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कच्चा तेल 97 डॉलर के पार, गैस पर भी असर, अमेरिका-ईरान टकराव से भारत में भी बढ़ी टेंशन

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 97 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं. होर्मुज जलडमरूमध्य में सप्लाई बाधित होने से गैस और ईंधन के दाम भी तेजी से बढ़ रहे हैं.

कच्चा तेल 97 डॉलर के पार, गैस पर भी असर, अमेरिका-ईरान टकराव से भारत में भी बढ़ी टेंशन
कच्‍चे तेल की कीमतें बढ़ीं
(NDTV File Photo)

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के कारण मध्यपूर्व एशिया (Middle East) में तनाव चरम पर पहुंच गया है. इस भू-राजनीतिक संकट का सीधा असर अब अंतरराष्ट्रीय एनर्जी मार्केट पर दिखने लगा है, जिससे कच्चे तेल और गैस के दाम तेजी से बढ़ने लगे हैं.

97 डॉलर के करीब पहुंचा ब्रेंट ऑयल

बुधवार को ट्रेडिंग के दौरान ब्रेंट ऑयल फ्यूचर्स (Brent Oil Futures) की कीमत एक समय बढ़कर 96.99 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. वैश्विक स्तर पर ऊर्जा उत्पादों की स्थिर सप्लाई को लेकर एक बार फिर चिंताएं गहराने लगी हैं. पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 1 सितंबर को भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की कीमत बढ़कर 95.28 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई है, जबकि अगस्त महीने के दौरान यह औसत कीमत 90.19 डॉलर प्रति बैरल थी.

होर्मुज जलडमरूमध्य से सप्लाई प्रभावित

ग्लोबल डेटा और एनालिटिक्स फर्म 'Kpler' की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के सबसे अहम चोकपॉइंट 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) के जरिए कच्चे तेल और गैस की सप्लाई बाधित हो रही है. Kpler ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जारी अपनी रिपोर्ट में बताया कि 31 अगस्त को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट आई है. उस दिन महज पांच जहाज ही वहां से गुजरे, जबकि सामान्य तौर पर यह संख्या अधिक रहती है.

होर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कथित हमलों की कोशिशों और उसके जवाब में अमेरिका द्वारा ईरान में ठिकानों पर की गई बमबारी के बाद से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भारी अस्थिरता पैदा हो गई है.

भारत में ऊर्जा उत्पादों पर असर

पश्चिम एशिया के इस संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य से एलएनजी (LNG) कार्गो की आवाजाही पर पड़े असर के कारण ग्लोबल एलएनजी की कीमतें संकट से पहले के स्तर की तुलना में लगभग दोगुनी हो गई हैं. इसका असर भारत में भी दिखने लगा है, जहां पिछले कुछ दिनों में तेल और गैस कंपनियों ने सीएनजी (CNG), कमर्शियल एलपीजी (LPG) और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में बढ़ोतरी की है.

इसके अलावा, Kpler के आंकड़ों के अनुसार अगस्त में भारत का कच्चा तेल आयात घटकर लगभग 4.5 Mbd रहने का अनुमान है, जो जून और जुलाई में 5 Mbd से अधिक के स्तर पर था. रूस से होने वाले आयात में भी गिरावट आई है, हालांकि वेनेजुएला से आयात बढ़कर 2020 के बाद के उच्चतम स्तर यानी 350 kbd तक पहुंचने की उम्मीद है.

Video: अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ा तनाव

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