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New Labour Code: न्यू लेबर कोड किसी राज्य में लागू तो किसी में नहीं, ऐसा क्यों? जानें क्या कहते हैं नियम

New Labour Code: केंद्र ने चार लेबर कोड तो पारित कर दिए हैं, लेकिन इन्हें जमीन पर उतारने के लिए राज्यों को अपने नियम नोटिफाई करने होते हैं. अलग-अलग राज्यों की औद्योगिक परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए वे अपने ड्राफ्ट तैयार करने में समय ले रहे हैं.

New Labour Code: न्यू लेबर कोड किसी राज्य में लागू तो किसी में नहीं, ऐसा क्यों? जानें क्या कहते हैं नियम

Noida Protest Latest News: सोमवार की सुबह नोएडा के औद्योगिक इलाकों के लिए अच्छी नहीं रही. फेज-2 के होजरी कॉम्प्लेक्स से लेकर ईकोटेक-3 के औद्योगिक विहार तक, जो सड़कें आमतौर पर मशीनों के शोर और कामगारों की चहल-पहल से भरी रहती थीं, वहां आज आगजनी, पत्थरबाजी और आक्रोश का मंजर था. 500 से ज्यादा कंपनियों के हजारों मजदूर सड़कों पर उतर आए.

कर्मचारियों का गुस्सा कम सैलरी, काम के घंटों की अनिश्चितता को लेकर था. लेकिन इस आक्रोश के बीच एक बड़ा सवाल उठ रहा है. अगर केंद्र ने न्यू लेबर कोड (New Labour Code) लागू की बात कह दी तो ये देश के सभी राज्य में एक साथ लागू क्यों नहीं हुआ है.

New Labour Code

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समाधान नए कानूनों में मौजूद

नोएडा में मजदूर जिन मांगों को लेकर आक्रोश दिखे उनमें से ज्यादातर का पक्का सॉल्यूशन नए लेबर कोड में पहले से ही मौजूद है. इसलिए ये नया लेबर कोड लागू होता, तो मजदूरों की समस्याएं काफी हद तक कम हो जातीं.

  • नए कोड कहता है कि हर महीने की 7 तारीख तक सैलरी बैंक खाते में आना जरूरी है. नोएडा की कई कंपनियों में पेमेंट देरी से होना इस आक्रोश की अहम वजह बना.
  • इसके अलावा अभी के समय में कई जगह मजदूरों से एक्सट्रा काम तो लिया जाता है, लेकिन पेमेंट वही नॉर्मल रेट पर ही होता है.
  • न्यू लेबर कोड में साफ कहा गया है कि 8 घंटे के बाद काम करने पर डबल ओवरटाइम देना होगा.
  • इसके साथ ही न्यू लेबर कोड के लागू होने से पूरे देश में एक फ्लोर वेज यानी न्यूनतम मजदूरी की सीमा तय होगी, जिससे कम सैलरी की समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है.

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पूरे देश में एक साथ लागू क्यों नहीं?

अब आते हैं अपने बड़े सवाल पर कि जब केंद्र सरकार ने इसे अप्रैल से लागू करने की तैयारी कर ली थी, तो फिर कुछ राज्यों में इसे अभी तक लागू क्यों नहीं किया गया है. दरअसल इसका जवाब छिपा है भारत के संविधान में. संविधान कहता है कि लेबर समवर्ती सूची का मामला है. इसका मतलब कि केंद्र और राज्य दोनों इस पर कानून बना सकते हैं.

राज्यों को नियम नोटिफाई करने होंगे

केंद्र ने चार लेबर कोड तो पारित कर दिए हैं, लेकिन इन्हें जमीन पर उतारने के लिए राज्यों को अपने नियम नोटिफाई करने होते हैं. अलग-अलग राज्यों की औद्योगिक परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए वे अपने ड्राफ्ट तैयार करने में समय ले रहे हैं. इसके अलावा डिजिटल पोर्टल और डेटाबेस तैयार करने में समय लग रहा है.

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