कच्चे तेल की कीमतों में आज सोमवार, 19 अक्टूबर को गिरावट देखने को मिली है. शुक्रवार को 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने के बाद ब्रेंट क्रूड फिसलकर 108.06 डॉलर पर आ गया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रूस पर कुछ प्रतिबंधों और टैरिफ को हटाने के फैसले से बाजार को राहत मिली है. इसके अलावा, होर्मुज स्ट्रेट से तेल की सप्लाई को लेकर भी अमेरिका की ओर से राहत की खबर आई है.
हालांकि, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच तेल की कीमतों को लेकर चिंता अभी बनी हुई है. ऐसे में सवाल है कि क्या कच्चे तेल की इस गिरावट से भारत में पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा?
5 महीने के हाई से फिसला कच्चा तेल
शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी. यह 19 मई के बाद इसका सबसे हाई लेवल था. लेकिन सोमवार को इसमें 1.80 डॉलर यानी करीब 1.64% की गिरावट आई और कीमत 108.06 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई. वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 53 सेंट यानी 0.52% गिरकर 100.88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया.
ट्रंप के फैसले से बाजार को राहत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन करके ग्राहम एक्ट के तहत कुछ प्रतिबंधों और टैरिफ को रोक दिया. इस फैसले से रूस से तेल और दूसरे फ्यूल की सप्लाई बढ़ने की उम्मीद है. पिछले महीने रूस पर दबाव बनाने के लिए यह कानून लाया गया था.
होर्मुज से तेल की सप्लाई पर राहत
अमेरिका ने कहा है कि उसके सैनिकों की मदद से पिछले हफ्ते होर्मुज स्ट्रेट से 10 करोड़ बैरल से ज्यादा तेल सुरक्षित बाहर निकाला गया. इससे दुनिया में तेल की कमी को लेकर कुछ राहत मिली है.हालांकि, इस इलाके में जहाजों पर हमले बढ़ने से सप्लाई प्रभावित हुई है. एनालिटिक्स फर्म Kpler के मुताबिक, पिछले हफ्ते खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल की सप्लाई सात दिन के औसत पर घटकर करीब 85 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई. इससे पहले यह 2 करोड़ बैरल प्रतिदिन से ज्यादा थी.
मिडिल ईस्ट में तनाव से बढ़ी चिंता
सऊदी अरब ने शुक्रवार को लाल सागर के ऊपर कई मिसाइलों को रोका. इनमें एक मिसाइल यानबू की ओर जा रही थी, जो तेल निर्यात का अहम केंद्र है. सऊदी अरब ने रियाद और दक्षिणी इलाकों में तीन ड्रोन भी नष्ट किए. यमन के हूती विद्रोहियों ने इस हफ्ते सऊदी अरब पर कई हमले किए हैं.इससे पहले मंगलवार को धहरान में सऊदी अरामको की एक एडमिनिस्ट्रेटिव बिल्डिंग को निशाना बनाया गया था. 10 अक्टूबर को रियाद के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी हमला हुआ था.ईरान की ओर से तेल की सप्लाई रोकने की कोशिशों के बीच होर्मुज स्ट्रेट में भी जहाजों पर हमलों की खबरें आई हैं.
क्या $120 तक जा सकता है कच्चा तेल?
जेपी मॉर्गन का कहना है कि तेल की कीमतें कहां और किस दिशा में जाएगी, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है. गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक, अगर मिडिल ईस्ट में जहाजों पर हमले और बढ़ते हैं, तो कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है. वहीं, अगर तेल का निर्यात सामान्य स्तर पर लौटता है, तो कीमतें 80 डॉलर तक गिर सकती हैं. गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि जहाजों की आवाजाही में रुकावट अब तेल की कीमतों को प्रभावित करने वाला बड़ा कारण है. सप्लाई में कमी का असर गैस और रिफाइंड ईंधन की कीमतों पर भी कच्चे तेल के मुकाबले ज्यादा पड़ सकता है.
भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम घटेंगे?
इस साल अब तक ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 75% से ज्यादा की तेजी आ चुकी है. मिडिल ईस्ट में तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है. सोमवार की गिरावट से बाजार को थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन इससे भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम तुरंत घटेंगे, यह कहना अभी मुश्किल है. हालांकि, मई के बाद से पेट्रोल-डीजल के भाव जस के तस बने हुए हैं.
कच्चे तेल में उतार-चढ़ाव के बीच राहत, दिल्ली में पेट्रोल-डीजल सबसे सस्ता
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद आज रकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने आज भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है.देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में वैट (VAT), ढुलाई और स्थानीय टैक्स के हिसाब से पेट्रोल-डीजल के दाम अलग होते हैं. हालांकि, देश की राजधानी दिल्ली में बाकी बड़े महानगरों के मुकाबले पेट्रोल-डीजल थोड़ा सस्ता है. दिल्ली में आज पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर के हिसाब से बिक रहा है.
यह भी पढ़ें | Oil Prices: 2027 में 80 डॉलर तक आ सकता है कच्चा तेल, क्या पेट्रोल-डीजल भी होंगे सस्ते?
यह भी पढ़ें | सरकार ने गन्ने से एथेनॉल बनाने पर लगाई रोक, क्या चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगेगा ब्रेक?
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं