- मदर टेरेसा को 4 सितंबर को वैटिकन में संत की उपाधि दी जाएगी
- 2000 छात्रों ने स्क्रॉल पर संदेश लिखे और फ्लोरल डिजाइन बनाए
- स्क्रॉल पर तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता की तस्वीर भी दिखी
चेन्नई:
मदर टेरेसा को 4 सितंबर को संत की उपाधि दी जाएगी. इससे पहले चेन्नई में स्कूली छात्रों ने उन्हें एक अलग अंदाज में श्रद्धांजलि दी. शहर के विद्या मैट्रिकुलेशन हायर सेकंडरी स्कूल के छात्रों ने इस नोबेल पुरस्कार विजेता नन के सम्मान में 1000 फीट लंबा ग्रीटिंग स्क्रॉल बनाया.
दो हजार से ज्यादा छात्रों ने स्कूल ऑडिटोरियम की दीवार पर पांच फीट चौड़े स्क्रॉल पर संदेश लिखे, फ्लोरल डिजाइन बनाए और पर्चे चिपकाए. कई छात्रों ने दुनियाभर के नेताओं जैसे रोनाल्ड रीगन और प्रिंसेस डायना के साथ मदर टेरेसा की तस्वीरें इस स्क्रॉल पर चिपकाईं. इस स्क्रॉल पर तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे. जयललिता की तस्वीर भी चिपकाई गई.
किन्डर्गार्टन के नन्हे छात्रों ने स्क्रॉल पर अपने नन्हे हाथों की रंग-बिरंगी छाप छोड़ी. इसके बाद बड़े छात्रों ने करीब ढाई सौ मीटर लंबे ग्रीटिंग बैनर को मेडावक्कम-शौलिंगनल्लूर रोड पर प्रदर्शित किया.
वैटिकन द्वारा मदर टेरेसा को संत की उपाधि दिए जाने के फैसले पर एक छात्र ने खुशी जताते हुए कहा, 'कैनोनाइजेशन संत बनाने की प्रक्रिया है. हम खुश हैं कि मदर टेरेसा को संत की उपाधि दी जा रही है.'

शिक्षा प्रणाली में मूल्यों के महत्व पर बात करते हुए स्कूल की हेडमास्टर जयासीलन ने कहा, 'मदर टेरेसा के मूल्य आज भी इतने प्रासंगिक और महत्वपूर्ण हैं कि हम बच्चों को उनके योगदान के बारे में बताकर प्रेरित करते हैं.'
मदर टेरेसा ने तेजी से बढ़ते महानगर कोलकाता में करीब 4 दशक तक गरीब से गरीब व्यक्ति के लिए काम किया. शुरुआत में मदर टेरेसा आयरलैंड के लोरेटो ऑर्डर के तहत एक मिशिनरी टीचर के रूप में इस शहर में आई थीं. साल 1997 में उनकी मौत हो गई.
दो हजार से ज्यादा छात्रों ने स्कूल ऑडिटोरियम की दीवार पर पांच फीट चौड़े स्क्रॉल पर संदेश लिखे, फ्लोरल डिजाइन बनाए और पर्चे चिपकाए. कई छात्रों ने दुनियाभर के नेताओं जैसे रोनाल्ड रीगन और प्रिंसेस डायना के साथ मदर टेरेसा की तस्वीरें इस स्क्रॉल पर चिपकाईं. इस स्क्रॉल पर तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे. जयललिता की तस्वीर भी चिपकाई गई.
किन्डर्गार्टन के नन्हे छात्रों ने स्क्रॉल पर अपने नन्हे हाथों की रंग-बिरंगी छाप छोड़ी. इसके बाद बड़े छात्रों ने करीब ढाई सौ मीटर लंबे ग्रीटिंग बैनर को मेडावक्कम-शौलिंगनल्लूर रोड पर प्रदर्शित किया.
वैटिकन द्वारा मदर टेरेसा को संत की उपाधि दिए जाने के फैसले पर एक छात्र ने खुशी जताते हुए कहा, 'कैनोनाइजेशन संत बनाने की प्रक्रिया है. हम खुश हैं कि मदर टेरेसा को संत की उपाधि दी जा रही है.'

शिक्षा प्रणाली में मूल्यों के महत्व पर बात करते हुए स्कूल की हेडमास्टर जयासीलन ने कहा, 'मदर टेरेसा के मूल्य आज भी इतने प्रासंगिक और महत्वपूर्ण हैं कि हम बच्चों को उनके योगदान के बारे में बताकर प्रेरित करते हैं.'
मदर टेरेसा ने तेजी से बढ़ते महानगर कोलकाता में करीब 4 दशक तक गरीब से गरीब व्यक्ति के लिए काम किया. शुरुआत में मदर टेरेसा आयरलैंड के लोरेटो ऑर्डर के तहत एक मिशिनरी टीचर के रूप में इस शहर में आई थीं. साल 1997 में उनकी मौत हो गई.
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