Power Bank Blast in Indigo Flight: हैदराबाद से चंडीगढ़ जा रही इंडिगो की एक फ्लाइट में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब लैंडिंग के बाद एक यात्री के पावर बैंक में आग लग गई. हालांकि,क्रू मेंबर्स की सूझबूझ से सभी 194 यात्रियों को इमरजेंसी एक्जिट के जरिए तुरंत बाहर निकाला गया और उन्हें सुरक्षित टर्मिनल तक पहुंचाया गया.राहत की बात यह रही कि सभी यात्री सुरक्षित हैं और किसी के घायल होने की खबर नहीं है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर फ्लाइट में पावर बैंक की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.
फ्लाइट में पावर बैंक ले जाने पर सवाल, क्या भारत में भी सख्ती जरूरी?
इस घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या भारत में भी पावर बैंक को लेकर नियम और सख्त किए जाने चाहिए. खासतौर पर तब, जब हाल ही में जापान ने फ्लाइट में पावर बैंक के इस्तेमाल पर सख्त बैन लगा दिया है.
जापान में पावर बैंक पर क्या हैं नए नियम?
जापान सरकार ने 24 अप्रैल से फ्लाइट के दौरान पावर बैंक के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी है.अब यात्री न तो पावर बैंक से अपने फोन चार्ज कर सकते हैं और न ही उसे फ्लाइट के इलेक्ट्रिक सॉकेट में लगा सकते हैं.
नए नियमों के तहत, जापान में हर यात्री सिर्फ दो पावर बैंक ही अपने कैरी-ऑन बैग में ले जा सकता है. हर पावर बैंक की क्षमता 160 वॉट-आवर (Wh) से कम होनी चाहिए. इन्हें चेक-इन बैगेज में रखने की अनुमति नहीं है और इन्हें अपने पास या सीट के नीचे रखना जरूरी है.
जापान सरकार ने नियम तोड़ने वालों के लिए सख्त सजा तय की है. इसमें 10 लाख येन यानी करीब 5.8 लाख रुपये तक का जुर्माना या दो साल तक की जेल हो सकती है.
फ्लाइट्स में पावर बैंक से क्यों बढ़ा खतरा?
हाल के वर्षों में फ्लाइट्स में पावर बैंक से आग और धुआं निकलने की घटनाएं बढ़ी हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह लिथियम-आयन बैटरी को माना जाता है, जो ओवरचार्जिंग, खराब क्वालिटी या झटके लगने पर शॉर्ट सर्किट कर सकती है. यही वजह है कि इंटरनेशनल संस्था ICAO ने भी इस पर नए सेफ्टी स्टैंडर्ड्स लागू किए हैं.
दुनिया की अन्य एयरलाइंस में पावर बैंक को लेकर क्या नियम हैं?
एमिरेट्स और सिंगापुर एयरलाइंस जैसी कई इंटरनेशनल एयरलाइंस पहले ही पावर बैंक के इस्तेमाल पर सख्त नियम लागू कर चुकी हैं. इन एयरलाइंस में यात्री पावर बैंक से डिवाइस चार्ज नहीं कर सकते और इसकी क्षमता भी लिमिटेड रखी गई है.
भारत में पावर बैंक पर DGCA के क्या नियम हैं?
भारत में एविएशन रेगुलेटर DGCA ने भी पावर बैंक को लेकर सख्त नियम बनाए हैं. पावर बैंक को सिर्फ हैंड बैगेज में ही ले जाने की अनुमति है, जबकि चेक-इन बैग में रखना पूरी तरह बैन है. इसका कारण यह है कि अगर केबिन में कोई दिक्कत होती है, तो तुरंत उस पर काबू पाया जा सकता है.
कितनी क्षमता तक पावर बैंक ले जा सकते हैं?
DGCA के नियमों के अनुसार, यात्री सिर्फ 100 वॉट-आवर (लगभग 27,000mAh) तक का पावर बैंक ही फ्लाइट में ले जा सकते हैं. इससे ज्यादा क्षमता वाले पावर बैंक को ले जाना मना है.एयरलाइंस को निर्देश दिए गए हैं कि यात्रियों को बार-बार अलर्ट किया जाए कि अगर किसी डिवाइस से ज्यादा गर्मी, धुआं या जलने जैसी गंध आए, तो तुरंत केबिन क्रू को सूचना दें.
क्या भारत में भी सख्त नियम आएंगे?
चंडीगढ़ में इंडिगो फ्लाइट की इस घटना ने एक बार फिर फ्लाइट सेफ्टी को लेकर चिंता बढ़ा दी है. जापान जैसे देशों में सख्ती बढ़ने के बाद अब सवाल है कि क्या भारत में भी पावर बैंक पर और कड़े नियम लागू किए जाएंगे.
एक्सपर्ट्स का भी कहना है कि सस्ते और लो-क्वालिटी पावर बैंक का इस्तेमाल फ्लाइट में बड़ा खतरा बन सकता है. फिलहाल यात्रियों के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि फ्लाइट में पावर बैंक का इस्तेमाल सावधानी से करें और नियमों का पूरी तरह पालन करें, क्योंकि छोटी सी लापरवाही से बड़ा हादसा हो सकता है.
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