अगर आप बिना किसी रिस्क के अपना पैसा सुरक्षित तरीके से बढ़ाना चाहते हैं, तो सरकारी स्कीम्स सबसे बेहतरीन ऑप्शन हैं. लेकिन अक्सर लोग इस उलझन में रहते हैं कि पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF), सीनियर सिटीजन्स सेविंग्स स्कीम (SCSS) और सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) में से अपना पैसा कहां लगाएं? लोगों के बीच सबसे बड़ा कन्फ्यूजन यह होता है कि PPF, SCSS और सुकन्या समृद्धि (SSY) में से कौन सी स्कीम आपके लिए बेस्ट है?
इन तीनों ही स्कीम्स में सरकार की 100% गारंटी मिलती है और तगड़ा ब्याज भी मिलता है,लेकिन सिर्फ ज्यादा ब्याज दर देखकर पैसा लगाना सही नहीं है. तीनों ही सरकारी स्कीम्स हैं, लेकिन तीनों के फायदे और मकसद बिल्कुल अलग हैं. इन तीनों योजनाओं को अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से डिजाइन किया गया है.
- पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF): अगर आपका गोल बिना रिस्क लंबे समय में एक बड़ा और टैक्स-फ्री फंड तैयार करना है.
- सीनियर सिटीजन्स सेविंग्स स्कीम (SCSS): अगर आप सीनियर सिटीजन हैं और रिटायरमेंट के बाद सुरक्षित रेगुलर इनकम चाहते हैं.
- सुकन्या समृद्धि योजना (SSY): अगर आप अपनी बेटी की पढ़ाई और शादी के भविष्य को सुरक्षित करना चाहते हैं.
अपनी उम्र, फाइनेंशियल गोल और पैसों की जरूरत के हिसाब से सही स्कीम चुनना ही समझदारी है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आपकी जेब और जरूरत के हिसाब से कौन सा ऑप्शन सबसे सही रहेगा...
किस स्कीम में कितना मिल रहा है ब्याज?
अगस्त 2026 में सरकार इन तीनों बचत योजनाओं पर आकर्षक ब्याज दरें दे रही है...
- PPF : इसमें आपको 7.1% का सालाना ब्याज मिल रहा है, जो लंबे समय में टैक्स-फ्री फंड बनाने के लिए काफी अच्छा माना जाता है.
- SCSS: वरिष्ठ नागरिकों को इस योजना के तहत 8.2% की दर से सालाना ब्याज दिया जा रहा है.
- SSY : बेटियों के सुरक्षित भविष्य के लिए चलाई जा रही इस स्कीम पर भी सरकार 8.2% का शानदार सालाना ब्याज दे रही है.
PPF: लंबे समय में बड़ा फंड बनाने का सबसे सुरक्षित तरीका
पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) उन लोगों के लिए बेस्ट है, जो बिना किसी रिस्क के लंबे समय तक थोड़ा-थोड़ा पैसा जमा करके बड़ा फंड बनाना चाहते हैं.PPF का लॉक-इन पीरियड 15 साल का होता है. इसके बाद आप इसे 5-5 साल के ब्लॉक में आगे बढ़ा सकते हैं. यानी यह तुरंत के बजाय लंबे समय जैसे- रिटायरमेंट के लक्ष्यों के लिए ज्यादा फायदेमंद है.आप इसमें एक वित्तीय वर्ष में कम से कम ₹500 और अधिकतम ₹1.5 लाख जमा कर सकते हैं.इसमें ब्याज पर भी कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है, जिससे लंबे समय में आपका पैसा तेजी से बढ़ता है.जरूरत पड़ने पर नियमों के तहत इसमें इमरजेंसी लोन लेने और बीच में कुछ पैसे निकालने यानी आंशिक निकासी की सुविधा भी मिलती है.
PPF में टैक्स का क्या फायदा है?
PPF को EEE (Exempt-Exempt-Exempt) कैटेगरी में रखा गया है, जिसका मतलब है कि इसमें निवेश की गई राशि पर इनकम टैक्स की धारा 80C के तहत छूट मिलती है, हर साल मिलने वाले ब्याज पर कोई टैक्स नहीं लगता, और 15 साल बाद मिलने वाली मैच्योरिटी की पूरी रकम भी 100% टैक्स-फ्री होती है; यही वजह है कि लंबे समय की बचत और रिटायरमेंट फंड के लिए PPF सबसे भरोसेमंद विकल्प माना जाता है.
SCSS: वरिष्ठ नागरिकों के लिए नियमित आय का सबसे भरोसेमंद जरिया
सीनियर सिटीजन्स सेविंग्स स्कीम (SCSS) का मकसद PPF से बिल्कुल अलग है, इसे खासतौर पर बुजुर्गों की रिटायरमेंट के बाद की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है. सामान्य तौर पर 60 साल या उससे अधिक उम्र के लोग इसमें निवेश कर सकते हैं. इस योजना की लॉक-इन अवधि 5 साल होती है, जिसे बाद में 3 साल के लिए और बढ़ाया जा सकता है. इसमें आप कम से कम ₹1,000 और अधिकतम ₹30 लाख तक जमा कर सकते हैं. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें जमा रकम पर हर 3 महीने (तिमाही) में ब्याज का भुगतान किया जाता है, जिससे रिटायरमेंट के बाद हर महीने के खर्चों के लिए एक तय और नियमित आय मिलती रहती है.
SCSS में जमा की गई राशि पर इनकम टैक्स की धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट मिलती है. हालांकि, PPF की तरह इसका ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री नहीं होता. इससे मिलने वाले ब्याज पर आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है. इसलिए जिन वरिष्ठ नागरिकों को रिटायरमेंट के बाद सेफ और रेगुलर इनकम चाहिए, उनके लिए SCSS एक बेहतरीन ऑप्शन है.
SSY: बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सबसे बेस्ट स्कीम
सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) खासतौर पर बेटियों की पढ़ाई और उनके सुरक्षित भविष्य के लिए बनाई गई है. 10 साल से कम उम्र की बेटी के लिए माता-पिता या अभिभावक यह खाता खोल सकते हैं. इसमें आप एक साल में कम से कम ₹250 और अधिकतम ₹1.5 लाख जमा कर सकते हैं. यह खाता 21 साल में मैच्योर होता है और इसमें मिलने वाले ब्याज पर सालाना चक्रवृद्धि यानी कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है, जिससे लंबे समय में एक बड़ा फंड तैयार हो जाता है.
क्या पढ़ाई के लिए निकाल सकते हैं पैसे?
बेटी की उच्च शिक्षा (Higher Education) के लिए नियमों के तहत 18 साल की उम्र के बाद खाते से आंशिक निकासी (Partial Withdrawal) की सुविधा मिलती है. इसके अलावा, टैक्स के मामले में SSY को भी EEE (Exempt-Exempt-Exempt) कैटेगरी का दर्जा हासिल है. यानी इसमें जमा की जाने वाली राशि, हर साल मिलने वाला ब्याज और 21 साल बाद मिलने वाली पूरी मैच्योरिटी रकम तीनों पूरी तरह से 100% टैक्स-फ्री होती हैं.

निवेश से पहले इन बातों का रखें ध्यान
किसी भी स्कीम में निवेश करने से पहले ब्याज दरें को कंपेयर करनी सही है.लेकिन निवेश का फैसला केवल इसी आधार पर नहीं करना चाहिए.इन योजनाओं में बाजार से सीधे जुड़ा रिस्क नहीं होता . फिर भी सही ऑप्शन चनने के लिए योजना की समय अवधि (Lock-in Period), जरूरत पड़ने पर पैसा निकालने के नियम (Withdrawal Rules), आपकी पात्रता (Eligibility) और मिलने वाली टैक्स बेनिफिट (Tax Benefits) को भी अच्छे से समझना बेहद जरूरी है.
एक और जरूरी बात यह है कि इन योजनाओं की ब्याज दरें और नियम समय-समय पर सरकार बदल सकती है. इसलिए निवेश का अंतिम फैसला लेने से पहले संबंधित सरकारी योजना की लेटेस्ट अपडेट और लागू नियमों के बारे में जान लेना बेहतर रहेगा.
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