बॉलीवुड एक्ट्रेस आलिया भट्ट मई में कान्स फिल्म फेस्टिवल के दौरान एक खास बैग लेकर पहुंची थीं. ये 'Gucci Jackie 1961' बैग था. इसका टेक्सचर्ड लेदर फिनिश इसे विंटेज लुक देता है. इस बैग की कीमत पता है कितनी थी? 3,450 यूरो. भारतीय करंसी में इसे कन्वर्ट किया जाए तो ये 3.85 लाख रुपये से ज्यादा होती है. आलिया के पास गुच्ची का अच्छा-खासा कलेक्शन है. आलिया के पास '1955 Horsebit handbag' भी है, जो लगभग 4 लाख रुपये का है.
आलिया के सिर्फ इन दो बैग से ही आप समझ गए होंगे कि गुच्ची के बैग या पर्स कितने महंगे आते हैं. गुच्ची एक इटैलियन ब्रांड है, जो हैंडबैग या वॉलेट ही नहीं, बल्कि फुटवियर, एसेसरीज, पैंट-शर्ट, बेल्ट जैसी चीजें भी बनाता है. इनमें से ज्यादातर की कीमत लाखों में होती है. अगर कोई कम कीमत वाला हो भी, तो उसे खरीदने में भी एक आम आदमी की महीनेभर की सैलरी चली जाएगी.
कितना महंगा है गुच्ची?
गुच्ची 100 साल से भी ज्यादा पुराना ब्रांड है, जिसे गुचियो गुच्ची (Gucio Gucci) ने शुरू किया था. आज गुच्ची की गिनती दुनिया के लग्जरी फैशन ब्रांड में होती है और बड़े-बड़े सेलेब्रिटीज और बिजनेसमैन ही इसे अफॉर्ड कर पाते हैं.

गुच्ची का कैनवास शू आते हैं, जिसकी कीमत 14,999 रुपये है. गुच्ची का एक बेल्ट 21,499 रुपये का आता है. अगर आप गुच्ची की कैप भी खरीदते हैं तो उसके लिए 35 से 38 हजार रुपये खर्च करने होंगे. इतना ही नहीं, अगर गुच्ची का एक छोटा बैग खरीदना चाहते हैं तो कम से कम 35,799 रुपये तो लगाने ही पड़ेंगे.
यहां जो भी कीमत बताई जा रही है, वो सबसे सस्ते प्रोडक्ट की है. आपको जानकर हैरानी होगी कि गुच्ची का सबसे सस्ता स्कार्फ 44,490 रुपये का आता है. ब्लैक हेट खरीदने के लिए भी इतने ही पैसे खर्च करने होंगे.

गुच्ची के स्कार्फ और हेट की कीमत जितनी है, उतनी तो बहुत से भारतीयों की एक महीने की सैलरी ही होती है.
आप ये जानकर हैरान हो जाएंगे कि गुच्ची की लेदर जैकेट की कीमत 7,79,990 रुपये है. वहीं, बॉम्बर जैकेट 4,63,990 रुपये की आती है. अगर आप लैपटॉप रखने के लिए गुच्ची का ब्रीफकेस खरीदना चाहते हैं तो इसके लिए 2,89,490 रुपये खर्च करने होंगे.
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लेकिन गुच्ची इतना महंगा क्यों है?
इसके पीछे कई चीजें काम करती हैं. पहली तो साइकोलॉजी है. आमतौर पर अर्थशास्त्र का नियम कहता है कि जब कोई चीज महंगी होती है तो उसकी मांग घट जाती है लेकिन लग्जरी ब्रांड्स पर 'वेबलेन इफेक्ट' लागू होता है. वेबलेन गुड्स ऐसी चीजें होती हैं जिनकी कीमत जितनी ज्यादा होगी, अमीर लोग उन्हें उतना ही ज्यादा खरीदना पसंद करेंगे.
अगर गुच्ची अपने बैग की कीमत घटाकर 10,000 रुपये कर दे, तो आम लोग तो इसे खरीद लेंगे, लेकिन जो अमीर वर्ग इसका असली खरीदार है, वह इसे खरीदना बंद कर देगा क्योंकि तब यह उनके लिए 'अमीरी का प्रतीक' नहीं रह जाएगा.
दूसरी बात ये कि गुच्ची अपने ज्यादातर प्रोडक्ट्स 'लिमिटेड एडिशन' में बनाते हैं. इससे उसके प्रोडक्ट्स की कीमत ऑटोमैटिक ज्यादा हो जाती है.
लेकिन सबसे जरूरी बात जो गुच्ची को महंगा बनाती है, वह इसकी एक विरासत है. गुच्ची के ज्यादातर बैग्स आज भी इटली के फ्लोरेंस में पारंपरिक कारीगर अपने हाथ से बनाते हैं. इसके लेदर की क्वालिटी, सिलाई और फिनिशिंग इतनी बारीक होती है कि एक बैग को बनाने में कई दिन लग जाते हैं.
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लेकिन गुच्ची यहां तक पहुंचा कैसे?
गुच्ची का इतिहास बड़ा दिलचस्प है. इसकी शुरुआत गुचियो गुच्ची ने की थी. गुचियो इटली के एक साधारण परिवार से थे. उन्होंने लंदन के मशहूर सेवॉय होटल में एक वेटर के रूप में काम किया.
कहा जाता है कि होटल में काम करते समय जब उन्होंने यहां आने वाले अमीरों और उनके आलीशान सूटकेस और बैग्स को देखा तो काफी प्रभावित हुए. यहीं से उनके मन में खुद का बिजनेस शुरू करने का विचार आया.
साल 1921 में गुचियो वापस इटली लौटे और घोड़ों की सवारी करने वालों के लिए चमड़े का सामान और बैग बनाने की एक छोटी सी दुकान खोली. गुचियो की पत्नी और बेटे सभी इस दुकान में काम करते थे.
धीरे-धीरे गुच्ची कंपनी आगे बढ़ती गई. दूसरे विश्व युद्ध के समय इटली पर प्रतिबंध के कारण गुच्ची को झटका लगा, लेकिन गुचियो ने हार नहीं मानी. दूसरे विश्व युद्ध के बाद गुचियो ने कंपनी के शेयर अपने तीनों बेटों- एल्डो, वास्को और रोडोल्फो को बांट दिए.

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गुचियो की मौत के बाद उनके बेटों ने इसे ग्लोबल ब्रांड बनाया. लेकिन 80 और 90 के दशक में परिवार के बीच हिस्सेदारी को लेकर भयानक ड्रामा हुआ और पारिवारिक झगड़े शुरू हो गए. सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब 1995 में गुच्ची के आखिरी पारिवारिक वारिस मौरिजियो गुच्ची (गुचियो के पोते) की उनकी पूर्व पत्नी पेट्रीजिया रेजियानी ने हत्या करवा दी. इस घटना पर हॉलीवुड फिल्म 'House of Gucci' भी बनी है.
आज गुच्ची परिवार का इस कंपनी में कोई मालिकाना हक नहीं है. पारिवारिक झगड़ों के कारण 1993 तक गुच्ची परिवार पूरी तरह से इस कंपनी से बाहर हो गया. 1999 में फ्रेंच कंपनी केरिंग ग्रुप ने इसमें हिस्सेदारी खरीदी और 2004 तक आते-आते गुच्ची का पूरा कंट्रोल इसी के पास आ गया.
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