देश के लाखों सरकारी कर्मचारियों की मेहनत का पैसा, पेंशन के नाम पर हर महीने की सैलरी से काटी जाने वाली रकम, जो करोड़ों में होती है, उसको लेकर चिंता होना स्वभाविक है. पेंशन फंड के नाम पर मोटी पूंजी, नए-नए स्टार्टअप्स में उड़ेल दी जाए तो टेंशन तो होगी ही. ये कहना है, सरकारी कर्मचारियों के एक बड़े संगठन AINPSEF यानी ऑल इंडिया NPS एम्प्लॉइज फेडरेशन का. संगठन ने 17,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश पर सवाल उठाए हैं और सरकार को पत्र लिखकर CAG जांच कराने की मांग की है.
सरकारी कर्मचारियों की नौकरी के दौरान जमा होने वाली बचत का मकसद रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा देना है. हर महीने वेतन से कटने वाली रकम पेंशन फंड में इसी उम्मीद के साथ जमा होती है कि बुढ़ापे में आमदनी का सहारा बनेगी. लेकिन अब नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के निवेश और प्रबंधन को लेकर ही सवाल खड़े हो रहे हैं.
AINPSEF के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंजीत सिंह पटेल ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर NPS ट्रस्ट के कामकाज की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है. संगठन ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से ऑडिट कराने, कथित हितों के टकराव की जांच करने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की अपील की है.
फेडरेशन ने आरोप लगाया है कि पेंशन फंड के प्रबंधन में लापरवाही हुई और कर्मचारियों के हितों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया.
17,000 करोड़ का सवाल- गारंटी नहीं तो निवेश क्यों?
मंजीत सिंह पटेल ने पत्र में दावा किया है कि 1 अक्टूबर 2026 को NPS दिवस के मौके पर पेंशन फंड नियामक व विकास प्राधिकरण (PFRDA) और NPS ट्रस्ट ने वैकल्पिक निवेश फंड (AIF), प्राइवेट इक्विटी, वेंचर कैपिटल और स्टार्टअप में करीब 17,000 करोड़ रुपये निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई थी.
पत्र में अल्टेरिया कैपिटल और ट्राइफेक्टा कैपिटल जैसे संस्थानों का भी जिक्र है. पटेल के मुताबिक, इस मौके पर प्रतीक के तौर पर ट्राइफेक्टा और अल्टेरिया को 400 करोड़ रुपये के चेक दिए गए.
फेडरेशन का सवाल है कि जब कर्मचारियों के अंशदान पर न्यूनतम रिटर्न की गारंटी नहीं है, तो इतनी बड़ी रकम ऐसे निवेश विकल्पों में लगाने का फैसला किस आधार पर किया गया?

पटेल का कहना है कि AIF और स्टार्टअप में निवेश में रिस्क हो सकते हैं. हालांकि, जानकार ये भी बताते हैं कि किसी निवेश को सिर्फ जोखिम वाला बताने से ये साबित नहीं होता कि उसमें अनियमितता हुई है. बहरहाल, AINPSEF ने निवेश से जुड़े फैसलों का आधार, संभावित जोखिम और जवाबदेही की व्यवस्था सार्वजनिक करने की मांग की है.
800 करोड़ रुपये निवेश में देरी, नुकसान कौन भरेगा?
फेडरेशन ने वित्त मंत्रालय की ओर से 8 जुलाई 2026 को UPS कॉर्पस में जमा कराए गए 800 करोड़ रुपये का भी मुद्दा उठाया है.
पटेल का दावा है कि 16 जुलाई तक ये रकम निवेश नहीं की गई थी. संगठन के मुताबिक, इस देरी के कारण ब्याज के रूप में 2 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ.
फेडरेशन ने सवाल किया है कि अगर रकम समय पर निवेश नहीं की गई और इससे वास्तव में नुकसान हुआ, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? संगठन ने कथित नुकसान की भरपाई और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है.

हर साल करीब 2,500 करोड़ फीस, फिर भी रिटर्न की गारंटी नहीं
मंजीत सिंह पटेल ने पत्र में दावा किया है कि पेंशन फंड से हर साल करीब 2,500 करोड़ रुपये अलग-अलग सेवाओं के लिए फीस के रूप में दिए जाते हैं. फेडरेशन का आरोप है कि फंड मैनेजरों को इतनी बड़ी फीस दिए जाने के बावजूद निवेश के प्रदर्शन और जवाबदेही पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है. पत्र में इक्विटी योजनाओं के कमजोर प्रदर्शन और कॉरपोरेट डेट व सरकारी प्रतिभूतियों से मिलने वाले रिटर्न पर भी सवाल उठाए गए हैं.

पटेल का दावा है कि पिछले एक साल में कई कर्मचारियों के NPS निवेश का रिटर्न नकारात्मक रहा है. हालांकि, NPS का रिटर्न निवेश विकल्प और बाजार के प्रदर्शन के अनुसार बदलता रहता है.
EPFO की तरह 8.25% रिटर्न की गारंटी की मांग
फेडरेशन ने मांग की है कि NPS में कर्मचारियों के अंशदान पर कम से कम 8.25% सालाना रिटर्न की गारंटी दी जाए. संगठन ने इसके लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की ब्याज दर का उदाहरण दिया है.
हालांकि, NPS और EPFO की निवेश व्यवस्था अलग-अलग है. NPS में रिटर्न बाजार से जुड़े निवेश के प्रदर्शन पर निर्भर करता है, जबकि EPFO के तहत ब्याज दर अलग व्यवस्था के जरिए तय होती है.
NPS ट्रस्ट में भूमिका पर भी सवाल
पत्र में NPS ट्रस्ट के चेयरमैन दिनेश कुमार खारा की अन्य संस्थाओं में भूमिकाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. पटेल ने आरोप लगाया है कि खारा क्रिसिल के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक और के-फिनटेक के चेयरमैन की भूमिका में भी हैं. फेडरेशन का कहना है कि अलग-अलग संस्थाओं में इन भूमिकाओं के कारण हितों के टकराव की आशंका पैदा हो सकती है.
संगठन ने इस मामले की जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की है. हालांकि, किसी व्यक्ति की अलग-अलग संस्थाओं में भूमिका होना अपने आप में नियमों के उल्लंघन का प्रमाण नहीं है. ये निर्धारित करने के लिए संबंधित नियमों, जिम्मेदारियों और वास्तविक परिस्थितियों की जांच जरूरी होगी.
UPS की पेंशन शुरू होने में देरी का भी मुद्दा
फेडरेशन ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाए हैं. संगठन का आरोप है कि कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारियों की फाइलें पिन कोड और ईमेल जैसी छोटी कमियों का हवाला देकर वापस कर दी गईं.
पत्र के मुताबिक, इस वजह से कई सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन मिलने में देरी हुई और उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा.
फेडरेशन ने यूपीएस पूल कॉर्पस में रकम निवेश करने में कथित देरी से हुए नुकसान की भरपाई की भी मांग की है. इन दावों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित फाइलों, भुगतान रिकॉर्ड और विभागों की प्रतिक्रिया की जरूरत होगी.
फेडरेशन ने प्रधानमंत्री से क्या 6 मांगें कीं?
- CAG से ऑडिट: NPS ट्रस्ट, निजी कंसल्टेंट की नियुक्ति और AIF निवेश की स्वतंत्र जांच.
- NPS ट्रस्ट को भंग करना: संगठन ने ट्रस्ट को भंग कर पेंशन फंड के प्रबंधन और निगरानी की जिम्मेदारी किसी वैधानिक सार्वजनिक संस्था को सौंपने की मांग की है.
- 800 करोड़ रुपये के मामले की जांच: यूपीएस पूल कॉर्पस में रकम निवेश करने में देरी से हुए कथित नुकसान की भरपाई.
- न्यूनतम रिटर्न की गारंटी: कर्मचारियों के अंशदान पर कम से कम 8.25% सालाना रिटर्न.
- NPS या UPS चुनने का विकल्प: कर्मचारियों को सेवा के दौरान दोनों में से किसी एक योजना को चुनने की सुविधा.
- हितों के टकराव पर कार्रवाई: संबंधित संस्थाओं और अधिकारियों की भूमिकाओं की जांच कर जवाबदेही तय करना.

फेडरेशन ने न्यूनतम सुनिश्चित रिटर्न योजना (MARS) को लागू नहीं किए जाने का मुद्दा भी उठाया है. पटेल के मुताबिक, CAG की 2020 की रिपोर्ट में सुझाए गए तंत्र पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने जनवरी 2026 में PFRDA की ओर से गठित बताई गई उच्चस्तरीय समिति की जानकारी सार्वजनिक करने की भी मांग की है.
अब सरकार और PFRDA की ओर निगाहें
AINPSEF ने पत्र में चेतावनी दी है कि मांगों पर समाधान नहीं निकलने पर 20 दिसंबर को PFRDA कार्यालय का घेराव किया जाएगा. इस पूरे मामले में अब सरकार, PFRDA और NPS ट्रस्ट की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी. खास तौर पर 17,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश, 800 करोड़ रुपये की रकम निवेश करने में कथित देरी, फीस के आंकड़ों और हितों के टकराव के आरोपों पर आधिकारिक स्पष्टीकरण से स्थिति साफ हो पाएगी. PFRDA और NPS ट्रस्ट का पक्ष सामने आने पर इस रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा.
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