विज्ञापन

Tata Trusts vs Tata Sons में शरद पवार की एंट्री, जमशेदजी टाटा की विरासत का किया जिक्र, दी ये सलाह  

Tata Sons और Tata Trusts के विवाद पर शरद पवार ने बातचीत और तय प्रक्रिया से समाधान की बात कही. उन्होंने Tata Trusts की भूमिका और अधिकारों के सम्मान पर जोर दिया.

Tata Trusts vs Tata Sons में शरद पवार की एंट्री, जमशेदजी टाटा की विरासत का किया जिक्र, दी ये सलाह  
टाटा ग्रुप में चल रहे विवाद के बीच शरद पवार ने एक्‍स पोस्‍ट में एक सलाह दी है.
Source: NDTV File Photo

Tata Sons और Tata Trusts के बीच बढ़ते विवाद के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SP) प्रमुख शरद पवार ने 'टाटा समूह' की विरासत, फाउंडर जमशेदजी टाटा की सोच और परोपकारी उद्देश्‍यों की चर्चा की है. उन्‍होंने मामले को बातचीत और तय प्रक्रिया के जरिए सुलझाने की बात कही है. पवार ने कहा कि टाटा समूह के नेतृत्व से जुड़े सवालों का समाधान विवाद के बजाय संवाद, तय प्रक्रिया और आट्रिकल्‍स ऑफ एसोसिएशन के मुताबिक होना चाहिए.

शरद पवार ने मंगलवार को X पर एक पत्र शेयर किया है. इसमें उन्‍होंने टाटा ग्रुप की स्वामित्व संरचना और टाटा ट्रस्‍ट की भूमिका का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि टाटा ग्रुप का स्‍ट्रक्‍चर परोपकार की सोच के साथ तैयार किया गया था और टाटा ट्रस्‍ट के संस्थागत अधिकारों का स्थापित गवर्नेंस व्यवस्था के तहत सम्मान किया जाना चाहिए.

टाटा संस में टाटा ट्रस्‍ट की 66% हिस्सेदारी के पीछे की सोच 

पवार ने कहा कि Tata Trusts के पास Tata Sons की करीब 66% हिस्सेदारी है. उनके मुताबिक ये व्यवस्था जमशेदजी टाटा की उस सोच को दर्शाती है कि कारोबार से पैदा हुई संपत्ति आखिरकार समाज के काम आनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि टाटा समूह की विरासत इस विचार पर आधारित है कि कारोबार का उद्देश्य समाज की सेवा भी होना चाहिए. ऐसे में टाटा ट्रस्ट्स की संस्थागत भूमिका और अधिकारों को समूह की स्थापित गवर्नेंस व्यवस्था के तहत बनाए रखना जरूरी है.

टाटा समूह की विरासत का किया जिक्र

शरद पवार ने टाटा समूह से जुड़े कई सामाजिक और शैक्षणिक संस्थानों का भी उल्लेख किया. इनमें टाटा मेमोरियल अस्‍पताल (Tata Memorial Hospital), टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (Tata Institute of Fundamental Research) और टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस (Tata Institute of Social Sciences) शामिल हैं.

पवार के मुताबिक इन संस्थानों को लंबे समय से टाटा ट्रस्‍ट का समर्थन मिलता रहा है. उनका कहना है कि अगर टाटा ट्रस्‍ट की भूमिका कमजोर होती है तो उन संस्थानों पर भी असर पड़ सकता है, जो लंबे समय से ट्रस्ट्स के सहयोग पर निर्भर रहे हैं.

विवाद को बातचीत से सुलझाने की अपील

पवार ने टाटा समूह के नेतृत्व से जुड़े मौजूदा सवालों को 'विवाद के बजाय बातचीत और तय प्रक्रिया' से सुलझाने की जरूरत बताई.

उन्होंने कहा कि Tata Trusts की संस्थागत भूमिका और अधिकारों का स्थापित गवर्नेंस ढांचे के तहत सम्मान होना चाहिए. पवार के बयान का जोर टाटा समूह की उस ट्रस्ट आधारित विरासत को बनाए रखने पर है, जिसके तहत कारोबार और समाज के हित को आपस में जोड़ा गया है.

टाटा समूह की मौजूदा नेतृत्व संबंधी खींचतान के बीच पवार का बयान ऐसे समय आया है, जब समूह के टाटा संस और टाटा ट्रस्‍ट के बीच अधिकारों और गवर्नेंस से जुड़े सवाल चर्चा में हैं.

वीडियो: टाटा Vs टाटा विवाद पर स्‍पेशल कार्यक्रम  

शरद पवार ने पोस्‍ट में क्‍या लिखा- शब्‍दश: पढ़ें 

टाटा की विरासत बचाना, समय की जरूरत 

श्रीजमशेदजी टाटा की परिकल्पना, जिसे सर दोराबजी और सर रतन टाटा ने आगे बढ़ाया, यह थी कि उद्यम द्वारा सृजित संपदा समाज को लौटनी चाहिए. उनकी हिस्सेदारियां ट्रस्टों में ठीक इसी उद्देश्य से रखी गईं, ताकि कोई एक व्यक्ति समूह का मालिक न हो और कारोबार में बहुसंख्यक हिस्सेदार ऐसे ट्रस्ट हों, जो परोपकारी उद्देश्यों के लिए समर्पित हैं. इसलिए, टाटा संस की स्वामित्व संरचना परोपकार को अपनाती है. ऑपरेटिंग कंपनियां टाटा संस के अधीन हैं और सर रतन टाटा ट्रस्ट तथा सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट, संबद्ध ट्रस्टों के साथ मिलकर टाटा संस के लगभग 66% के मालिक हैं. यह संरचना जानबूझकर बनाई गई है, महज संयोग नहीं है. इसलिए, अच्छा कारोबार होता है और उसके जरिए मिलने वाला लाभांश जनहित के कार्यों को वित्तपोषित करता है. ट्रस्टों की बहुसंख्यक हिस्सेदारी का लाभांश सीधे स्वास्थ्य, शिक्षा, अनुसंधान और ग्रामीण आजीविका में जाता है.

महाराष्ट्र इस विरासत के केंद्र में होने के लिए सौभाग्यशाली है. टाटा मेमोरियल अस्पताल, TIFR, TISS और NCPA, सभी मुंबई में हैं और ट्रस्ट द्वारा स्थापित राष्ट्रीय प्रतिष्ठा वाली संस्थाएं हैं. कानूनी रूप से भी राज्य को इन प्रतिष्ठित परोपकारी ट्रस्टों की मेजबानी पर गर्व है. ट्रस्टों को कमजोर करना उन संस्थाओं को कमजोर करता है, जिन पर देश और राज्य के लोग निर्भर हैं. एक सदी से अधिक समय से ट्रस्ट दीर्घकालिक मालिक रहे हैं, जिन्होंने अल्पकालिक रिटर्न के बजाय मूल्यों और प्रतिष्ठा को प्राथमिकता दी है. यही धैर्य है, जिसके कारण टाटा नाम पर लोगों का भरोसा है.

17 सितंबर 2026 को टाटा संस बोर्ड ने फरवरी 2027 से पांच और वर्षों के लिए श्री एन. चंद्रशेखरन को कार्यकारी चेयरमैन के रूप में फिर से नियुक्त करने के पक्ष में 4-1 से मतदान किया और टाटा संस को सूचीबद्ध करने की दिशा में कदमों को भी मंजूरी दी. टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन श्री नोएल टाटा ने दोनों के खिलाफ वोट दिया; ट्रस्टों के दूसरे नामित निदेशक श्री वेणु श्रीनिवासन ने पक्ष में वोट दिया. टाटा ट्रस्ट्स, जिनके पास टाटा संस की लगभग 66% हिस्सेदारी है, का मानना है कि यह प्रस्ताव शुरुआत से ही अमान्य है, क्योंकि एसोसिएशन के अनुच्छेदों के अनुसार चेयरमैन की नियुक्ति का समर्थन करने के लिए उपस्थित ट्रस्ट-नामित निदेशकों का बहुमत जरूरी है और दो नामित निदेशकों की मौजूदगी में बहुमत का अर्थ दोनों का समर्थन होगा.

टाटा समूह महाराष्ट्र में जड़ें रखने वाली एक राष्ट्रीय संस्था है और इसके परोपकारी स्वामित्व की रक्षा की जानी चाहिए. शेयरधारकों द्वारा अपनाए गए अनुच्छेद, जो चेयरमैन की नियुक्ति सहित प्रमुख निर्णयों पर ट्रस्ट द्वारा नामित निदेशकों को सकारात्मक मताधिकार देते हैं, उनका सम्मान किया जाना चाहिए. नेतृत्व से जुड़े निर्णय विवादों के बजाय संवाद और उचित प्रक्रिया के माध्यम से बहुसंख्यक मालिक टाटा ट्रस्ट्स की सहमति से तय होने चाहिए. माननीय सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी शेयरधारकों की रक्षा के लिए ट्रस्टों का प्रतिनिधित्व करने वाले नामित निदेशकों के सकारात्मक अधिकारों को बरकरार रखा था.

कॉरपोरेट गवर्नेंस के नजरिए से भी, किसी कंपनी को उसके अनुच्छेद संचालित करते हैं. समूह के अनुच्छेद बहुसंख्यक मालिक के नामित निदेशकों को चेयरमैन चुनने में निर्णायक आवाज देते हैं और उस सहमति का सम्मान किया जाना चाहिए, क्योंकि यही टाटा समूह की मूल संरचना है. हमें उस समूह की रक्षा करनी चाहिए, जिसने खुद को भारत के विकास के लिए समर्पित किया है.

ये भी पढ़ें: 12वीं तक पढ़ाई, कपड़ा कारोबारी का बेटा, अब मुंबई के जुहू में खरीद लिया 711 करोड़ का 7 मंजिला टावर

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Tata Trusts Vs Tata Sons Power Structure, Tata Trusts Vs Tata Sons, Tata Trust Chairman Noel Tata, N Chandrasekaran Chairman, Sharad Pawar
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com