जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन और उस दौरान हुई पुलिस कार्रवाई की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक नया मोड़ सामने आया है. मामले में याचिकाकर्ताओं ने शीर्ष अदालत में आवेदन दाखिल कर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर्ड कमेटी के पुनर्गठन की मांग की है. याचिकाकर्ताओं ने इस अर्जी पर जल्द सुनवाई का अनुरोध भी किया. इस दौरान वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अपने-अपने पक्ष रखे. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि फिलहाल कमेटी को काम करने दिया जाए, हालांकि आवेदन को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति दे दी गई.
कमेटी के पुनर्गठन की मांग
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन मामले में पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय हाई पावर्ड कमेटी का पुनर्गठन किया जाए. यह कमेटी सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में गठित की गई थी. आवेदन में कमेटी की संरचना को लेकर आपत्तियां जताई गई हैं और नए सिरे से गठन की मांग की गई है.
जल्द सुनवाई की मांग
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत से कहा कि कमेटी से संबंधित एक आवेदन लंबित है और यदि अदालत उचित समझे तो इसे अगले सप्ताह सूचीबद्ध किया जा सकता है. उन्होंने अदालत को बताया कि कुछ मुद्दों पर याचिकाकर्ताओं की चिंताएं हैं, जिन पर सुनवाई आवश्यक है.
तुषार मेहता ने जताई आपत्ति
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आवेदन पर आपत्ति जताते हुए इसे "mischievous" बताया. उन्होंने कहा कि आवेदन में कमेटी के पुनर्गठन के साथ-साथ एक मंत्री की जांच जैसी मांगें भी की गई हैं. मेहता ने अदालत से कहा, "यह कोई राजनीतिक मंच नहीं है." उन्होंने यह भी कहा कि आवेदन में कुछ न्यायाधीशों के नाम शामिल करते हुए यह सुझाव दिया गया है कि उन्हें कमेटी में रखा जाए.
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि यह आवेदन एक साझा चिंता को दर्शाता है और कुछ याचिकाकर्ताओं को कमेटी को लेकर आशंकाएं हैं. उन्होंने अदालत को बताया कि आवेदन का उद्देश्य उन चिंताओं को न्यायालय के समक्ष रखना है, जो याचिकाकर्ताओं के एक हिस्से द्वारा व्यक्त की गई हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि जो भी व्यक्ति या संस्था कमेटी के लिए काम करेगी, वह सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कार्य करेगी. उन्होंने कहा कि मामला अभी समाप्त नहीं हुआ है और सभी पक्ष कमेटी की सहायता के लिए मौजूद हैं. पीठ ने कहा कि पहले कमेटी को अपना काम करने दिया जाए और उसके बाद स्थिति का मूल्यांकन किया जाएगा.
अब आवेदन होगा सूचीबद्ध
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश ने आवेदन को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई. अब इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट हो सकेगा कि कमेटी के पुनर्गठन की मांग पर अदालत क्या रुख अपनाती है और याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों पर आगे क्या निर्णय लिया जाता है.
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