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न सऊदी, न कुवैत, न UAE, न ईरान... भारत को इस देश ने सप्‍लाई की सबसे ज्‍यादा LPG

भारत अब अपनी एनर्जी सप्लाई को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए नए देशों से LPG खरीद रहा है. अमेरिका लगातार सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है, जबकि गल्फ कंट्रीज़ पर निर्भरता धीरे-धीरे कम की जा रही है.

न सऊदी, न कुवैत, न UAE, न ईरान... भारत को इस देश ने सप्‍लाई की सबसे ज्‍यादा LPG
अमेरिका से बढ़ती एलपीजी सप्लाई के साथ भारत अपनी एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत करने और कई देशों से आयात बढ़ाने की रणनीति पर तेजी से आगे बढ़ रहा है.
File Photo

भारत को जून में भी सबसे ज्यादा एलपीजी(LPG) अमेरिका से मिला. इससे साफ है कि भारत अब सिर्फ गल्फ कंट्रीज़ पर निर्भर नहीं रहना चाहता. पश्चिम एशिया में हाल के तनाव के बाद सरकार और ऑयल कंपनियां अलग-अलग देशों से एनर्जी खरीदने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही हैं. UAE भारत का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी(LPG) सप्लायर रहा. वहां से आयात 16.6% बढ़कर 1.57 लाख मीट्रिक टन पहुंच गया. मई में यह 1.34 लाख मीट्रिक टन था. वहीं, सऊदी अरब और कुवैत ने जून में भारत को 64-64 हजार मीट्रिक टन एलपीजी(LPG) की सप्लाई की.

जून में कितना हुआ आयात

कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केप्लर के मुताबिक, जून में भारत ने अमेरिका से 7.73 लाख मीट्रिक टन (773.78 TMT) एलपीजी(LPG) आयात किया. यह मई के मुकाबले 19.4% ज्यादा है. मई में यह आंकड़ा इससे कम था. जून में भारत का कुल एलपीजी(LPG) आयात भी बढ़ा. मई में भारत ने 11.55 लाख मीट्रिक टन (1,155 TMT) एलपीजी(LPG) खरीदा था, जो जून में बढ़कर 11.91 लाख मीट्रिक टन (1,191 TMT) हो गया. यानी कुल आयात में करीब 3% की बढ़ोतरी हुई.

भारत क्यों बदल रहा है अपनी रणनीति?

अमेरिका से बढ़ती खरीद भारत की बड़ी एनर्जी रणनीति का हिस्सा है. पश्चिम एशिया में संघर्ष के बाद भारत ने तय किया कि वह अपनी एनर्जी सप्लाई के लिए सिर्फ कुछ देशों पर निर्भर नहीं रहेगा. इसी वजह से सरकारी ऑयल रिफाइनरियों ने 2026 से अमेरिका से हर साल 22 लाख टन एलपीजी(LPG) खरीदने का लंबी अवधि का समझौता किया है. इससे भारत और अमेरिका के बीच एनर्जी पार्टनरशिप मजबूत होगी और खाड़ी देशों पर निर्भरता भी कम होगी.

उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, भारत ने अगस्त तक के लिए कच्चे तेल और एलपीजी(LPG) दोनों की पर्याप्त सप्लाई का इंतजाम कर लिया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर से खुलने के बाद गल्फ कंट्रीज़ से सप्लाई भी सामान्य होने लगी है. इससे घरेलू बाजार में सप्लाई को लेकर बनी चिंता काफी कम हो गई है.

LPG सप्लाई के लिए नया प्लान

संघर्ष शुरू होने से पहले भारत के करीब 90% एलपीजी(LPG) आयात का रास्ता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता था. यानी भारत की सप्लाई काफी हद तक खाड़ी क्षेत्र पर निर्भर थी. लेकिन सप्लाई में आई दिक्कतों के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने दूसरे देशों से भी खरीद बढ़ानी शुरू कर दी, ताकि भविष्य में किसी भी भू-राजनीतिक संकट का असर कम हो.

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बाद भी भारत अपनी यही रणनीति जारी रखेगा. गल्फ कंट्रीज़ आगे भी कच्चे तेल और एलपीजी(LPG) के बड़े सप्लायर बने रहेंगे, लेकिन अब भारत कई देशों से संतुलित तरीके से आयात करेगा. इससे देश की एनर्जी सप्लाई पहले से ज्यादा सुरक्षित और स्थिर रहेगी.

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