अमेरिकी और एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली का असर शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी दिख सकता है. गिफ्ट निफ्टी के रुझान निफ्टी और सेंसेक्स की कमजोर शुरुआत का संकेत दे रहे हैं. गिफ्ट निफ्टी करीब 24,413 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले बंद भाव से लगभग 175 अंक नीचे है. इसके अलावा भारतीय बाजार में लगातार छह कारोबारी सत्रों की तेजी के बाद निवेशक मुनाफावसूली भी कर सकते हैं.
वैश्विक बाजारों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली रही. अमेरिका में गुरुवार को नैस्डैक कंपोजिट 5.52% गिर गया. ये 19 महीनों की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट है. टेक्नोलॉजी शेयरों पर केंद्रित नैस्डैक-100 में 6.3% की गिरावट आई और इसकी बाजार वैल्यू से करीब 2.3 लाख करोड़ डॉलर साफ हो गए.
वहीं, एसएंडपी 500 इंडेक्स 4.36% से 4.4% तक टूट गया. इससे इसकी बाजार वैल्यू में करीब 2.8 लाख करोड़ डॉलर की कमी आई. डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज भी 3.44% गिर गया. तीनों प्रमुख अमेरिकी इंडेक्स में अप्रैल 2025 के बाद की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट दर्ज की गई. नैस्डैक कंपोजिट 10% से ज्यादा गिरावट के साथ करेक्शन जोन में भी पहुंच गया. बाजार में डर और अनिश्चितता का संकेत देने वाला वोलैटिलिटी इंडेक्स भी तेजी से चढ़ा.
बाजारों में गिरावट की 3 बड़ी वजहें जान लीजिए
AI और चिप कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली
सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट ने बाजार का माहौल बिगाड़ दिया. एएमडी के शेयर 17.3%, माइक्रोन टेक्नोलॉजी के 17.5% और एनवीडिया के 9.3% टूट गए. क्वालकॉम के शेयर भी 9.5% गिर गए. कंपनी की ओर से स्मार्टफोन चिप की बिक्री को लेकर दिए गए अनुमान से निवेशक निराश हुए.
पिछले एक साल में निवेशकों ने AI से जुड़ी कंपनियों में बड़े पैमाने पर पैसा लगाया है. उम्मीद थी कि डेटा सेंटर, कंप्यूटिंग क्षमता और एडवांस चिप की मांग लगातार बढ़ेगी. लेकिन अब निवेशक इन कंपनियों के शेयरों के ऊंचे वैल्यूएशन और भविष्य में होने वाले भारी निवेश को लेकर सवाल उठा रहे हैं.
अमेरिकी चुनाव के नतीजों से AI सेक्टर पर बढ़ी चिंता
बिकवाली की एक बड़ी वजह अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजे भी रहे. चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों की बड़ी जीत के बाद शुरुआत में बाजार में तेजी आई थी. लेकिन कई डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने AI डेटा सेंटर के तेजी से विस्तार का विरोध किया था. उनका कहना था कि इससे बिजली की खपत, पर्यावरण और स्थानीय समुदायों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है.
अब निवेशक आशंका जता रहे हैं कि नई राजनीतिक स्थिति में AI डेटा सेंटर परियोजनाओं पर सख्त नियम लागू हो सकते हैं या उनके विस्तार में देरी हो सकती है. इसका असर चिप निर्माता, सर्वर कंपनियों, डेटा सेंटर ऑपरेटर और बिजली आपूर्ति से जुड़ी कंपनियों पर पड़ सकता है.
तेजी के बाद मुनाफावसूली ने बढ़ाई गिरावट
अमेरिकी चुनाव के नतीजों के बाद 4 नवंबर को वॉल स्ट्रीट में जोरदार तेजी आई थी. डाउ जोंस शुरुआती कारोबार में 1,000 अंक से ज्यादा चढ़ा था और एसएंडपी 500 ने तीन महीनों की सबसे बड़ी एकदिनी बढ़त दर्ज की थी. लेकिन अगले ही कारोबारी सत्र में निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी. खासकर AI और चिप कंपनियों में तेजी से बिकवाली हुई, जिसका असर पूरे बाजार पर पड़ा.
एशियाई बाजारों में भी इसका असर दिखा. सेमीकंडक्टर शेयरों में कमजोरी के बीच जापान का निक्केई बेयर मार्केट के दायरे में पहुंच गया. उधर, कच्चे तेल की कीमतों में बिकवाली के बाद फिर तेजी आई और ब्रेंट क्रूड 99 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार करने लगा.
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