अमूमन धनतेरस के बाद दिवाली आती है, इस बार भी ऐसा ही होगा, लेकिन शेयर बाजार निवेशकों के लिए तो फिलहाल धनतेरस से पहले ही दिवाली आ गई है. जी हां, भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के पोर्टफोलियो में 7.95 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा जुड़ गए हैं. गुरुवार की सुबह निवेशकों की चांदी हो गई. कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट, विदेशी निवेशकों की दोबारा खरीदारी और अमेरिकी बाजारों की तेजी ने भारतीय शेयर बाजार में जोश भर दिया. बाजार खुलने के दो घंटे के भीतर निवेशकों की संपत्ति में करीब 8 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है.
महज कुछ घंटों के भीतर बंपर उछाल
गुरुवार को बाजार खुलते समय BSE सेंसेक्स की सभी कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 4,93,44,359 करोड़ रुपये था. सुबह 1:45 बजे तक यह बढ़कर 5,01,40,141 करोड़ रुपये हो गया. यानी कंपनियों के कुल बाजार मूल्य में 7.95 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा (₹7,95,782 Crore)की बढ़ोतरी हुई.
सुबह 12:45 बजे तक सेंसेक्स 1,700 अंक से ज्यादा चढ़कर 79,000 के पार पहुंच गया. वहीं, निफ्टी 50 ने 490 अंक से ज्यादा की बढ़त के साथ 24,450 के पार पहुंच गया. खास बात यह रही कि निफ्टी 4 सितंबर 2026 के बाद पहली बार 24,000 के पार निकला.
शेयर बाजार में तेजी की 3 बड़ी वजहें
1). अमेरिकी चुनाव के बाद कच्चे तेल में गिरावट
अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत से उम्मीद बढ़ी है कि वॉशिंगटन पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की दिशा में कदम उठा सकता है. इससे अमेरिका-ईरान संघर्ष के जल्द सुलझने और तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं घटने की संभावना बनी है.
पिछले कारोबारी सत्र में अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 8% से ज्यादा टूट गया था. गुरुवार को भी इसमें गिरावट जारी रही. ब्रेंट क्रूड 0.95% गिरकर 93.72 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड 1.48% गिरकर 86.82 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया.
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड में करीब 10% की गिरावट बाजार के लिए सबसे बड़ा सकारात्मक संकेत है. कच्चे तेल के ऊंचे दाम भारतीय अर्थव्यवस्था और कंपनियों की लागत पर दबाव डालते हैं. कीमतों में कमी से अर्थव्यवस्था और कॉर्पोरेट कमाई को राहत मिलने की उम्मीद है.
2). विदेशी निवेशकों की जोरदार खरीदारी
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय शेयर बाजार में लौटते दिख रहे हैं. बुधवार को उन्होंने 7,284.03 करोड़ रुपये के शेयरों की नेट खरीदारी की. 28 अक्टूबर 2025 के बाद ये उनकी सबसे बड़ी एक दिन की खरीदारी रही.
विदेशी निवेशक लगातार चार कारोबारी सत्रों से भारतीय शेयरों की नेट खरीदारी कर रहे हैं. नवंबर में अब तक उनका निवेश 17,000 करोड़ रुपये से ज्यादा रहा है. इससे पहले सितंबर और अक्टूबर में विदेशी निवेशकों ने करीब 90,000 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी.
3). तकनीकी संकेतकों में मजबूती
निफ्टी 50 गुरुवार को तेज बढ़त के साथ खुला और 24,378 के करीब पहुंचा. इसने 20, 50, 100 और 200 दिनों के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) को पार किया. इससे बाजार की तकनीकी स्थिति और तेजी की गति मजबूत होने के संकेत मिले हैं.
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के मुताबिक, निफ्टी के लिए 24,400 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस है. अगर इंडेक्स इस स्तर के ऊपर टिकता है, तो ये 24,600 की ओर बढ़ सकता है.
वहीं, 24,000 से 23,950 का दायरा तत्काल सपोर्ट माना जा रहा है. इसके नीचे गिरने पर 23,750 से 23,700 का स्तर अगला सपोर्ट हो सकता है.
पोनमुडी के मुताबिक, रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) करीब 73 पर है. ये मजबूत तेजी का संकेत देता है, लेकिन साथ ही बाजार के ओवरबॉट जोन में पहुंचने की ओर भी इशारा करता है.

शेयर बाजार का आगे का आउटलुक
विश्लेषकों के मुताबिक, आगामी केंद्रीय बजट में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स खत्म किए जाने की उम्मीद ने विदेशी निवेशकों के रुख को प्रभावित किया है.
डॉ विजयकुमार का मानना है कि बड़े शेयरों में शॉर्ट-कवरिंग जारी रह सकती है. इससे बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र की बड़ी कंपनियों के शेयरों में और तेजी आ सकती है. हालांकि, ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली का दबाव भी बन सकता है, क्योंकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) तेजी के दौरान बिकवाली करते दिख रहे हैं.
उन्होंने ये भी कहा कि अमेरिकी चुनाव के नतीजों पर बाजार की शुरुआती प्रतिक्रिया कमजोर पड़ने के बाद अमेरिका में लंबे राजनीतिक टकराव को लेकर चिंताएं फिर उभर सकती हैं.
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