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Rupee vs Dollar: डॉलर के मुकाबले रुपये में शानदार मजबूती, RBI के एक फैसले से 105 पैसे उछली भारतीय करेंसी

Dollar vs Rupee: सोमवार को रुपया रिकॉर्ड गिरावट के साथ 95.23 तक गिर गया था. इसके बाद RBI ने ऑथराइज्ड डीलर्स और बैंकों के लिए विदेशी मुद्रा के नियमों को बेहद सख्त कर दिया. नए नियमों के मुताबिक, अब बैंकों और ऑथराइज्ड डीलर्स (ADs) पर कई पाबंदियां लगा दी गई हैं.

Rupee vs Dollar: डॉलर के मुकाबले रुपये में शानदार मजबूती, RBI के एक फैसले से 105 पैसे उछली भारतीय करेंसी
USD INR Exchange Rate: आरबीआई के कड़े एक्शन के बाद रुपये ने शानदार वापसी की है. डॉलर के मुकाबले रुपया 105 पैसे मजबूत होकर 93.65 पर पहुंचा.

Rupee vs Dollar Today: भारतीय करेंसी के लिए आज की सुबह एक राहत भरी खबर लेकर आई है. लगातार गिर रहे रुपये ने आज जबरदस्त यू-टर्न लिया है.3 अप्रैल के शुरुआती कारोबार में रुपया अपने अब तक के सबसे ऑल-टाइम लो(95.23) से करीब 105 पैसे की लंबी छलांग लगाकर 93.65 के स्तर पर पहुंच गया है.भारतीय करेंसी में इस बड़ी मजबूती के पीछे रिजर्व बैंक बड़ा फैसला  है. RBI द्वारा सट्टेबाजी रोकने के लिए उठाए गए कड़े कदमों का असर अब पर साफ दिखने लगा है, जिससे डॉलर के मुकाबले रुपये में जान लौट आई है.

रुपया 95 के पार जाने के बाद RBI का 'मास्टरस्ट्रोक'

भारतीय रुपये में बीते कुछ समय से आ रही रिकॉर्ड गिरावट को रोकने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) पूरी तरह एक्शन मोड में  है. सोमवार को जब रुपया ऐतिहासिक रूप से 95 के पार निकल गया, तो आरबीआई ने देर रात एक बड़ा फैसला सुनाया. नए नियमों के मुताबिक, अब बैंकों और ऑथराइज्ड डीलर्स (ADs) पर कई पाबंदियां लगा दी गई हैं, ताकि रुपये की वैल्यू को स्थिर रखा जा सके. आइए जानते हैं आरबीआई ने क्या-क्या कदम उठाएं हैं जिससे रुपये को मजबूती मिला है.

NDF मार्केट पर लगा 'ताला', सट्टेबाजी पर नकेल

RBI ने बैंकों को नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड्स (NDF) ऑफर करने से रोक दिया है और कंपनियों द्वारा कैंसिल किए गए कॉन्ट्रैक्ट्स को दोबारा बुक करने पर भी पाबंदी लगा दी है. आरबीआई ने ऑथराइज्ड डीलर्स को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अब ग्राहकों को 'नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड्स' (NDF) कॉन्ट्रैक्ट ऑफर नहीं कर पाएंगे.  आसान भाषा में कहें तो, यह एक ऐसा बाजार था जहां लोग रुपये की असली डिलीवरी लिए बिना उसकी कीमत गिरने या बढ़ने पर सट्टा लगाते थे. इससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा था, जिसे रोकने के लिए आरबीआई ने अब इस रास्ते को बंद कर दिया है. इस फैसले से उन ट्रेडर्स में हड़कंप मच गया है जो रुपये की गिरावट पर सट्टा लगा रहे थे. अब वे तेजी से अपनी पोजीशन खत्म कर रहे हैं, जिससे बाजार में डॉलर इन्फ्लो बढ़ गई है और रुपया मजबूत हो रहा है.

फॉरेन एक्सचेंज डीलर्स का कहना है कि जो बैंक अब तक अपनी पोजीशन क्लियर नहीं कर पाए थे, वे अब डॉलर बेचने की होड़ में हैं. इसी पैनिक सेलिंग ने रुपये को मजबूती दी है, जिससे पिछले दो दिनों की छुट्टियों के बाद खुलते ही बाजार में रुपये का दबदबा दिखा.

बैंकों के लिए RBI के कड़े नियम

बैंक अब भी ग्राहकों को उनके बिजनेस रिस्क को कम करने यानी हेजिंग (Hedging) के लिए डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट दे सकते हैं, लेकिन इसमें एक बड़ी शर्त जोड़ दी गई है. अब ग्राहकों को यह साबित करना होगा कि वे एक तरफ तो बचाव कर रहे हैं और दूसरी तरफ ऑफशोर मार्केट (Offshore Market) में रुपये के खिलाफ कोई उल्टा दांव नहीं लगा रहे हैं. इससे मार्केट में ट्रासपेरेंसी आएगी और रुपये की सेहत सुधरेगी.

रि-बुकिंग पर रोक और रिलेटेड पार्टी पर पाबंदी

आरबीआई ने एक और बड़ा पेच फंसाया है. अब अगर कोई यूजर अपना फॉरेन एक्सचेंज कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल करता है, तो बैंक उसे दोबारा बुक (Rebook) करने की अनुमति नहीं देंगे. इसके अलावा, बैंक अब अपनी ही 'रिलेटेड पार्टीज' जैसे अपनी ही दूसरी ब्रांच या सहयोगी कंपनियां के साथ कोई डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट नहीं कर पाएंगे. यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि बैंक आपस में ही ट्रेडिंग करके रुपये की कीमत को प्रभावित न कर सकें.

डॉलर के मुकाबले रुपया 4% से ज्यादा टूटा

पिछले कुछ दिनों में ईरान युद्ध और वैश्विक अनिश्चितता के कारण रुपया डॉलर के मुकाबले 4% से ज्यादा टूट चुका है. आरबीआई ने पहले ही बैंकों की होल्डिंग लिमिट को 100 मिलियन डॉलर पर फिक्स कर दिया है. अब इन नए नियमों से उन लोगों पर लगाम लगेगी जो बाजार में रुपये की कमजोरी का फायदा उठाकर मुनाफा कमा रहे थे.

ट्रंप के बयान और कच्चे तेल का दबाव अब भी जारी

रुपये में मजबूती तो आई है, लेकिन चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका अगले 2-3 हफ्तों में ईरान पर बेहद कड़ा प्रहार करेगा. इस बयान के बाद ब्रेंट क्रूड ऑयल 5% उछलकर $106 के करीब पहुंच गया है. जानकारों का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में तनाव बना रहेगा और तेल महंगा रहेगा, रुपये पर दबाव बना रह सकता है. MUFG जैसे विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो रुपया फिर से 95 के नीचे जा सकता है.

क्या है एक्सपर्ट्स की राय?

बाजार के जानकारों का कहना है कि आरबीआई ने आर्बिट्राज और सट्टेबाजी को रोकने के लिए सही समय पर सही कदम उठाया है. हालांकि, विदेशी फंड्स की निकासी (Capital Outflow) और महंगे तेल की वजह से रुपये की राह अब भी कांटों भरी है. फिलहाल ट्रेडर्स की नजर इस बात पर है कि क्या रुपया 93 के स्तर को पार कर और मजबूत हो पाता है या नहीं.

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