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दिल्ली में बार-बार धरना-प्रदर्शन से थमा कारोबार! CAIT ने धरना स्थल शहर के बाहर बनाने की रखी मांग

व्यापारिक संगठनों ने दिल्ली में लगातार हो रहे धरने-प्रदर्शनों से बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही, माल की ढुलाई और व्यापार प्रभावित होने का दावा किया है. कैट ने प्रदर्शन स्थल दिल्ली के बाहरी इलाकों में बनाने की मांग को लेकर ऑनलाइन याचिका शुरू की है.

दिल्ली में बार-बार धरना-प्रदर्शन से थमा कारोबार! CAIT ने धरना स्थल शहर के बाहर बनाने की रखी मांग
Delhi Traders Protest: CAIT दिल्ली के बाजारों को धरने-प्रदर्शनों से बचाने के लिए ऑनलाइन याचिका शुरू की है और 26 अक्टूबर को दिल्ली के व्यापारिक नेताओं की आपात बैठक बुलाई है.
NDTV इंडिया

दिल्ली में लगातार हो रहे धरने-प्रदर्शनों और रैलियों से व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ रहे असर को लेकर व्यापारियों में नाराजगी बढ़ रही है. कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने सरकार से मांग की है कि धरने-प्रदर्शनों के लिए दिल्ली के बाहरी इलाकों में स्थायी स्थल निर्धारित किए जाएं, ताकि विरोध के अधिकार और व्यापारिक गतिविधियों के बीच संतुलन बना रहे.

इस मांग के समर्थन में दिल्ली के कई व्यापारिक संगठनों ने आज से ऑनलाइन याचिका शुरू की है. कैट ने इस मुद्दे पर 26 अक्टूबर को दिल्ली के व्यापारिक नेताओं की ऑनलाइन बैठक भी बुलाई है. इसमें दिल्ली के अलग-अलग इलाकों के व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे और समस्या के समाधान के साथ आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे.

प्रदर्शन से कारोबार और रोजी-रोटी पर असर

CAIT के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष विपिन आहूजा, राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव सुमित अग्रवाल, दिल्ली प्रदेश महासचिव आशीष ग्रोवर, चांदनी चौक ट्रेडर्स परिषद के अध्यक्ष सुरेश बिंदल, नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अतुल भार्गव, खान मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव मेहरा और किराना कमेटी के अध्यक्ष गंगा बिशन गुप्ता ने कहा कि लगातार होने वाले प्रदर्शनों से बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही, माल की ढुलाई, परिवहन और रोजाना का कारोबार प्रभावित होता है.

उनके मुताबिक, इसका सबसे ज्यादा असर छोटे व्यापारियों, रेहड़ी-पटरी वालों, दिहाड़ी मजदूरों और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों पर पड़ता है. इन लोगों की रोजाना की कमाई पर उनके परिवार निर्भर रहते हैं.

दिल्ली के कारोबार पर पड़ सकता है व्यापक असर

व्यापारिक नेताओं ने कहा कि दिल्ली देश के प्रमुख व्यापारिक और वितरण केंद्रों में शामिल है. यहां की अर्थव्यवस्था में थोक और खुदरा बाजार, परिवहन, लॉजिस्टिक्स और सेवाओं की अहम भूमिका है. ऐसे में केंद्रीय दिल्ली के व्यस्त व्यापारिक इलाकों में बार-बार होने वाले व्यवधान का असर सिर्फ दुकानदारों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि देशभर में माल की आपूर्ति और उससे जुड़ी आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं.

लोकतांत्रिक अधिकारों और व्यापार के बीच संतुलन की मांग

व्यापारी नेताओं का कहना है कि उन्हें विरोध-प्रदर्शनों से आपत्ति नहीं है, लेकिन विरोध के कारण दूसरों की रोजी-रोटी प्रभावित नहीं होनी चाहिए. लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार जरूरी है, तो वहीं व्यापार करने, रोजगार कमाने और आजीविका चलाने का अधिकार भी उतना ही महत्वपूर्ण है.

इसी को ध्यान में रखते हुए कैट और अन्य व्यापारिक संगठनों ने सरकार से दिल्ली के बाहरी इलाकों में पर्याप्त परिवहन, सुरक्षा और दूसरी जरूरी सुविधाओं से लैस स्थायी प्रदर्शन स्थल बनाने की मांग की है. संगठनों का मानना है कि इससे प्रदर्शनकारी अपनी बात रख सकेंगे और केंद्रीय दिल्ली के बाजारों, आम लोगों की आवाजाही तथा आर्थिक गतिविधियों में होने वाली बाधाओं को कम किया जा सकेगा.

26 अक्टूबर की बैठक में बनेगी आगे की रणनीति

व्यापारी नेताओं के मुताबिक, इस पहल का मकसद दिल्ली के व्यापारिक माहौल और लाखों लोगों की आजीविका की रक्षा करना है. 26 अक्टूबर को होने वाली ऑनलाइन बैठक में अलग-अलग व्यापारिक संगठनों के सुझावों पर चर्चा होगी. इसके बाद सरकार के सामने इस मांग को संयुक्त रूप से उठाने की रणनीति तैयार की जाएगी. CAIT का कहना है कि विरोध का अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए, लेकिन इसके साथ दिल्ली के व्यापार, रोजगार और आम लोगों की रोजी-रोटी का भी ध्यान रखा जाना जरूरी है.

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