विज्ञापन
This Article is From Jun 12, 2024

मई में खुदरा मुद्रास्फीति घटकर 4.75 प्रतिशत पर, एक साल के निचले स्तर पर पहुंचा

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, मई में खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर 8.69 प्रतिशत रही जो अप्रैल के 8.70 प्रतिशत से थोड़ा ही कम है.

मई में खुदरा मुद्रास्फीति घटकर 4.75 प्रतिशत पर, एक साल के निचले स्तर पर पहुंचा
नई दिल्ली:

खाद्य उत्पादों की कीमतों में मामूली कमी आने से खुदरा मुद्रास्फीति मई के महीने में एक साल के निचले स्तर 4.75 प्रतिशत पर आ गई और यह भारतीय रिजर्व बैंक के संतोषजनक दायरे में बनी रही. बुधवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति में जनवरी से ही जारी गिरावट का सिलसिला मई में भी कायम रहा. अप्रैल में खुदरा मुद्रास्फीति 4.83 प्रतिशत थी जबकि मई, 2023 में यह 4.31 प्रतिशत पर रही थी जो इसका पिछला निचला स्तर है.

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, मई में खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर 8.69 प्रतिशत रही जो अप्रैल के 8.70 प्रतिशत से थोड़ा ही कम है. जनवरी, 2024 से मुख्य मुद्रास्फीति में क्रमिक रूप से गिरावट देखी गई है. यह फरवरी में 5.1 प्रतिशत थी और वहां से घटते हुए अप्रैल में 4.8 प्रतिशत पर आ गई थी. आंकड़ों से पता चलता है कि सीपीआई पर आधारित अखिल भारतीय मुद्रास्फीति मई, 2024 में एक साल पहले के महीने के बाद सबसे कम है, जब यह 4.31 प्रतिशत थी. यह सितंबर, 2023 से ही छह प्रतिशत से नीचे बनी हुई है.

मई के दौरान सब्जियों की कीमतें अप्रैल की तुलना में अधिक थीं जबकि फलों के मामले में स्थिति उलटी थी. सरकार ने रिजर्व बैंक को खुदरा मुद्रास्फीति को दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर सीमित रखने का दायित्व सौंपा हुआ है. इस खुदरा मुद्रास्फीति को ही ध्यान में रखते हुए रिजर्व बैंक नीतिगत ब्याज दरों पर कोई फैसला करता है. जून की शुरुआत में रिजर्व बैंक ने अपनी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा में चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा मुद्रास्फीति के 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है. यह पहली तिमाही में 4.9 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 3.8 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 4.6 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 4.5 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है.

रेटिंग एजेंसी इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर कहा कि मई के मुकाबले जून में खाद्य और पेय पदार्थों की मुद्रास्फीति कुछ हद तक कम हो जाएगी, जबकि अन्य उप-समूह सात प्रतिशत से ऊपर रहेंगे. नायर ने कहा, ‘‘इससे जून, 2024 में मुख्य खुदरा मुद्रास्फीति को पांच प्रतिशत से नीचे रखने में मदद मिलेगी. इसके बाद अनुकूल आधार होने से जुलाई और अगस्त में खुदरा मुद्रास्फीति के तेजी से घटकर 2.5-3.5 प्रतिशत हो जाने की उम्मीद है.''

एनएसओ के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खुदरा मुद्रास्फीति 5.28 प्रतिशत रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 4.15 प्रतिशत रही.राज्यों के स्तर पर आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, कर्नाटक, केरल, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश में मुद्रास्फीति राष्ट्रीय स्तर 4.75 प्रतिशत से अधिक रही. यह ओडिशा में सबसे अधिक 6.25 प्रतिशत रही जबकि दिल्ली में सबसे कम 1.99 प्रतिशत मुद्रास्फीति दर्ज की गई.

एनएसओ साप्ताहिक आधार पर सभी राज्यों एवं केंद्रशासित क्षेत्रों को शामिल करते हुए चयनित 1,114 शहरी बाजारों और 1,181 गांवों से कीमतों के बारे में आंकड़े जुटाता है. मई में एनएसओ ने 100 गांवों और 98.5 प्रतिशत शहरी बाजारों से कीमतें एकत्रित कीं.

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Consumer Price Index, Inflation, National Statistical Office
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com