दिल्ली के रामलीला मैदान और जंतर-मंतर पर लंबे समय से चल रहे प्रदर्शनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दखल दिया है. कोर्ट ने दिल्ली के व्यापारिक संगठनों की याचिका पर नोटिस जारी किया है. व्यापारियों के संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि विरोध का अधिकार आजीविका के अधिकार की कीमत पर नहीं हो सकता.
CAIT के महासचिव और सांसद प्रवीण खंडेलवाल के मुताबिक, याचिका किराना कमेटी, दिल्ली आयरन एंड हार्डवेयर मर्चेंट्स एसोसिएशन और अन्य व्यापारिक संगठनों ने दायर की है. याचिका में प्रमुख कारोबारी इलाकों के पास लंबे समय तक चलने वाले प्रदर्शनों से व्यापार और आम लोगों की आजीविका पर पड़ने वाले असर को उठाया गया है.
'प्रदर्शन स्थलों पर अनिश्चितकालीन कब्जा नहीं हो सकता'
CAIT के बयान के मुताबिक, सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि निर्धारित प्रदर्शन स्थलों पर भी अनिश्चितकाल तक कब्जा नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार और अन्य नागरिकों के अपने काम-धंधे तथा आजीविका के अधिकार के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया.
कोर्ट ने ये भी कहा कि किसी एक संगठन या समूह को सार्वजनिक प्रदर्शन स्थल पर अनन्य या अनिश्चितकालीन अधिकार नहीं दिया जा सकता. अलग-अलग संगठनों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए उचित और समान अवसर मिलने चाहिए.
राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के प्रतिनिधियों को पक्षकार बनाने का निर्देश
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी, अधिवक्ता-ऑन-रिकॉर्ड जय अनंत देहाद्राई और अन्य वकील पेश हुए.
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को संबंधित प्रदर्शनकारी संगठनों और राजनीतिक पक्षों को मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया. इनमें CJP, राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के प्रतिनिधि शामिल हैं.
प्रदर्शन से कारोबार और रोजगार प्रभावित
खंडेलवाल ने कहा कि व्यापारी शांतिपूर्ण प्रदर्शन के विरोध में नहीं हैं और न ही किसी के लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करना चाहते हैं. उनकी चिंता घनी आबादी वाले कारोबारी इलाकों के पास प्रदर्शन स्थलों के लंबे समय तक इस्तेमाल से व्यापार, कारोबार और रोजगार पर पड़ने वाले असर को लेकर है.
CAIT के मुताबिक, दिल्ली का कारोबारी तंत्र लाखों लोगों की आजीविका का आधार है. लंबे व्यवधान से सिर्फ दुकानदार ही नहीं, बल्कि कर्मचारी, परिवहनकर्ता, रेहड़ी-पटरी वाले, दिहाड़ी मजदूर, ग्राहक और कारोबार से जुड़े अन्य लोग भी प्रभावित होते हैं.
दोनों मौलिक अधिकारों में संतुलन की मांग
CAIT ने कहा कि याचिका का उद्देश्य शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की रक्षा करते हुए ऐसा व्यावहारिक ढांचा तैयार कराना है, जिससे सार्वजनिक प्रदर्शन स्थलों का इस्तेमाल अनिश्चितकालीन आर्थिक व्यवधान का कारण न बने.
खंडेलवाल ने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से प्रदर्शन स्थलों के इस्तेमाल के लिए निष्पक्ष और संवैधानिक रूप से टिकाऊ व्यवस्था तय करने में मदद मिलेगी.
उन्होंने कहा, 'प्रदर्शन का अधिकार लोकतंत्र का आधार है, लेकिन आजीविका का अधिकार भी उतना ही मौलिक है. एक अधिकार की रक्षा दूसरे को अनिश्चितकाल तक नुकसान पहुंचाकर नहीं की जा सकती.'
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