सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) ने सोमवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा दीं और फिर मंगलवार को CNG के दाम भी बढ़ गए हैं. तेल-गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का व्यापक असर ट्रांसपोर्टेशन समेत काफी कुछ चीजों पर पड़ रहा है और ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि आम आदमी के घर का बजट बिगड़ सकता है. सोमवार को पेट्रोल के दाम 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल के दाम 2.71 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए गए. वहीं मंगलवार को सीएनजी के दाम 2 रुपये तक बढ़ गए. पिछले कुछ दिनों में ये चौथी बार है जब ईंधन की कीमतों में इजाफा हुआ है. इसका सीधा असर सिर्फ वाहन चलाने वालों पर नहीं, बल्कि हर आम इंसान की जेब पर पड़ सकता है.
ट्रांसपोर्ट और महंगाई पर बढ़ेगा दबाव
डीजल की कीमत बढ़ने का सबसे बड़ा असर ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर पड़ता है. देश में ज्यादातर ट्रक, बसें और मालवाहक वाहन डीजल से चलते हैं. जब डीजल महंगा होता है तो सामान एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने की लागत बढ़ जाती है. ट्रांसपोर्ट कंपनियां यह अतिरिक्त खर्च ग्राहकों पर डालती हैं, जिससे महंगाई बढ़ सकती है.
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ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन ट्रकों का भाड़ा बढ़ाने की तैयारी में है. संघ की संयुक्त बैठक में इसको लेकर फैसला लिया जाएगा. लखनऊ में एसोसिएशन के अध्यक्ष हरप्रीत सिंह भाटिया ने कहा कि हम ट्रांसपोटर्स ने 7 साल पहले ट्रकों का भाड़ा 15 फीसदी बढ़ाया था, उसके बाद 7 साल में डीजल, टोल, टायर-ट्यूब समेत काफी कुछ के दाम बढ़ते रहे, ऐसे में फैसला तो लेना होगा. ट्रक एंड ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसएशन के अध्यक्ष ज्ञान प्रकाश का भी यही मानना है. उन्होंने भी कहा कि संयुक्त बैठक में इसपर फैसला लिया जाएगा. जाहिर है कि ट्रकों का भाड़ा बढ़ने से एक बार फिर खाद्य वस्तुओं, फल-सब्जियों और अन्य सामानों के दाम बढ़ेंगे.

सब्जियां और किराना हो सकते हैं महंगे
फल, सब्जियां और ताजा खाद्य पदार्थ रातभर ट्रकों से बाजारों तक पहुंचते हैं. डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ेगा, जिससे टमाटर, आलू, प्याज, हरी सब्जियां और फलों के दाम बढ़ सकते हैं. इसके अलावा चावल, आटा, तेल, चीनी, चाय और पैक्ड स्नैक्स जैसे रोजमर्रा के सामान भी महंगे हो सकते हैं क्योंकि इनकी सप्लाई चेन भी डीजल आधारित होती है.
दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स पर असर
दूध उद्योग में ईंधन की अहम भूमिका होती है. गांवों से दूध इकट्ठा करने वाली गाड़ियां, कोल्ड स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट सिस्टम सब ईंधन पर निर्भर हैं. अगर डीजल महंगा होता है, तो कुछ समय बाद दूध, दही, पनीर, मक्खन और चीज जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स की कीमतें भी बढ़ सकती हैं.
FMCG कंपनियों पर बढ़ेगा बोझ
FMCG यानी रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजें बनाने वाली कंपनियों पर भी इसका असर पड़ेगा. साबुन, शैंपू, बिस्किट, तेल, पैकेज्ड फूड और अन्य सामान की डिलीवरी और पैकेजिंग महंगी हो सकती है. हिंदुस्तान यूनिलीवर और डाबर जैसी कंपनियों ने पिछले दिनों कीमतें बढ़ाई भी हैं, ज कि कई कंपनियां आने वाले दिनों में कीमतें बढ़ा सकती हैं. रिपोर्ट्स में कहा गया है कि कंपनियां पैकेट का साइज भी छोटा कर सकती हैं, जबकि कीमत वही रख सकती हैं.
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ओला-उबर में सफर, बाहर खाना हो सकता है महंगा
अगर आप ओला-उबर से आते-जाते हैं या अक्सर बाहर खाना खाते हैं या ऑनलाइन फूड ऑर्डर करते हैं, तो आपकी जेब पर भी असर पड़ सकता है. डिलीवरी कंपनियां ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ने पर डिलीवरी फीस, प्लेटफॉर्म चार्ज या फ्री डिलीवरी की न्यूनतम राशि बढ़ा सकती हैं. इससे रेस्तरां, ढाबे और फूड ऐप्स का इस्तेमाल महंगा हो सकता है.
करीब 15 साल से कैब चला रहे रमेश कुमार ने NDTV से कहा कि जब 45 रुपये थी CNG, तब भी इतना ही किराया था, अब लगभग दोगुनी हो गई है, फिर भी किराया वही है. उनका मानना है कि जिस हिसाब से CNG के दाम बढ़े हैं, किराया भी बढ़ना चाहिए. पिछले दिनों गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन ने 5 घंटे की हड़ताल की थी. स्विगी डिलीवरी वर्कर मनोज का कहना था कि अगर हम 100 रुपये का तेल डलवाकर 100 रुपये का ही काम करेंगे, तो बचाएंगे क्या? तेल के दाम बढ़ने से हमारी गाड़ियों का एवरेज तो नहीं बढ़ जाएगा ना?
GIPSWU की अध्यक्ष सीमा सिंह ने सरकार और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से मांग की है कि वर्कर्स के लिए कम से कम 20 रुपये प्रति किलोमीटर का न्यूनतम सर्विस रेट तय किया जाए. सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और श्रम कानून विशेषज्ञ जिया अली कबीर ने इस मांग को जायज ठहराया था.
हवाई यात्रा पर भी असर
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) भी महंगा हो सकता है. इससे एयरलाइंस की लागत बढ़ेगी और टिकट के दाम बढ़ सकते हैं. घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का किराया बढ़ने से यात्रियों की संख्या पर असर पड़ सकता है.
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ऑटो सेक्टर को दोहरा झटका
पेट्रोल-डीजल महंगा होने से वाहन चलाने का खर्च बढ़ेगा. इससे लोग नई बाइक और कार खरीदने में सोच-समझकर फैसला ले सकते हैं. खासकर एंट्री-लेवल बाइक और छोटी कारों की मांग पर असर पड़ सकता है. साथ ही कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से वाहन निर्माण भी महंगा हो सकता है.
खेती-किसानी पर बढ़ेगा बोझ
भारत में खेती के लिए ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, सिंचाई पंप और ग्रामीण ट्रांसपोर्ट में डीजल का व्यापक इस्तेमाल होता है. डीजल महंगा होने से किसानों की लागत बढ़ेगी. इससे फसलों की खेती, सिंचाई और मंडियों तक फसल पहुंचाने का खर्च बढ़ेगा, जो आगे चलकर खाद्य महंगाई को और बढ़ा सकता है.
आम आदमी की जेब पर सीधा असर
पेट्रोल-डीजल में करीब 7.5 रुपये की बढ़ोतरी सिर्फ वाहन चालकों की समस्या नहीं है. इसका असर सब्जियों, दूध, किराना, हवाई यात्रा, ऑनलाइन डिलीवरी, खेती और रोजमर्रा की चीजों पर दिख सकता है. यानी अगर ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में आम लोगों की रोजमर्रा की चीज़ें और ज्यादा महंगी हो सकती है.
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