दिल्ली-एनसीआर में लगातार बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतों और किराए के बीच घर खरीदने का फैसला पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है. ऐसे में अधिकांश खरीदारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि वह रेडी टू मूव फ्लैट खरीदा जाए या अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट में निवेश किया जाए. दोनों विकल्पों के अपने-अपने फायदे और जोखिम हैं. जहां रेडी-टू-मूव फ्लैट में तुरंत पजेशन और कम जोखिम मिलता है, वहीं अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध होने के साथ भविष्य में बेहतर रिटर्न की संभावना भी देती है. हालांकि पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई परियोजनाओं में देरी और खरीदारों का पैसा फंसने की घटनाओं के बाद अब लोग पहले की तुलना में काफी सोच-समझकर फैसला ले रहे हैं.
पजेशन में देरी ने बदली खरीदारों की सोच
दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम सहित कई शहरों में ऐसे प्रोजेक्ट सामने आए हैं, जिनका निर्माण तय समय पर पूरा नहीं हो सका. इसके कारण हजारों खरीदार वर्षों तक अपने घर का इंतजार करते रहे. कई लोगों को एक साथ किराया और होम लोन की ईएमआई का बोझ उठाना पड़ा. इसी वजह से अब एंड-यूजर खरीदारों का झुकाव रेडी-टू-मूव प्रॉपर्टी की ओर बढ़ रहा है.
कीमत कम, लेकिन इंतजार ज्यादा
रियल एस्टेट जानकारों के मुताबिक समान लोकेशन और सुविधाओं वाले अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट की कीमत रेडी-टू-मूव फ्लैट की तुलना में आमतौर पर 10 से 30 प्रतिशत तक कम होती है. निर्माण के दौरान चरणबद्ध भुगतान की सुविधा भी मिलती है, जिससे शुरुआती आर्थिक दबाव कम रहता है. हालांकि प्रोजेक्ट पूरा होने तक इंतजार करना पड़ता है और यदि निर्माण में देरी होती है तो खरीदारों की पूरी वित्तीय योजना प्रभावित हो सकती है.
दूसरी ओर रेडी-टू-मूव फ्लैट महंगे जरूर होते हैं, लेकिन खरीदार को तुरंत पजेशन मिल जाता है. वह घर की गुणवत्ता, निर्माण, धूप-हवा और आसपास के माहौल को देखकर ही फैसला ले सकता है. सबसे बड़ा फायदा यह है कि किराए का खर्च तुरंत बंद हो जाता है और खरीदार सीधे अपने घर में रहने लगता है.

किराया और EMI का दोहरा बोझ
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि खरीदार पहले से किराए के मकान में रह रहा है, तो अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट में निवेश करते समय उसे किराए और ईएमआई दोनों का खर्च उठाना पड़ सकता है. वहीं रेडी-टू-मूव फ्लैट में शिफ्ट होने के बाद किराया समाप्त हो जाता है और केवल ईएमआई का भुगतान करना पड़ता है. यही कारण है कि नौकरीपेशा परिवार तैयार मकानों को प्राथमिकता दे रहे हैं.
निवेशकों के लिए क्यों आकर्षक है अंडर-कंस्ट्रक्शन?
रियल एस्टेट बाजार के जानकारों का मानना है कि अच्छी लोकेशन और भरोसेमंद डेवलपर की निर्माणाधीन परियोजना में निवेश करने पर पजेशन तक प्रॉपर्टी की कीमत में अच्छा इजाफा हो सकता है. कम शुरुआती कीमत और चरणबद्ध भुगतान के कारण यह विकल्प निवेशकों के बीच अब भी लोकप्रिय बना हुआ है. हालांकि इसके लिए डेवलपर का ट्रैक रिकॉर्ड और परियोजना की प्रगति की जांच करना जरूरी है.
एक नजर में तुलना
| आधार | रेडी-टू-मूव | अंडर-कंस्ट्रक्शन |
| कीमत | अपेक्षाकृत अधिक | अपेक्षाकृत कम |
| पजेशन | तुरंत | निर्माण पूरा होने पर |
| जोखिम | बहुत कम | देरी की संभावना |
| किराया | तुरंत बचता है | किराया जारी रह सकता है |
| भुगतान | एकमुश्त या पूरी ईएमआई | चरणबद्ध भुगतान |
| निवेश पर रिटर्न | सीमित | बेहतर संभावना |
रियल एस्टेट बाजार में पिछले तीन वर्षों के दौरान नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गुरुग्राम में आवासीय संपत्तियों की कीमतों के साथ-साथ किराए में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है. विशेषज्ञों के अनुसार कई प्रमुख माइक्रो मार्केट में प्रॉपर्टी कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत तक और किराए में 15 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखने को मिली है. इसी कारण अब घर खरीदने के फैसले में खरीदार केवल कीमत नहीं, बल्कि भविष्य की लागत और जोखिम का भी आकलन कर रहे हैं.
खरीदारों का अनुभव कैसा है
नोएडा के एक निजी कंपनी में कार्यरत दिनेश शर्मा ने हाल ही में रेडी-टू-मूव फ्लैट खरीदा है. उनका कहना है कि कीमत कुछ अधिक जरूर लगी, लेकिन तुरंत पजेशन मिलने से किराया देना बंद हो गया और परिवार को अपने घर में रहने का सुकून मिला.
वहीं गुरुग्राम निवासी निधि गुप्ता ने तीन वर्ष पहले अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट में निवेश किया था. उनका कहना है कि पजेशन मिलने में समय लगा, लेकिन इस दौरान संपत्ति की कीमत में अच्छी बढ़ोतरी हुई, जिससे निवेश का लाभ मिला.
विशेषज्ञों की क्या राय है?
बिगटेक के COO राज कुमार सिसोदिया का कहना है कि आज का होमबायर पहले की तुलना में अधिक जागरूक और व्यावहारिक हो गया है. अब केवल कम कीमत देखकर निर्णय नहीं लिया जाता, बल्कि डेवलपर की विश्वसनीयता, समय पर डिलीवरी और परियोजना की पारदर्शिता को भी बराबर महत्व दिया जाता है. उनके अनुसार खुद रहने के लिए घर खरीदने वाले खरीदारों का झुकाव तेजी से रेडी-टू-मूव प्रॉपर्टी की ओर बढ़ा है, जबकि निवेश के उद्देश्य से खरीदने वाले लोग अब भी मजबूत डेवलपर की निर्माणाधीन परियोजनाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं.
मिगसन ग्रुप के एमडी यश मिगलानी का कहना है कि किसी भी खरीदार को केवल कीमत के आधार पर फैसला नहीं करना चाहिए. यदि उद्देश्य तुरंत घर में शिफ्ट होना है तो रेडी-टू-मूव बेहतर विकल्प है, जबकि लंबी अवधि के निवेश के लिए अच्छी लोकेशन और मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड वाले अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट बेहतर रिटर्न दे सकते हैं.
अंसल हाउसिंग के डायरेक्टर कुशाग्र अंसल का कहना है कि आज घर खरीदने वाले ग्राहकों की प्राथमिकताएं बदल चुकी हैं. वे केवल कम कीमत नहीं, बल्कि समय पर पजेशन, निर्माण की गुणवत्ता और डेवलपर की विश्वसनीयता को भी बराबर महत्व दे रहे हैं. रेडी-टू-मूव प्रॉपर्टी उन खरीदारों के लिए बेहतर विकल्प है, जिन्हें तुरंत घर चाहिए, जबकि अच्छी लोकेशन और मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड वाले अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट लंबी अवधि में बेहतर निवेश साबित हो सकते हैं. सबसे जरूरी है कि खरीदार फैसला लेने से पहले अपनी जरूरत और वित्तीय क्षमता का सही आकलन करें.
सिक्का ग्रुप के चेयरमैन हरविंदर सिंह सिक्का का कहना है कि रियल एस्टेट में सही निवेश का आधार केवल कम कीमत नहीं, बल्कि भरोसेमंद डेवलपर और समय पर डिलीवरी होती है. आज खरीदार पहले की तुलना में अधिक जागरूक हैं और वे ऐसे प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं, जहां गुणवत्ता और पारदर्शिता दोनों सुनिश्चित हों. यदि किसी खरीदार को तुरंत रहने के लिए घर चाहिए तो रेडी-टू-मूव सबसे सुरक्षित विकल्प है, जबकि निवेश के उद्देश्य से अच्छी लोकेशन वाले अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट भविष्य में बेहतर मूल्य वृद्धि का अवसर प्रदान कर सकते हैं.
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