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19 साल पुराना वो कैच, जिसने आखिरी ओवर में तोड़ा PAK का सपना, आज भी बढ़ा देता है धड़कनें

24 सितंबर 2007 को भारत और पाकिस्तान के बीच पहला टी20 वर्ल्ड कप फाइनल खेला गया. इस हाई-वोल्टेज एक्शन के लास्ट ओवर में पाकिस्तान को जीत के लिए 13 रन चाहिए थे, लेकिन अगली ही गेंद पर श्रीसंत ने कैच लपक लिया और भारत 5 रन से जीत गया.

19 साल पुराना वो कैच, जिसने आखिरी ओवर में तोड़ा PAK का सपना, आज भी बढ़ा देता है धड़कनें

24 सितंबर 2007 का वो दिन क्रिकेट फैंस कभी नहीं भूल सकते, जब जोहानिसबर्ग का वांडरर्स स्टेडियम हर नई गेंद के साथ धड़कन बढ़ा रहा था. सामने थीं भारत और पाकिस्तान की टीमें और दांव पर था क्रिकेट इतिहास का पहला टी20 वर्ल्ड कप. मुकाबला रोमांच की सारी हदें पार कर चुका था. पाकिस्तान को आखिरी ओवर में जीत के लिए 13 रन चाहिए थे और क्रीज पर खड़े थे मिस्बाह-उल-हक. भारत की उम्मीदें लगातार टूट रही थीं तो पाकिस्तान की नजरें पहली टी20 वर्ल्ड चैंपियन बनने पर थीं.

फिर आया वो पल, जो आज 19 साल बाद भी भारत-पाकिस्तान क्रिकेट के सबसे यादगार लम्हों में गिना जाता है. जोगिंदर शर्मा की गेंद पर मिस्बाह ने पहले छक्का लगाया और मुकाबला लगभग भारत के हाथ से फिसल चुका था, लेकिन अगली ही गेंद पर उन्होंने ऐसा शॉट खेला, जिसने पूरा मैच पलट दिया.

टीम इंडिया ने पहले बल्लेबाजी कर बनाए 157 रन

दरअसल, टॉस के बाद भारत ने पहले बल्लेबाजी की और टीम की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही. वीरेंद्र सहवाग चोट के कारण मुकाबले से बाहर थे और उनकी जगह यूसुफ पठान को टीम में शामिल किया गया. यूसुफ ने आते ही अपनी क्षमता दिखाई और मोहम्मद आसिफ की गेंद पर शानदार छक्का लगाया, लेकिन ज्यादा देर टिक नहीं सके.

इसके बाद गौतम गंभीर ने पारी को संभाला. उन्होंने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 54 गेंदों में 75 रन की बेहतरीन पारी खेली. गंभीर ने मुश्किल परिस्थितियों में रन जुटाए और भारतीय पारी को मजबूती दी. पाकिस्तान की ओर से उमर गुल ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 3 विकेट झटके. पारी के आखिरी हिस्से में रोहित शर्मा ने तेजी से रन बनाए और भारत को 20 ओवर में 157/5 के स्कोर तक पहुंचाया. पाकिस्तान के सामने 158 रन का लक्ष्य था.

पाकिस्तान को नहीं मिली उम्मीद के मुताबिक शुरुआत

158 रन का पीछा करने उतरी पाकिस्तान की शुरुआत खराब रही. आरपी सिंह ने शुरुआती ओवरों में मोहम्मद हफीज और कामरान अकमल को आउट कर भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया. हालांकि इमरान नजीर ने भारतीय गेंदबाजों पर जोरदार हमला बोला. उन्होंने महज 14 गेंदों में 33 रन ठोककर पाकिस्तान की उम्मीदें जगा दीं, लेकिन उनकी तूफानी पारी का अंत रन आउट के रूप में हुआ. मिड ऑफ से रॉबिन उथप्पा के शानदार थ्रो ने नजीर को पवेलियन भेज दिया. इसके बाद भारत ने लगातार विकेट निकालकर पाकिस्तान पर दबाव बढ़ा दिया.

77 रन पर 6 विकेट, पाकिस्तान की टूट चुकी थी उम्मीद

एक समय पाकिस्तान की हालत बेहद खराब हो गई थी. टीम 77 रन पर 6 विकेट गंवा चुकी थी. शाहिद अफरीदी भी बड़ी पारी नहीं खेल सके और एस श्रीसंत ने उन्हें कैच कराकर भारत की स्थिति और मजबूत कर दी. ऐसा लग रहा था कि भारत आसानी से मुकाबला जीत जाएगा, लेकिन मिस्बाह-उल-हक ने हार मानने से इनकार कर दिया. उन्होंने यासिर अराफात और सोहेल तनवीर के साथ मिलकर पाकिस्तान की पारी को संभाला. मिस्बाह ने एक छोर से रन बनाए और अचानक मुकाबला फिर से रोमांचक हो गया.

हरभजन को लगे एक के बाद एक तीन छक्के

मिस्बाह ने हरभजन सिंह के खिलाफ अटैकिंग बल्लेबाजी दिखाई और एक ही ओवर में तीन छक्के जड़ दिए. सोहेल तनवीर ने भी तेज 12 रन बनाकर पाकिस्तान की उम्मीदों को जिंदा रखा. जिस मुकाबले में कुछ देर पहले भारत की जीत लगभग तय लग रही थी, वहां अब पाकिस्तान जीत के करीब पहुंच चुका था. आखिरी ओवर शुरू होने से पहले पाकिस्तान को जीत के लिए 13 रन चाहिए थे और उसके पास सिर्फ एक विकेट बचा था. स्ट्राइक पर थे मिस्बाह.

धोनी ने जोगिंदर शर्मा पर लगाया दांव

भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के सामने बड़ा सवाल था कि आखिरी ओवर किसे दिया जाए. उन्होंने अनुभवी गेंदबाजों की जगह युवा जोगिंदर शर्मा पर भरोसा जताया. जोगिंदर ने पहली गेंद वाइड डाल दी, अब भारतीय खेमे में चिंता और बढ़ गईं. अब पाकिस्तान को जीत के लिए और कम रन चाहिए थे. इसके बाद जोगिंदर ने फुल टॉस गेंद डाली और मिस्बाह ने उसे लॉन्ग ऑफ के ऊपर से जबरदस्त छक्का जड़ दिया.

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अब पाकिस्तान को जीत के लिए सिर्फ 6 रन चाहिए थे और उसके पास चार गेंदें बाकी थीं. मैच लगभग पाकिस्तान की तरफ जाता दिखाई दे रहा था. फिर आया वो शॉट और श्रीसंत ने बदल दिया इतिहास. अगली गेंद पर मिस्बाह ने कुछ ऐसा करने का फैसला किया, जिसे आज भी क्रिकेट फैंस याद करते हैं.

वह अपने स्टंप्स के पार गए और जोगिंदर की गेंद को फाइन लेग के ऊपर से स्कूप करने की कोशिश की. लेकिन गेंद उनके बल्ले पर सही तरीके से नहीं आई और हवा में ऊंची उठ गई. शॉर्ट फाइन लेग पर खड़े एस श्रीसंत गेंद के नीचे पहुंचे. कुछ सेकंड के लिए पूरा स्टेडियम जैसे थम गया. फिर श्रीसंत ने कैच पकड़ लिया.

भारत के खिलाड़ी जश्न में डूब गए और पाकिस्तान के खिलाड़ी मायूस होकर मैदान पर खड़े रह गए. मिस्बाह की पारी 43 रन पर खत्म हुई और पाकिस्तान 152 रन पर ऑलआउट हो गया. भारत ने यह मुकाबला 5 रन से जीतकर पहला टी20 विश्व कप अपने नाम कर लिया.

वो कैच आज भी क्यों याद किया जाता है?

उस मुकाबले में भारत की जीत के कई नायक थे. आरपी सिंह और इरफान पठान ने तीन-तीन विकेट लेकर पाकिस्तान के रन चेज को झटका दिया. गौतम गंभीर ने बल्ले से शानदार 75 रन बनाए. रोहित शर्मा ने आखिरी ओवरों में अहम रन जोड़े. लेकिन मैच की सबसे बड़ी तस्वीर आज भी वही है-मिस्बाह का स्कूप और श्रीसंत का कैच. यही वह पल था जब पाकिस्तान की जीत और भारत की हार के बीच सिर्फ एक गेंद खड़ी थी. मिस्बाह उस गेंद पर सफल हो जाते तो पाकिस्तान पहली टी20 विश्व चैंपियन बनने की दहलीज पर होता. लेकिन एक गलत टाइमिंग ने कहानी बदल दी.

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