रॉयल एनफील्ड की बाइक पर बैठकर जब कोई निकलता है तो उसका एक अलग रुतबा देखने को मिलता है. वह इसलिए क्योंकि इसकी बाइक सिर्फ 'रॉयल लुक' भी देती है. रॉयल एनफील्ड की बाइक्स न सिर्फ वजन से हेवी होती हैं, बल्कि पैसों से भी हेवी होती हैं. लेकिन ये कंपनी बाइक्स के अलावा और भी सामान बेचती हैं जो काफी कम कीमत में आते हैं.
रॉयल एनफील्ड आज सिर्फ बाइक्स ही नहीं बनाती, बल्कि इसकी टी-शर्ट, कैप, ग्लव्स, बैग्स और जूते वगैरह भी आते हैं, जिन्हें शोरूम या ऑनलाइन खरीदा जा सकता है.
कितने की आती है टी-शर्ट-कैप?
रॉयल एनफील्ड की बाइक्स भले ही महंगी आती हों लेकिन इसकी टी-शर्ट की कीमत 600 रुपये से शुरू हो जाती है. अभी सेल चल रही है तो कई सारी चीजों पर डिस्काउंट भी मिल रहा है. अभी 1,100 रुपये में बिकने वाली टी-शर्ट 660 रुपये में खरीद सकते हैं.
अगर इस कंपनी की ओवराइसज्ड टी-शर्ट खरीदना चाहते हैं तो इसकी कीमत 1,022 रुपये से शुरू हो जाती है. पोलो टी-शर्ट 1,155 रुपये से मिलती है. वहीं, फुल स्लीव टी-शर्ट 1,460 रुपये से शुरू होती है.

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ये कंपनी जैकेट और कार्गो भी बेचती है. इसकी हाफ जैकेट की शुरुआती कीमत 2,262 रुपये और कार्गो की 2,454 रुपये है. वहीं, बॉम्बर जैकेट के लिए 4,500 रुपये खर्च करना होगा.

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रॉयल एनफील्ड के स्नीकर्स की शुरुआती कीमत 3,990 रुपये है. इसके लेदर बूट्स 4,320 रुपये तो कारगिल बूट्स 4,400 रुपये में आते हैं.
इस कंपनी की लेदर जैकेट बहुत महंगी आती है. लड़कों के लिए इसकी लेदर जैकेट की कीमत 14,000 रुपये है. जबकि, लड़कियों के लिए लेदर जैकेट की कीमत 17,000 रुपये है.

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इसके अलावा कंपनी बैग्स, सनग्लासेस और कैप वगैरह भी बेचती है. इसके बैग्स की रेंज 4,500 से 5,500 रुपये है. इसका सबसे महंगा सनग्लासेस 5,950 रुपये का आता है. इसकी गोरखा कैप 1,290 रुपये और स्लिंग बैग 1,250 रुपये में मिलता है. इसकी पानी की बोतल सिर्फ 320 रुपये में आती है.
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क्या है कंपनी का इतिहास?
रॉयल एनफील्ड ने अपनी पहली बाइक 1901 में बनाई थी. इसके बाद 1932 में पहली बार Bullet मॉडल उतारा गया.
भारत में यह बाइक आजादी के बाद आई. आजादी के बाद सरकार को भारत-पाकिस्तान सीमा पर गश्त के लिए मजबूत बाइक की जरूरत थी. 1952-1954 में भारतीय सेना ने 800 बुलेट 350cc का ऑर्डर दिया. भारत में बाइक्स को असेंबल करने के लिए 'मद्रास मोटर्स' ने रेडडिच कंपनी के साथ साझेदारी कर Enfield India की स्थापना की.

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1990 के दशक में सस्ती बाइक्स के कारण रॉयल एनफील्ड की बाइक की बिक्री में गिरावट आने लगी. कंपनी घाटे में आने लगी. आयशर मोटर्स ने 1994 में इसे खरीद लिया, लेकिन घाटा कम नहीं हुआ. 2000 के बाद इस कंपनी को बंद करने के बारे में भी सोचा गया. लेकिन 2009 में कंपनी ने क्लासिक 350 का नया वर्जन लॉन्च किया और भारतीय बाजार में फिर से अपनी पकड़ बनाई.
आज भारत के मिड-साइज मोटरसाइकिल सेगमेंट में 85% से 90% हिस्सेदारी रॉयल एनफील्ड की है. आयशर मोटर्स के कुल मुनाफे और रेवेन्यू का लगभग 80-90% हिस्सा केवल रॉयल एनफील्ड से आता है.
2026-27 की पहली तिमाही में आयशर मोटर्स का रेवेन्यू 21% से ज्यादा बढ़ा. कंपनी को अप्रैल-जून तिमाही में 1,463 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ है. इस तिमाही में कंपनी ने 3,32,940 बाइक्स बेची हैं, जो पिछले साल की तुलना में 27% ज्यादा है.
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