Us Iran War News: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है.अमेरिका ने रविवार 12 जुलाई की सुबह होर्मुज स्ट्रेट में एक जहाज पर हुए हमले के बाद ईरान पर हमला किया. इसके जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत, कतर और यूएई को निशाना बनाया. इसी बीच ईरान ने दावा किया है कि उसने होर्मुज स्ट्रेट को अगले आदेश तक बंद कर दिया है.होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के दावों ने कच्चे तेल की सप्लाई पर नए सिरे से खतरा पैदा कर दिया है, जिससे भारत में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं..क्या यह जंग भारत की एनर्जी सिक्योरिटी पर भारी पड़ेगा, या रूस समेत नए ऑप्शन की बदौलत भारत इस संकट को झेलने के लिए पूरी तरह तैयार है? आइए समझते हैं....
होर्मुज स्ट्रेट इतना अहम क्यों है?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री रूट में से एक है. दुनिया के करीब 20 फीसदी कारोबार वाला कच्चा तेल और नेचुरल गैस इसी रास्ते से गुजरता है. अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहता है तो दुनिया के कई देशों में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और पेट्रोल-डीजल के दाम पर पड़ सकता है.
भारत पर कितना असर पड़ सकता है?
भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. इसलिए दुनिया में तेल महंगा होने का असर भारत पर भी पड़ता है. अगर होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक बंद रहता है तो भारत के लिए तेल खरीदना महंगा हो सकता है. इससे पेट्रोल, डीजल, LPG और दूसरी चीजों की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है. महंगा तेल महंगाई, सरकार के खर्च और देश की आर्थिक ग्रोथ पर भी असर डाल सकता है.
इस बार भारत पहले से कितना ज्यादा तैयार?
इस बार स्थिति पहले जैसी नहीं है. पिछले कुछ महीनों में भारत ने तेल और गैस की खरीद को कई देशों में बांट दिया है. अब भारत करीब 40 देशों से कच्चा तेल खरीद रहा है. रूस, अमेरिका, वेनेजुएला, अफ्रीका, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों से भी लगातार सप्लाई ली जा रही है.

सरकार का कहना है कि अब करीब 70 प्रतिशत तेल ऐसे रास्तों से आता है जो पूरी तरह होर्मुज पर निर्भर नहीं हैं. यही वजह है कि किसी एक रास्ते में परेशानी आने पर भी सप्लाई पूरी तरह नहीं रुकती.
रूस बना भारत का सबसे बड़ा सप्लायर
जून में भारत ने रूस से रिकॉर्ड मात्रा में कच्चा तेल खरीदा. सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने जून में रूस से 4.5 अरब यूरो का कच्चा तेल खरीदा, जो पिछले महीने के मुकाबले 34 प्रतिशत ज्यादा था. रूस से भारत का कुल जीवाश्म ईंधन आयात 5.5 अरब यूरो रहा. इसके साथ ही भारत चीन के बाद रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश बना.जून में रूस से भारत का कच्चे तेल का आयात करीब 27 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया, जो भारत के कुल आयात का आधे से ज्यादा हिस्सा है.
होर्मुज का संकट के दौरान दुनिया भर में बढ़े दाम, भारत पर असर कम
28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के दौरान भी होर्मुज स्ट्रेट में कई हफ्तों तक भारी तनाव रहा था. उस समय दुनिया में कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चली गई थी. कई देशों में पेट्रोल और डीजल के दाम तेजी से बढ़े. पाकिस्तान में पेट्रोल 64 प्रतिशत तक महंगा हुआ, ब्रिटेन में 21 प्रतिशत और यूएई में डीजल 85 प्रतिशत तक महंगा हो गया.
भारत में भी असर पड़ा, लेकिन बाकी देशों के मुकाबले काफी कम. देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 94.72 रुपये से बढ़कर 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.62 रुपये से बढ़कर 95.20 रुपये प्रति लीटर पहुंचा.
आम लोगों को राहत,सरकार ने खुद झेला हजारों करोड़ का नुकसान
जब दुनिया में तेल महंगा हो रहा था तब भारत सरकार और सरकारी तेल कंपनियों ने कुछ समय तक कीमतें नहीं बढ़ाईं. युद्ध शुरू होने के बाद करीब 76 दिनों तक पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाए गए. इस दौरान सरकारी तेल कंपनियां हर दिन करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही थीं.आखिरकार 15 मई से कीमतों में बढ़ोतरी शुरू हुई और अगले 10 दिनों में चार बार दाम बढ़ाए गए. सबसे बड़ी बढ़ोतरी 25 मई को हुई. कुल मिलाकर पेट्रोल और डीजल करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर महंगे हुए. इसी दौरान सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में भी 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की ताकि लोगों पर ज्यादा बोझ न पड़े.
तेल कंपनियों को कितना नुकसान हुआ?
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, अप्रैल से जून 2026 के बीच पेट्रोल, डीजल और LPG को लागत से कम कीमत पर बेचने की वजह से सरकारी तेल कंपनियों को 74,781 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. अगर पिछले वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही और चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही को जोड़ दें तो कुल अंडर रिकवरी करीब 2.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई.
संकट में भी गैस की कमी नहीं, LPG सप्लाई चेन हुआ मजबूत
सरकार का कहना है कि पूरे संकट के दौरान देश के 33 करोड़ से ज्यादा LPG उपभोक्ताओं को गैस की सप्लाई नहीं रुकी. इसके लिए अर्जेंटीना, अमेरिका, अल्जीरिया और जापान जैसे देशों से भी LPG मंगाई गई. विदेश मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय, शिपिंग कंपनियों और तेल कंपनियों ने मिलकर लगातार सप्लाई बनाए रखी. इसी वजह से देश में कहीं भी बड़ी कमी नहीं आई.
सरकार ने घरेलू LPG उत्पादन भी बढ़ाया. उत्पादन क्षमता 35 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन से बढ़ाकर 54 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन कर दी गई, जिससे संकट के समय भी गैस की सप्लाई सामान्य बनी रही.
आगे क्या है सरकार की तैयारी?
सरकार अब केवल तेल खरीदने वाले देशों को ही नहीं बढ़ा रही, बल्कि नए शिपिंग रूट पर भी काम कर रही है ताकि भविष्य में अगर होर्मुज में फिर संकट आए तो सप्लाई प्रभावित न हो. भारत अपनी रिफाइनिंग क्षमता भी लगातार बढ़ा रहा है. देश अब दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनिंग हब बन चुका है. पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक तेल भंडार बढ़ाए गए हैं, LPG टर्मिनल और पाइपलाइन नेटवर्क का भी तेजी से विस्तार किया गया है.
आयात पर निर्भरता कम करने की भी फोकस
सरकार का फोकस अब विदेशी तेल पर निर्भरता कम करने पर भी है. पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का काम तेजी से बढ़ाया जा रहा है. केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का कहना है कि इससे कच्चे तेल का आयात कम होगा, किसानों को फायदा मिलेगा और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी.
वहीं केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि सरकार डीजल में 15 प्रतिशत तक आइसोब्यूटेनॉल मिलाने की तैयारी कर रही है. अगर यह योजना सफल होती है तो डीजल के लिए भी विदेशी तेल पर निर्भरता कम हो सकती है.
होर्मुज के हालात पर टिकी दुनिया की नजर
अगर होर्मुज स्ट्रेट ज्यादा समय तक बंद रहता है तो दुनिया में तेल की कीमतें फिर बढ़ सकती हैं और भारत के लिए तेल खरीदना महंगा हो सकता है. लेकिन अगर आने वाले दिनों में हालात सामान्य हो जाते हैं और जहाजों की आवाजाही फिर शुरू हो जाती है तो सप्लाई सुधर सकती है और कीमतों पर दबाव भी कम हो सकता है.
फिलहाल सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि भारत ने पिछले कुछ महीनों में अपने आयात के स्रोत बढ़ा दिए हैं, नए देशों से तेल खरीदना शुरू किया है और सप्लाई का मजबूत नेटवर्क तैयार किया है. यही वजह है कि अगर होर्मुज में फिर लंबा संकट आता भी है, तो भारत पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा तैयार नजर आता है
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