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वो गांव, जहां आजाद भारत में पहली बार पहुंचे कलेक्टर.. गांव वालों ने सुना दी अपनी समस्याएं

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में तेलंगाना की सीमा से सटे गांव में पहली बार कलेक्टर पहुंचे. ये गांव अब तक नक्सल प्रभावित थे लेकिन अब नक्सलवाद खत्म हो रहा है, जिससे प्रशासनिक मौजूदगी बढ़ गई है.

वो गांव, जहां आजाद भारत में पहली बार पहुंचे कलेक्टर.. गांव वालों ने सुना दी अपनी समस्याएं
कलेक्टर को अपनी परेशानियां सुनाते ग्रामीण.
  • बीजापुर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की बढ़ती पकड़ के साथ विकास कार्यों की गति भी तेज हुई है
  • प्रशासनिक अधिकारी पहली बार तेलंगाना सीमा से सटे दूरदराज गांवों का दौरा कर ग्रामीणों से सीधे संवाद कर रहे हैं
  • कलेक्टर संबित मिश्रा ने स्कूलों और आंगनवाड़ियों का निरीक्षण कर बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की
बीजापुर:

जैसे-जैसे बीजापुर में नक्सलियों के प्रभाव वाले क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की पकड़ मजबूत होती जा रही है, वैसे-वैसे इन दुर्गम इलाकों में विकास कार्यों ने भी रफ्तार पकड़ ली है. छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर स्थित बीजापुर के उन गांवों में, जहां आजाद भारत के बाद से आज तक कोई प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंच पाया था, वहां अब प्रशासन पहुंच रहा है.

हाल ही में बीजापुर कलेक्टर संबित मिश्रा और जिला पंचायत सीईओ नम्रता चौबे ने पूरे प्रशासनिक अमले के साथ तेलंगाना सीमा से सटे गांवों का ऐतिहासिक दौरा किया. शासन-प्रशासन की इस मौजूदगी ने न केवल ग्रामीणों में सुरक्षा का भाव पैदा किया है, बल्कि विकास की नई उम्मीदें भी जगा दी हैं.

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खौफ के साये से बाहर आ रहे ग्रामीण

एक समय था जब इन इलाकों के ग्रामीण पुलिस या प्रशासनिक वर्दी को देखते ही जंगलों की ओर भाग जाया करते थे. लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. धुर नक्सल प्रभावित गांव कांचाल और पालागुड़ा में पहली बार पहुंचे कलेक्टर को देखकर ग्रामीणों ने भागने के बजाय अपनी मूलभूत समस्याओं- जैसे सड़क, पानी और शिक्षा के लिए मांग पत्र सौंपे. कांचाल वही गांव है जहां 2013 में नक्सलियों ने आंध्र प्रदेश के ग्रेहाउंड्स बल के सर्कल इंस्पेक्टर की हत्या कर दी थी.

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कलेक्टर संबित मिश्रा ने कांचाला, पालागुड़ा और बोमेड़ के स्कूलों और आंगनवाड़ियों का निरीक्षण किया. उन्होंने स्कूली बच्चों से उनकी पढ़ाई और भविष्य के सपनों को लेकर चर्चा की. कलेक्टर और सीईओ ने बच्चों के साथ बैठकर मध्याह्न भोजन किया और खाने की गुणवत्ता की जांच की.

सात दिन में हल होगी समस्या

ग्रामीणों ने दौरे के दौरान पेयजल की गंभीर समस्या से प्रशासन को अवगत कराया. इस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए कलेक्टर ने संबंधित विभाग को एक सप्ताह के भीतर सभी चिन्हित गांवों में हैंडपंप लगाने के कड़े निर्देश दिए. 

इसके साथ ही उन्होंने राशनकार्ड बांटने और कार्ड धारकों को ट्रैक्टर के माध्यम से गांव में ही खाने-पीने की चीजें मुहैया कराने के निर्देश भी दिए. ग्रामीणों को शासकीय योजनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से सभी नागरिकों के वोटर आईडी, आधार कार्ड एवं बैंक खाता खोलने हेतु विशेष शिविर आयोजित करने के निर्देश भी जारी किए गए.

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पंकज सिंह भदौरिया
संवाददाता
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