीतो." बता दें, वर्ल्ड चैंपियन भारतीय टीम एशियन गेम्स के बाद अब वेस्टइंडीज का सामना करने के लिए तैयार है और पांच मैचों की सीरीज एशियन गेम्स के बाद भारत का पहला असाइनमेंट है.
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