टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की बोर्ड मीटिंग मंगलवार को शुरू हुई, जहां कंपनी के नेतृत्व और कई घाटे में चल रही ग्रुप कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन पर खास फोकस रहा. यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब समूह के भीतर कुछ नई कंपनियों के कमजोर प्रदर्शन और भविष्य की रणनीति को लेकर चर्चा तेज हो गई है. मुंबई स्थित बॉम्बे हाउस में बैठक से पहले टाटा संस बोर्ड के सदस्य पहुंचते हुए देखे गए.
इस बोर्ड मीटिंग का मेन फोकस टाटा समूह की उन कंपनियों पर रहने की संभावना है जो लगातार नुकसान में चल रही हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन कंपनियों के वर्तमान प्रदर्शन, ऑपरेशन की स्थिति और आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हो सकती है. साथ ही अलग-अलग कंपनियां अपनी मौजूदा स्थिति और भविष्य की रोडमैप को लेकर प्रेजेंटेशन भी दे सकती हैं. यह मीटिंग टाटा समूह के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
पिछले कुछ समय से टाटा समूह के अंदर कुछ नई कंपनियों के प्रदर्शन को लेकर असहमति और रणनीतिक चर्चाएं तेज हुई हैं. इन कंपनियों में निवेश, विस्तार और भविष्य की दिशा को लेकर विचार-विमर्श हो रहा है. इसी वजह से यह बोर्ड मीटिंग सिर्फ सामान्य समीक्षा नहीं बल्कि भविष्य के बड़े फैसलों की नींव भी बन सकती है.
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बोर्ड मीटिंग से पहले टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा की वीकेंड में मुलाकात हुई थी. नोएल टाटा, टाटा संस बोर्ड में नॉमिनी डायरेक्टर भी हैं. इस बैठक में समूह कंपनियों के प्रदर्शन और रणनीति पर चर्चा हुई थी.
यह बोर्ड मीटिंग ऐसे समय में हो रही है जब हाल ही में महाराष्ट्र स्टेट चैरिटी कमिश्नर ने टाटा ट्रस्ट्स को एक अहम बोर्ड बैठक टालने का निर्देश दिया था. यह आदेश कुछ शिकायतों के बाद आया था, जिनमें सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के ट्रस्टी बोर्ड की संरचना में कथित नियम उल्लंघन की बात कही गई थी.
टाटा ट्रस्ट्स ने इस आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह आदेश Ex Parte यानी एकतरफा प्रकृति का है और यह केवल SRTT पर लागू होता है. ट्रस्ट ने यह भी कहा कि चैरिटी कमिश्नर द्वारा दिए गए निर्देशों की जांच की जा रही है. इससे साफ है कि ट्रस्ट इस मामले को कानूनी और प्रशासनिक रूप से गंभीरता से देख रहा है.
सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) और सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) की बैठकें पहले 8 मई को तय थीं, लेकिन कानूनी चुनौतियों और गवर्नेंस से जुड़े विचार-विमर्श के कारण उन्हें 16 मई तक टाल दिया गया था. इन बैठकों में टाटा संस से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद थी.
रिपोर्ट्स के अनुसार, इन बैठकों में टाटा संस की संभावित लिस्टिंग (शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना), चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति और कुछ नॉमिनी डायरेक्टर्स की भूमिका पर भी चर्चा हो सकती है. अगर टाटा संस की लिस्टिंग होती है, तो यह भारतीय कॉर्पोरेट जगत के लिए बड़ा कदम माना जाएगा.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स के वाइस-चेयरमैन विजय सिंह और वेनु श्रीनिवासन की टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर टिप्पणियों ने ट्रस्ट्स के भीतर गवर्नेंस और बोर्ड प्रतिनिधित्व पर व्यापक चर्चा शुरू कर दी. इससे यह स्पष्ट हुआ कि समूह के अंदर बोर्ड संरचना और निर्णय प्रक्रिया को लेकर गंभीर विचार चल रहा है.
SRTT बोर्ड संरचना पर उठे सवाल
शिकायत के अनुसार, Sir Ratan Tata Trust (SRTT) में इस समय छह ट्रस्टी हैं. इनमें जिमी नवल टाटा, जहांगीर एचसी जहांगीर और नोएल नवल टाटा आजीवन ट्रस्टी हैं. ये तीनों मिलकर बोर्ड की कुल ताकत का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं. इसी बोर्ड संरचना को लेकर सवाल उठाए गए हैं और यही मुद्दा कानूनी बहस का कारण बना है.
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