क्या इंसान 100 नहीं, 150 साल तक जी सकता है? क्या उम्र बढ़ने की रफ्तार को इतना कम किया जा सकता है कि लोग पहले के मुकाबले ज्यादा लंबी और स्वस्थ जिंदगी जी सकें? ये सवाल लंबे समय से वैज्ञानिकों की दिलचस्पी का विषय रहे हैं. अब रूस ने इन सवालों के जवाब खोजने के लिए 26 अरब डॉलर का बड़ा दांव खेला है. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की खास दिलचस्पी वाले इस प्रोजेक्ट का मकसद सिर्फ बीमारियों का इलाज ढूंढना नहीं, बल्कि यह समझना है कि उम्र बढ़ने की रफ्तार को कैसे धीमा किया जाए. यही वजह है कि रूस का यह मिशन दुनियाभर में चर्चा का विषय बना हुआ है.
आखिर क्या है रूस का प्लान?
रूस ने "न्यू हेल्थ प्रिजर्वेशन टेक्नोलॉजीज" नाम का एक प्रोग्राम शुरू किया है. इसके तहत वैज्ञानिक कई अलग-अलग तकनीकों पर काम कर रहे हैं. इनमें जीन थेरेपी, बायोप्रिंटिंग और सुअरों के भीतर इंसानी अंग विकसित करने जैसी रिसर्च शामिल है. हाल ही में रूस के एक मंत्री डेनिस सेकिरिंस्की ने कहा था कि,
Denis Sekirinsky
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश एक स्टडी में भी मनुष्यों की आयु सीमा कितनी है इस पर रिसर्च की गई है. जिसमें मनुष्यों की अधिकतम उम्र की कोई सीमा नहीं होती है. जिसमें बताया गया है कि 122 सालों के रिकॉर्ड को तोड़ना कैसे संभव हो सकता है.

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सुअरों के अंगों पर क्यों हो रहा है काम?
इस मिशन का सबसे दिलचस्प हिस्सा सुअरों से जुड़ी रिसर्च है. वैज्ञानिक ऐसे खास सुअरों पर काम कर रहे हैं जिनमें इंसानी शरीर से मैच करने वाले अंग विकसित किए जा सकें. उम्मीद है कि भविष्य में इन अंगों का इस्तेमाल ट्रांसप्लांट के लिए किया जा सकेगा. रूस का मानना है कि इससे अंगों की कमी जैसी बड़ी समस्या को दूर करने में मदद मिल सकती है.
इसके साथ ही वैज्ञानिक बायोप्रिंटिंग तकनीक पर भी काम कर रहे हैं. आसान भाषा में कहें तो इसमें 3डी तकनीक की मदद से जिंदा टिश्यू और भविष्य में इंसानी अंग तैयार करने की कोशिश की जाती है. रूसी वैज्ञानिक पहले ही इंसानी कार्टिलेज और चूहे की थायरॉयड ग्लैंड जैसे कुछ टिश्यू प्रिंट करने का दावा कर चुके हैं. उनका लक्ष्य आने वाले वर्षों में ऐसे अंग तैयार करना है जो खराब हो चुके प्राकृतिक अंगों की जगह ले सकें.
क्या होता है ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन
सुअरों के अंगो का मनुष्यों में प्रत्यारोपण ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन कहा जाता है. दरअसल अंगदान (Organ Donation) की कमी को देखते हुए वैज्ञानिक काफी समय से जानवरों के अंगों का इस्तेमाल करने पर रिसर्च कर रहे हैं. और सुअरों को इसके लिए इन्हें सबसे परफेक्ट माना जाता है. इसकी वजह है उनके अंगों का आकार और कार्यप्रणाली इंसानों से बहुत मिलती-जुलती है.
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश एक और स्टडी में जेनोट्रांसप्लांटेशन केी बात की गई है. जिसमें ये पूरी प्रोसेस किस तरह से काम करता है और क्या है ये बताया गया है.
पुतिन की दिलचस्पी क्यों है चर्चा में?
उम्र बढ़ना और लंबी उम्र का विषय पुतिन की खास दिलचस्पी का हिस्सा लंबे समय से रहा है. उन्हें कई बार इस मुद्दे पर खुलकर बात करते देखा गया है. पिछले साल चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ उनकी एक बातचीत भी काफी चर्चा में रही थी. उस दौरान दोनों नेताओं ने बायोटेक्नोलॉजी की मदद से इंसानों की उम्र बढ़ने और भविष्य में 150 साल तक जीने की संभावनाओं पर बात की थी. यही वजह है कि रूस के इस प्रोजेक्ट को सिर्फ एक साइंस प्रोग्राम नहीं, बल्कि पुतिन की निजी रुचि से जुड़ा मिशन भी माना जा रहा है.
क्या इंसान कभी 150 साल तक जी पाएगा? फिलहाल इसका जवाब किसी के पास नहीं है. वैज्ञानिक भी मानते हैं कि अमरता अभी बहुत दूर की बात है. लेकिन दुनिया भर में ऐसी तकनीकों पर तेजी से काम हो रहा है जो उम्र बढ़ने की रफ्तार को कम कर सकती हैं और लोगों को ज्यादा समय तक फिट, स्वस्थ और एक्टिव रख सकती हैं. अगर रूस और दूसरे देशों के वैज्ञानिक इस दिशा में बड़ी कामयाबी हासिल कर लेते हैं, तो आने वाले समय में इंसानी उम्र को लेकर हमारी सोच पूरी तरह बदल सकती है. तब शायद 100 साल की उम्र उतनी बड़ी बात नहीं लगेगी, जितनी आज लगती है.
संदर्भ सूची
pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC8636159/
pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC11409890/#sec3
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