देर आए दुरुस्त आए... ये कहावत भारतीय रुपये के लिए सटीक बैठ रही है. हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन रुपये ने शानदार तेजी दिखाते हुए, डॉलर के मुकाबले 63 पैसे की मजबूती हासिल की. इस बढ़त के बाद रुपया 96.23 के लेवल पर बंद हुआ. अगर ये मजबूती आने वाले समय में बनी रहती है तो संकट के इस समय में देश की अर्थव्यवस्था को काफी हद तक सपोर्ट मिलेगा.
क्यों चढ़ा भारतीय रुपया?
रुपये की तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की उम्मीदें हैं. इस खबर से कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त कमी आई हैं, जिससे दुनिया भर में महंगाई की चिंता कुछ हद तक कम हुई हैं. भारत जैसे तेल आयातक देश पर इसका सीधा असर पड़ता है क्योंकि महंगा तेल डॉलर की मांग बढ़ाता है और सस्ता तेल डॉलर की डिमांड को कम करता है. इन सभी बातों का सीधा असर रुपये पर पॉजिटिव पड़ता है.
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
मजबूत रुपया सीधे तौर पर पेट्रोल-डीजल, इलेक्ट्रॉनिक्स, आयातित सामान, विदेश यात्रा और शिक्षा की लागत कम कर सकता है. अगर डॉलर की डिमांड कम हुई और तेल महंगा सस्ता हुआ, तो देश में महंगाई दर पर भी ब्रेक लगते हैं. यानी देश में रोजमर्रा के सामान सस्ते होते हैं, जिसका सीधा फायदा आम नागरिकों को मिलता है.
पीस डील की खबरों से 5% तक टूटा कच्चा तेल
इससे पहले ट्रंप ने कहा कि जल्द ही ईरान के साथ पीस डील होने की उम्मीद है. जैसे ही ये खबर आई वैसे ही ग्लोबली बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली. 5% से ज्यादा कच्चा तेल ग्लोबल मार्केट में सस्ता हो गया. वहीं अमेरिकी कच्चे तेल (US Crude) की कीमत भी फिसलकर 105.70 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई.
विदेशी निवेशकों की निकासी बनी चिंता का विषय
हालांकि अभी भी देश के लिए विदेशी निवेशकों का शेयर मार्केट से पैसा निकालना चिंता का विषय बना हुआ है. फरवरी के आखिर से अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर और बॉन्ड बाजार से 22 अरब डॉलर से ज्यादा की निकासी की है. कमजोर कैपिटल इन्फ्लो और ऊंचे बॉन्ड यील्ड की वजह से अभी भारतीय रुपये पर प्रेशर बना रह सकता है.