भारत का पहला प्राइवेट तौर पर बना ऑर्बिटल रॉकेट अब श्रीहरिकोटा के लॉन्च पैड पर पूरी तरह तैयार खड़ा है और उस पल का इंतज़ार कर रहा है जो देश के स्पेस सेक्टर के लिए ऐतिहासिक हो सकता है. हैदराबाद के इंजीनियरों की एक युवा टीम द्वारा बनाया गया स्काईरूट एयरोस्पेस का 'विक्रम 1' रॉकेट एक ऐसी उपलब्धि हासिल करने के लिए तैयार है, जिसे दुनिया भर में बहुत कम प्राइवेट कंपनियों ने ही हासिल किया है. यह लॉन्च व्हीकल 23 मीटर ऊंचा रॉकेट है जिसका डायमीटर 1.7 मीटर है. यह पूरी तरह से एडवांस्ड कार्बन कम्पोजिट स्ट्रक्चर से बना है और 350 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने में सक्षम है. रॉकेट में तीन सॉलिड स्टेज कॉन्फ़िगरेशन के साथ-साथ लिक्विड फ्यूल वाला ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल (OAM) इस्तेमाल किया गया है और इसमें कई टेस्ट पेलोड भी लगे हैं.
विक्रम-1 भारत के लिए बना लेकिन दुनिया के लिए है
श्रीहरिकोटा में, रॉकेट के पूरी तरह से असेंबल होने और लॉन्च के लिए तैयार होने पर, स्काईरूट एयरोस्पेस के CEO और को-फाउंडर पवन चंदाना ने व्हीकल की तैयारी पर भरोसा जताया. इंडियन स्पेसपोर्ट पर NDTV को दिए एक खास इंटरव्यू में चंदाना ने कहा, "रॉकेट तैयार है और यह बहुत सुरक्षित है. यह अच्छी स्थिति में है और हम जल्द से जल्द उड़ान भरने की कोशिश कर रहे हैं." चंदाना ने कहा, "हमने अपनी समझ के अनुसार हर संभव कोशिश की है. हमने सभी सिस्टम का अच्छे से ध्यान रखा है. रॉकेट के पार्ट्स कई हफ़्ते पहले आने शुरू हो गए थे और हमारी शानदार टीम यहां रॉकेट बनाने और उसे लॉन्च पैड पर लगाने के काम में जुटी थी, और अब हम उड़ान भरने के लिए तैयार हैं."

भारत के लिए यह मिशन सिर्फ एक लॉन्च से कहीं ज़्यादा है. यह एक नए दौर की शुरुआत है जहां प्राइवेट कंपनियां भारतीय ज़मीन से ऑर्बिटल क्लास के रॉकेट बना सकती हैं, टेस्ट कर सकती हैं और लॉन्च कर सकती हैं. चंदाना ने आने वाली उड़ान को न सिर्फ़ स्काईरूट के लिए, बल्कि भारत के तेज़ी से बढ़ते कमर्शियल स्पेस इकोसिस्टम के लिए भी एक अहम मोड़ बताया. चंदाना का कहना है कि 'विक्रम 1' भारत में बना है, लेकिन दुनिया के लिए है.
स्काईरूट की टीम की औसत उम्र 28 साल
उन्होंने कहा, "यह एक ऐतिहासिक पल है क्योंकि एक युवा टीम ने बिल्कुल शुरुआत से एक प्राइवेट कंपनी बनाई - असल में स्काईरूट (Skyroot) की टीम की औसत उम्र 28 साल है. इन सभी ने एक बड़े मिशन के साथ मिलकर रॉकेट को डिज़ाइन किया, बनाया, असेंबल किया, टेस्ट किया, भारत के स्पेसपोर्ट तक लाए, लॉन्च पैड पर रॉकेट को खड़ा किया और यह पक्का किया कि लॉन्च के लिए रॉकेट पूरी तरह तैयार है - यह अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है."
"जिस पल यह उड़ान भरेगा, मुझे लगता है कि यह भारत के स्पेस सेक्टर में एक अभूतपूर्व घटना होगी, क्योंकि एक प्राइवेट कंपनी ने ऑर्बिटल लॉन्च की कोशिश की है - एक ऐसा काम जिसे दुनिया में बहुत कम कंपनियां ही कर रही हैं." कई शुरुआती टेस्ट उड़ानों के उलट, जिनमें या तो डमी वज़न ले जाया जाता है या वे लगभग खाली उड़ती हैं, विक्रम 1 कई तरह के एक्सपेरिमेंटल और प्रतीकात्मक पेलोड (payloads) ले जा रहा है.
चंदाना ने मजाक में कहा, सबसे अनोखे पेलोड में से एक वह है जो आसमान में 'Like a Dimond in the Sky' रखने का मौका है. यह बहुत ही दिलचस्प है.
तीन महान दिग्गज वैज्ञानिकों को श्रद्धांजलि
लेकिन इस अनोखी बात के अलावा, यह मिशन भारत के महान वैज्ञानिकों को श्रद्धांजलि भी देता है. चंदना के अनुसार, रॉकेट में भारतीय विज्ञान के तीन महान दिग्गजों की छोटी कलाकृतियां (miniature artworks) भेजी जा रही हैं."इसमें भारत के तीन सबसे महान वैज्ञानिकों की छोटी कलाकृतियां हैं. डॉ. विक्रम ए. साराभाई, जो मेरे व्यक्तिगत प्रेरणास्रोत हैं. असल में, रॉकेट का नाम विक्रम साराभाई के नाम पर ही रखा गया है. इसके अलावा, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और डॉ. सीवी रमन की छोटी मूर्तियाँ भी उन्हें श्रद्धांजलि के तौर पर अंतरिक्ष में भेजी जा रही हैं."

इस मिशन के वैज्ञानिक मकसद भी अहम
पेलोड में एक टेक्नोलॉजी का डेमो भी शामिल है, जिसका मकसद मॉडर्न स्पेसफ्लाइट में बढ़ते खतरों में से एक, यानी ऑर्बिटल मलबे (अंतरिक्ष में जमा कचरे) से निपटना है. चंदना ने बताया, "एक खास पेलोड है जो मलबे को हटाने वाली टेक्नोलॉजी को टेस्ट करेगा. इसमें रोबोटिक आर्म्स हैं जिनका स्पेस में डेमो किया जाएगा और वे मलबे को हटाएंगे."
इस मिशन में सैटेलाइट और कई एक्सपेरिमेंटल सिस्टम भी ले जाए जाएंगे, जिनका मकसद ऑर्बिट में टेक्नोलॉजी को टेस्ट करना है. कई पेलोड लॉन्च किए जा रहे हैं, जिनमें दो सैटेलाइट शामिल हैं. एक और टेस्ट सैटेलाइट है और ऐसे पेलोड हैं जो मैकेनिज्म को टेस्ट करेंगे. यह एक अच्छा साइंटिफिक मिशन होगा. बेशक, ये सभी एक टेस्ट लॉन्च पर टेस्ट पेलोड हैं." हालांकि, स्काईरूट के लिए मुख्य मकसद रॉकेट ही है.
चंदना ने कहा, "मिशन का सबसे अहम मकसद उड़ान भरना और फ्लाइट के दौरान ज़्यादा से ज़्यादा सिस्टम को साबित करना है. इसके बाद हम अगले टेस्ट लॉन्च की तैयारी कर रहे हैं." यह लॉन्च प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी शुरू होने के बाद से स्पेस पॉलिसी में भारत के बदलाव को भी दिखाता है.
दशकों तक, ऑर्बिटल रॉकेट का डेवलपमेंट सिर्फ़ ISRO के दायरे में ही रहा. आज, स्काईरूट जैसे स्टार्टअप तेज़ी से बढ़ते कमर्शियल स्पेस मार्केट में अहम खिलाड़ी के तौर पर उभर रहे हैं.
सरकार और रेगुलेटर्स का शुक्रिया
चंदना ने इस मिशन को मुमकिन बनाने का श्रेय पॉलिसी में सुधार और सरकार के सपोर्ट को दिया. "InSpace की प्रक्रिया आसान है. रेगुलेटर्स का शुक्रिया कि वे इस सफ़र को मुमकिन बना रहे हैं और पूरी प्रक्रिया को आसान बना रहे हैं ताकि रेगुलेशन अब स्पेस सेक्टर में रुकावट न बने." उन्होंने प्राइवेट प्लेयर्स के लिए स्पेस सेक्टर के दरवाज़े खोलने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी आभार जताया और कहा, 'माननीय प्रधानमंत्री मोदी का खास शुक्रिया. भारत को स्पेस पावरहाउस बनाने और प्राइवेट प्लेयर्स के लिए सेक्टर खोलने के उनके विज़न ने स्काईरूट के मिशन को मुमकिन बनाया है, जिससे हम लॉन्च पैड पर ऑर्बिटल रॉकेट रख पा रहे हैं.'
चंदना ने कहा कि आने वाले सालों में भारत की लॉन्च कैडेंस (लॉन्च की रफ़्तार) को काफ़ी बढ़ाने का प्रधानमंत्री का लक्ष्य प्रेरणा देता है.
"उन्होंने एक बहुत मज़बूत लक्ष्य रखा है कि भारत को 2030 में 50 लॉन्च करने चाहिए. विक्रम 1 इस लॉन्च और आने वाले लॉन्च के साथ एक अहम छाप छोड़ेगा ताकि हम उस विज़न तक पहुँच सकें." एक अनोखी पहल के तहत, विक्रम-1 अपने साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का खास संदेश भी अंतरिक्ष में ले जा रहा है. चंदना ने बताया, "सम्मान के तौर पर, हमारे पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भेजा हुआ एक खास कार्ड है जो अंतरिक्ष में जाएगा. उन्होंने एक बहुत ही शानदार संदेश लिखा है और यह रॉकेट के साथ अंतरिक्ष में जाएगा." इस बारे में और जानकारी का इंतज़ार है.
फिलहाल, विक्रम 1 श्रीहरिकोटा के लॉन्च पैड पर पूरी तरह तैयार खड़ा है. अगर सब कुछ ठीक रहा, तो यह जल्द ही बंगाल की खाड़ी के ऊपर उड़ान भरेगा. यह न सिर्फ़ पेलोड लेकर जाएगा, बल्कि एक ऐसी नई पीढ़ी की उम्मीदें भी साथ ले जाएगा जो भारत के प्राइवेट स्पेस इंडस्ट्री को दुनिया के सबसे काबिल लॉन्च प्रोवाइडर्स में शामिल करने के लिए पूरी तरह तैयार है.
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