इटली वह देश है, जहां दुनिया के कई बड़े लग्जरी ब्रांड का जन्म हुआ है. इन्हीं में से एक है प्राडा (Prada), जिसे 1913 में मिलान में दो भाइयों ने शुरू किया था. शुरुआत में प्राडा सिर्फ लेदर बैग बनाता था, लेकिन आज बहुत कुछ बेचता है. यह ब्रांड इतना महंगा है कि इसका सबसे सस्ता प्रोडक्ट खरीदने के लिए हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं.
प्राडा का सबसे सस्ता सामान कौनसा आता है? इस ब्रांड का इतिहास क्या है? कैसे ये इतना बड़ा ब्रांड बना? कितना बड़ा रेवेन्यू है? जानते हैं.
सबसे सस्ता सामान कौनसा है?
प्राडा की शुरुआत लेदर बैग बनाने से हुई थी लेकिन आज ये ब्रांड बहुत कुछ बेचता है. प्राडा के कलेक्शन में सबसे सस्ते सनग्लासेस हैं. लेकिन इनकी शुरुआती कीमत भी साढ़े 18 हजार रुपये से ज्यादा है.
प्राडा के सबसे सस्ते सनग्लासेस की कीमत 18,590 रुपये है. इसका सबसे महंगा सनग्लासेस 45,590 रुपये का आता है.

अगर प्राडा का सबसे सस्ता बेल्ट खरीदना है तो इसके लिए भी 51,090 रुपये खर्च करने होंगे. इसका एक स्कार्फ 52,190 रुपये में मिलता है. इस ब्रांड की कैप 64,290 रुपये की आती है.

फाइनेंस का 10% रूल कहता है कि किसी सिंगल लग्जरी आइटम पर महीने की कमाई का 10% से ज्यादा खर्च नहीं होना चाहिए. यानी अगर आप प्राडा की सिर्फ एक बेल्ट भी खरीदना चाहते हैं, तो आपकी महीने की टेक-होम सैलरी कम से कम 5 लाख रुपये और सालाना पैकेज (CTC) लगभग 75 से 80 लाख रुपये होना चाहिए.
एयरपॉड रखने के लिए प्राडा केस भी बनाती है. इसका एयरपॉड केस 69,290 रुपये का है. वॉलेट की कीमत भी 69,690 रुपये है.

इसके सबसे महंगे प्रोडक्ट में लेदर बैग आते हैं, जिनकी कीमत लाखों में होती है. महिलाओं के लिए इसका सबसे महंगा लेदर बैग जो आता है, उसकी कीमत 8,34,190 रुपये है. लैपटॉप रखने के लिए अगर ब्रीफकेस खरीदना चाहते हैं तो इसके लिए 5,42,290 रुपये खर्च करने होंगे.
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क्या है इस ब्रांड का इतिहास?
1913 में इटली के मिलान शहर में दो भाइयों- मारियो प्राडा और मार्टिनो प्राडा ने इसकी शुरुआत की थी. शुरुआत में इसका नाम 'फ्रेटेली प्राडा' था. यह एक छोटी सी दुकान थी, जो चमड़े के बैग बनाती थी.
प्राडा भाइयों के लेदर बैग की बेहतरीन कारीगरी और शानदार एक्सेसरीज के कारण यह जल्द ही मशहूर हो गया. प्राडा की कारीगरी से प्रभावित होकर इटली के रॉयल हाउस ने इसे अपना आधिकारिक सप्लायर बनाया.

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दिलचस्प बात यह है कि मारियो प्राडा का मानना था कि महिलाओं को घर संभालना चाहिए, न कि बिजनेस. उन्हें लगता था कि परिवार के पुरुष ही उनकी विरासत को आगे बढ़ाएं. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. आज अगर प्राडा इतना बड़ा ब्रांड है तो इसके पीछे उनकी बेटी और पोती का ही हाथ है.
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पोती ने बनाया ग्लोबल ब्रांड
1958 में मारियो प्राडा का निधन हो गया. उनके बेटे को बिजनेस में कोई दिलचस्पी नहीं थी. इसलिए प्राडा का पूरा बिजनेस उनकी बेटी लुइसा प्राडा ने संभाला. लुइसा ने 20 साल तक कारोबार संभाला, लेकिन इसे बढ़ाने के बजाय बस इसे बनाए रखा.
साल 1978 में मारियो की पोती और लुइसा की बेटी म्यूचिया प्राडा की एंट्री हुई और यहीं से प्राडा के ग्लोबल ब्रांड बनने की शुरुआत हो गई.
हालांकि, म्यूचिया ने जब कमान संभाली तब प्राडा मंदी से जूझ रही थी. उन्होंने तब लेदर के पारंपरिक नियमों को तोड़ते हुए सैन्य पैराशूट वाले मजबूत और वाटरप्रूफ ब्लैक पोकोनो नायलॉन पेश किए. इस डिजाइन ने फैशन इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया.

म्यूचिया प्राडा.
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म्यूचिया के पति पैट्रिजियो बर्तेली ने बिजनेस और ग्लोबल एक्सपेंशन संभाला, जबकि म्यूचिया ने क्रिएटिव डिजाइनिंग की कमान रखी. इस जोड़ी ने शूज, रेडी-टू-वियर कपड़े और परफ्यूम लॉन्च करके प्राडा को ग्लोबल ब्रांड बना दिया. म्यूचिया ने एक बार कहा था कि वह नहीं चाहतीं कि उनके कपड़े महिलाओं को सिर्फ 'सेक्सी' दिखाएं, बल्कि उन्हें 'स्ट्रॉन्ग' बनाएं.
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कितना रेवेन्यू कमाती है प्राडा?
आज यह ब्रांड अपने सादे लेकिन शानदार डिजाइनों के लिए मशहूर है. प्राडा के प्रोडक्ट्स की रेंज में रेडी-टू-वियर कलेक्शन, हैंडबैग, जूते और सनग्लासेस शामिल हैं.
छोटी सी दुकान से शुरू हुई प्राडा आज एक ग्रुप बन गया है, जिसमें कई सारे ब्रांड आते हैं. प्राडा ग्रुप के चेयरमैन पैट्रिजियो बर्तेली हैं. वहीं, म्यूचिया प्राडा एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और डिजाइनर हेड हैं. प्राडा के आज दुनियाभर में 600 से ज्यादा स्टोर्स हैं. इटली, फ्रांस और यूके समेत कई देशों में मैनुफैक्चरिंग यूनिट्स हैं.

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2026 की पहली छमाही यानी जनवरी से जून के बीच प्राडा का रेवेन्यू 3.05 अरब यूरो (लगभग 33,600 करोड़ रुपये) रहा. यह सालाना आधार पर 16% ज्यादा है. प्राडा की रिटेल सेल्स ही 2.63 अरब यूरो (लगभग 30,000 करोड़ रुपये) रही. प्राडा की सबसे ज्यादा कमाई एशिया से होती है. प्राडा की मार्केट कैप आज के समय में 15 अरब डॉलर से ज्यादा है.
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