National Pension Scheme: नौकरी हो या बिजनेस, एक उम्र के बाद काम से रिटायर तो होना ही है. ऐसे में आज की बचत, कल पेंशन के तौर पर बड़े काम आने वाली है. पेंशन को लेकर सरकार कई तरह की स्कीम चलाती है. NPS यानी नेशनल पेंशन स्कीम में निवेश को लेकर लोगों के बीच, खासकर गांवों में कम जानकारी है. जानकारी है भी तो जागरूकता कम है. ऐसे में सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. केंद्रीय ग्रामीण विकास विभाग और पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने इसके लिए एक समझौता किया है.
ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल ने इस बारे में जानकारी दी है. समझौते के तहत, गांवों में प्रशिक्षित महिलाओं और सामुदायिक कार्यकर्ताओं को ‘पेंशन सखी' के रूप में तैयार किया जाएगा, जो लोगों को पेंशन योजनाओं की जानकारी देंगी, खाता खुलवाने में मदद करेंगी और आगे भी जरूरी सहायता उपलब्ध कराएंगी. ये 'पेंशन सखी', जीविका दीदी या लखपति दीदी से अलग होंगी. गांवों में पेंशन सखियां पेंशन की पहुंच बढ़ाएंगी. महिलाओं और सेल्फ हेल्प ग्रुप्स के सदस्यों को मदद मिगी.
आजीविका मिशन नेटवर्क का इस्तेमाल
इस पहल में दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाएगा. बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट यानी BC सखियां और अन्य प्रशिक्षित सामुदायिक कार्यकर्ता इसमें अहम भूमिका निभाएंगे. उनका काम स्वयं सहायता समूह यानी SHG की महिलाओं, ग्रामीण महिलाओं, लखपति दीदियों और उन लोगों तक पेंशन की जानकारी पहुंचाना होगा, जिनकी अब तक औपचारिक पेंशन या सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक सीमित पहुंच रही है.
NPS का खाता कैसे खोलें, क्या फायदे... बताएंगी पेंशन सखियां
गांव में कोई महिला या छोटा कारोबारी अगर यह नहीं जानता कि बुढ़ापे के लिए नियमित बचत कैसे शुरू करें या नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) का खाता कैसे खुलता है, तो पेंशन सखी उसे घर या गांव के पास जानकारी और मदद दे सकेगी. वह योजना की शर्तें बताएगी, नामांकन प्रक्रिया में मदद करेगी और जरूरी दस्तावेज या डिजिटल प्रक्रिया को समझाने में सहयोग कर सकती है.
इस योजना की निगरानी के लिए डिजिटल डैशबोर्ड, मोबाइल और वेब आधारित सुविधाओं तथा यूनिक आइडेंटिफायर आधारित ट्रैकिंग का इस्तेमाल किया जाएगा. इससे यह देखा जा सकेगा कि किन इलाकों में कितने लोगों तक पहुंच बनी, कितने खाते खुले और पेंशन सखियों का काम कैसा रहा.
अधिकारी बोले- ऐसे बढ़ेगा पेंशन कवरेज
ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल ने कहा कि SHG सदस्यों की बचत का तरीका, आय का समय और जोखिम अलग होते हैं. इसलिए उनके लिए सामाजिक सुरक्षा बेहद जरूरी है. उनके मुताबिक, पेंशन के बारे में जानकारी ईमानदारी, पारदर्शिता और भरोसे के साथ दी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि वित्तीय जानकारी रखने वाली BC सखियां और सामुदायिक कार्यकर्ता ग्रामीण भारत में पेंशन सखी बनकर पेंशन कवरेज बढ़ा सकते हैं.
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PFRDA की पूर्णकालिक सदस्य ममता शंकर ने कहा कि बढ़ती उम्र और बदलती जनसंख्या संरचना के बीच रिटायरमेंट की तैयारी जरूरी होती जा रही है. इस साझेदारी के जरिए NPS समेत पेंशन उत्पादों को ग्रामीण घरों तक पहुंचाने पर जोर रहेगा. सरकार का लक्ष्य पेंशन जागरूकता बढ़ाना, वित्तीय समावेशन मजबूत करना और ग्रामीण परिवारों को भविष्य की आर्थिक जरूरतों के लिए ज्यादा सुरक्षित बनाना है.
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