- ओपन एआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने अपनी पूरी लिक्विड नेट वर्थ Retro Biosciences कंपनी में निवेश की है
- Retro Biosciences की तकनीक Partial Cellular Reprogramming शरीर की कोशिकाओं को युवा स्थिति में लौटाती है
- AI मॉडल GPT‑4b micro ने कोशिकाओं को पुनः प्रोग्राम करने की प्रक्रिया को 50 गुना तेज और प्रभावी बनाया है
ओपन एआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन एक ऐसी तकनीक पर निवेश कर रहे हैं जो आपका बुढ़ापा रोक कर आपको सजा जवान रखेगी. ऑल्टमैन इस खास टेक्नॉलोजी पर अरबों डॉलर का निवेश कर रहे हैं. सैम ऑल्टमैन ने खुलासा किया है कि उन्होंने अपनी पूरी लिक्विड नेट वर्थ(जिसका तुरंत इस्तेमाल किया जा सके). एक कंपनी में निवेश कर दी है, कंपनी का नाम Retro Biosciences है. ऑल्टमैन ने एक वीडियो में खुद बताया कि उन्होने शुरुआत में इस कंपनी में 180 मिलियन डॉलर (लगभग 1500 करोड़ रुपये) का निवेश किया और बाद में कंपनी ने 1 अरब डॉलर (1 billion) का फंडिंग राउंड भी जुटाया है. आज कंपनी की वैल्यू करीब 5 अरब डॉलर बताई जा रही है.
क्या है कंपनी की तकनीक?
Retro Biosciences एक उन्नत तकनीक पर काम कर रही है, जिसे Partial Cellular Reprogramming कहा जाता है. इसका मतलब है इंसानी शरीर की कोशिकाओं को पूरी तरह स्टेम सेल में बदले बिना एक युवा स्थिति (younger state) में वापस लाना. यानी आप वही इंसान रहते हैं, लेकिन आपकी बॉडी की उम्र कम हो जाती है.
कंपनी का मानना है कि ज्यादातर बीमारियां उम्र से जुड़ी होती हैं. 20 साल के लोग कम बीमार होते हैं, 80 साल की उम्र में बीमारी बढ़ जाती है. तो सोच यह है कि अलग‑अलग बीमारियों (Cancer, Alzheimer's, Heart Disease) से लड़ने के बजाय अगर कोशिकाओं को जवान बना दिया जाए तो शायद ये बीमारियां होने से पहले ही रोकी जा सकता है. एक ऐसी तकनीक जो बढ़ती उम्र थम जाए और बीमारियों को जड़ से कम कर दे और इंसान की सेहत में बड़ा बदलाव ला सके.
Sam Altman just revealed he put his ENTIRE liquid net worth into one company to reverse aging.
— Ricardo (@Ric_RTP) May 18, 2026
The company is called Retro Biosciences.
He put $180 million of his own money as the seed round. Then he came back for a $1 billion Series A. The company is now valued at $5 billion.… pic.twitter.com/Uy1xVztqsM
AI और एंटी‑एजिंग रिसर्च
अब इस कहानी में AI की भूमिका सामने आती है OpenAI ने खास तौर पर Retro Biosciences की रिसर्च के लिए एक विशेष मॉडल बनाया, जिसे GPT‑4b micro कहा जाता है. इस AI मॉडल का उपयोग उन प्रोटीन्स को दोबारा डिजाइन करने के लिए किया गया, जो वयस्क कोशिकाओं (adult cells) को फिर से स्टेम सेल में बदलने की प्रक्रिया (reprogramming) में काम आते हैं. यह वही तकनीक है, जिसके लिए पहले नोबेल पुरस्कार भी मिल चुका है.
पहले यह प्रक्रिया बहुत धीमी थी और 1000 में सिर्फ 1 कोशिका (cell) पर ही काम करती थी. AI की मदद से बने नए प्रोटीन्स ने इस प्रक्रिया को 50 गुना ज्यादा प्रभावी बना दिया. जो काम पहले 3 हफ्ते लेता था, वह अब सिर्फ 7 दिनों में पूरा होने लगा. बसे खास बात यह रही कि AI ने ऐसे प्रोटीन डिजाइन सुझाए जिन्हें इंसानी वैज्ञानिक शायद कभी कोशिश ही नहीं करते. कुछ बदलाव 100 से ज्यादा अमीनो एसिड्स तक अलग थे.
AI और हेल्थकेयर: तेजी से बदलती तस्वीर
सैम ऑल्टमैन के मुताबिक, AI ने सालों की बायोलॉजिकल रिसर्च को बहुत कम समय में समेट दिया है.Retro Biosciences के CEO ने भी कहा कि यह AI मॉडल मानव वैज्ञानिकों की तुलना में ज्यादा तेज और बेहतर परिणाम दे रहा है. कंपनी ने अल्जाइमर बीमारी के लिए एक दवा पर मानव परीक्षण भी शुरू कर दिया है.
ऑल्टमैन ने यह भी बताया कि GPT‑5 को खास तौर पर हेल्थकेयर से जुड़े सवालों के लिए अपग्रेड किया गया है. अब लोग अपने मेडिकल रिकॉर्ड अपलोड कर रहे हैं, अपने लक्षण (symptoms) बता रहे हैं और AI से सीधे जवाब ले रहे हैं. उन्होंने एक उदाहरण दिया कि उन्होंने खुद एक त्वचा की समस्या की फोटो अपलोड की और ChatGPT ने उसे सही तरीके से पहचाना और दवा सुझाई. ऑल्टमैन के अनुसार कई डॉक्टर गुप्त रूप से घर पर ChatGPT का उपयोग कर रहे हैं क्योंकि उनके अस्पतालों में अभी HIPAA‑compliant (डेटा सुरक्षा मानकों वाला) वर्जन उपलब्ध नहीं है. उन्होंने कहा कि लगभग हर क्लिनिक में यही स्थिति है. उन्होंने कहा कि हर डॉक्टर ChatGPT का इस्तेमाल करता है, लेकिन सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं कर सकता.
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AI, हेल्थकेयर और लंबी उम्र की दौड़: बड़ा बदलाव जारी
सैम ऑल्टमैन का अनुमान है कि अगले 10 वर्षों में दुनिया के हर व्यक्ति को आज के सबसे बेहतर इलाज से भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी. इस पर जरा सोचिए दुनिया की सबसे शक्तिशाली AI कंपनी के CEO ने अपनी पूरी संपत्ति एक एंटी‑एजिंग स्टार्टअप में लगा दी
और फिर उसी के लिए खास AI मॉडल तैयार किया जिसने इंसानों के मुकाबले 50 गुना बेहतर नतीजे दिए.
यहां दो चीजें एक साथ हो रही हैं:
1. AI रिसर्च में क्रांति ला रहा है
-दवाओं और बायोलॉजी में तेज प्रगति
-नई खोजें पहले से कहीं ज्यादा तेजी से
2. मेडिकल दुनिया में AI का फैलाव
-डॉक्टर और क्लिनिक पहले से ही इसका इस्तेमाल कर रहे हैं
-लेकिन ज्यादातर जगहों पर इसे खुलकर स्वीकार नहीं किया जा रहा
हेल्थकेयर में AI की नई भूमिका
धीरे‑धीरे OpenAI जैसी कंपनियां हेल्थकेयर सिस्टम की रीढ़ (backbone) बनती जा रही हैं. और यह बदलाव बिना शोर‑शराबे के चुपचाप हो रहा है, जिसे ज्यादातर लोग अभी समझ भी नहीं पाए हैं. पहले अमीर लोगों के बीच लंबी उम्र (longevity) की दौड़ एक साइड प्रोजेक्ट जैसी मानी जाती थी.
➔जेफ बेजोस → Altos Labs
➔मार्क ज़ुकरबर्ग, पीटर थील → समान प्रोजेक्ट्स
लेकिन ये प्रयास ज्यादा गंभीर नहीं माने जाते थे.अब सैम ऑल्टमैन जैसे लोग पूरी ताकत और संसाधनों के साथ इस दिशा में निवेश कर रहे हैं.
ऑल्टमैन का तरीका सबसे अलग क्यों?
सैम ऑल्टमैन का तरीका बाकी अरबपतियों से अलग है. उनके पास एक ऐसी चीज है जो दूसरों के पास नहीं थी.ऐसी AI तकनीक, जो इंसानों से कहीं तेजी से असली वैज्ञानिक खोज कर सकती है. अगर Retro Biosciences की सेलुलर रीप्रोग्रामिंग तकनीक बड़े स्तर (scale) पर सफल हो जाती है, तो दुनिया की पहली ऐसी पीढ़ी, जो ज्यादा लंबी और स्वस्थ जिंदगी जी सकेगी, शायद आज ही हमारे बीच हो. सबसे दिलचस्प बात यह है कि इतना बड़ा बदलाव होने के बावजूद सैम ऑल्टमैन इसके बारे में ज्यादा खुलकर बात नहीं कर रहे और यही सवाल उठता है कि जब इतनी बड़ी हेल्थ रिवोल्यूशन चल रही है, तो इसके बारे में इतनी चुप्पी क्यों है?
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